आत्मनिर्भर क्लीन प्लांट प्रोग्राम
Atmanirbhar Clean Plant Programme (CPP)
₹1,766 करोड़ का कार्यक्रम जो भारत भर में 9 क्लीन प्लांट सेंटर बना रहा है — ताकि आम, सेब, संतरा, अनार, अंगूर, अमरूद, लीची उगाने वाले किसान प्रमाणित वायरस-मुक्त पौधे ख़रीद सकें, बजाय संक्रमित नर्सरी पौधों पर 15–25 साल का दाँव लगाने के।
- कुल परिव्यय
- ₹1,766 करोड़ (2024–2030)
- ADB सह-वित्तपोषण
- $98 मिलियन (≈ ₹830 करोड़)
- योजना की स्थिति
- सक्रिय
- क्लीन प्लांट सेंटर
- भारत भर में 9
- शामिल फ़सलें
- आम, सेब, संतरा, अंगूर, अनार, अमरूद, लीची, अखरोट, एवोकाडो
- मूल मिशन
- MIDH (बागवानी एकीकृत विकास मिशन)
- क्रियान्वयन एजेंसियाँ
- NHB + ICAR
- प्रमाणन ढाँचा
- बीज अधिनियम 1966 के तहत
परिचय
आत्मनिर्भर क्लीन प्लांट प्रोग्राम (CPP) की घोषणा केंद्रीय बजट 2023-24 में हुई और कैबिनेट ने इसे ₹1,766 करोड़ के परिव्यय से मंज़ूर किया, बागवानी एकीकृत विकास मिशन (MIDH) के तहत। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने 29 नवंबर 2024 को $98 मिलियन (लगभग ₹830 करोड़) के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर कर सह-वित्तपोषण दिया। क्रियान्वयन 2024 से 2030 तक चलेगा।
यह जो समस्या हल करता है वह बुनियादी है: अगर फलदार पेड़ वायरस-संक्रमित पौधे से लगाया जाए तो वह अपने पूरे 15–25 साल के उत्पादक जीवन में कम फल और ख़राब गुणवत्ता देता है। भारत आम, केला, अनार और संतरे का दुनिया के शीर्ष उत्पादकों में है, फिर भी निर्यात प्रतिस्पर्धा कमज़ोर रहती है क्योंकि नर्सरी स्टॉक का बड़ा हिस्सा छिपे हुए वायरस ले जाता है जो रोपने के सालों बाद लक्षण दिखाते हैं — तब तक बाग़ लगा चुका होता है। राष्ट्रीय प्रमाणन प्रणाली के बिना, किसान ख़रीदने से पहले जाँच नहीं सकता कि पौधा साफ़ है या नहीं।
CPP यही प्रणाली बनाता है। भारत भर में मौजूदा ICAR अनुसंधान केंद्रों पर 9 अत्याधुनिक क्लीन प्लांट सेंटर (CPC) बनाए जाएँगे, हर एक विशेष फ़सलों में — अंगूर (पुणे), सेब/बादाम/अखरोट (श्रीनगर व मुक्तेश्वर), संतरा (नागपुर व बीकानेर), आम/अमरूद/एवोकाडो (बेंगलुरु), आम/अमरूद/लीची (लखनऊ), अनार (शोलापुर), और उष्णकटिबंधीय फल (पूर्वी भारत)। हर CPC वायरस-मुक्त मातृ पौधे रखता है, उन्नत डायग्नोस्टिक लैब चलाता है, और मान्यता-प्राप्त नर्सरियों को प्रमाणित फ़ाउंडेशन सामग्री देता है।
बीज अधिनियम 1966 के तहत नया प्रमाणन ढाँचा निजी नर्सरियों को मान्यता देगा, हर गुणन चरण पर रोपण सामग्री की जाँच करेगा, और प्रमाणन टैग जारी करेगा जो हर पौधे को स्वच्छ मातृ पौधे तक ट्रेस करता है। कार्यक्रम सभी किसानों को जोत के आकार की परवाह किए बिना सस्ती पहुँच देने को प्राथमिकता देता है, और महिला किसानों को योजना और क्रियान्वयन में सक्रिय रूप से शामिल करता है।
योजना की मुख्य बातें
प्रमाणित वायरस-मुक्त पौधे
बीज अधिनियम 1966 के तहत नई प्रमाणन प्रणाली — हर पौधे पर टैग जो उसे जाँचे गए वायरस-मुक्त मातृ पौधे तक ट्रेस करता है।
9 विश्वस्तरीय क्लीन प्लांट सेंटर
भारत भर के ICAR केंद्रों पर अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक और टिश्यू कल्चर लैब — श्रीनगर (सेब) से बेंगलुरु (आम) और पुणे (अंगूर) तक।
15–25 साल तक ज़्यादा उपज
वायरस-मुक्त पौधा बाग़ के पूरे उत्पादक जीवन में ज़्यादा फल, बेहतर गुणवत्ता और कम बीमारी — दशकों तक वापसी देने वाला निवेश।
₹830 करोड़ ADB सह-वित्तपोषण
एशियन डेवलपमेंट बैंक ने 29 नवंबर 2024 को $98 मिलियन का ऋण समझौता किया — केंद्र सरकार के अपने बजट के अतिरिक्त।
सभी किसानों को सस्ती पहुँच
जोत के आकार की परवाह किए बिना प्रमाणित रोपण सामग्री तक सस्ती पहुँच, महिला किसानों की विशेष भागीदारी के साथ।
उन्नत डायग्नोस्टिक जाँच
हर क्लीन प्लांट सेंटर में अत्याधुनिक वायरस डायग्नोस्टिक लैब — सिर्फ़ मातृ पौधे पर नहीं, हर गुणन चरण पर जाँच।
आपको क्या मिलता है
प्रमाणित रोग-मुक्त पौधों की उपलब्धता
बागवानी किसान प्रमाणन टैग वाले पौधे ख़रीद सकते हैं जो साबित करता है कि सामग्री वायरस-मुक्त है — बिना जाँच वाली नर्सरी से अंधा ख़रीदना ख़त्म।
बाग़ की उत्पादकता बढ़ेगी
वायरस-मुक्त रोपण सामग्री सीधे ज़्यादा फल उपज, बेहतर गुणवत्ता और बाग़ के 15–25 साल के जीवन में कम रोग-नुकसान देती है।
निर्यात-योग्य उपज
स्वच्छ रोपण सामग्री से भारतीय बागवानी अंतरराष्ट्रीय फ़ाइटोसैनिटरी मानकों को पूरा करती है — आम, अंगूर, अनार और संतरे की निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
जलवायु-अनुकूल किस्में
क्लीन प्लांट सेंटर क्षेत्र-विशेष, जलवायु-अनुकूल स्वच्छ किस्में विकसित करते हैं — बढ़ते तापमान और बदलते कीट/रोग पैटर्न से निपटने के लिए।
कौन पात्र है
दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।
आप पात्र हैं अगर
- कोई भी बागवानी किसान जो फलदार फ़सल उगाता है — आम, सेब, संतरा, अंगूर, अनार, अमरूद, लीची, अखरोट, एवोकाडो या कार्यक्रम में शामिल अन्य फल
- सभी जोत आकार के किसान — कार्यक्रम जोत की परवाह किए बिना सस्ती पहुँच को प्राथमिकता देता है
- महिला किसान — योजना और क्रियान्वयन में सक्रिय रूप से शामिल
- नए प्रमाणन ढाँचे के तहत मान्यता चाहने वाली निजी नर्सरियाँ — प्रमाणित स्वच्छ रोपण सामग्री बढ़ाने और बेचने के लिए
- सदस्यों के लिए रोपण सामग्री ख़रीदने वाले किसान उत्पादक संगठन (FPO) और सहकारी समितियाँ
ज़मीन होते हुए भी अपात्र
- कार्यक्रम सीधे किसानों को पौधा ख़रीदने पर सब्सिडी नहीं देता — यह प्रमाणित सामग्री की आपूर्ति और प्रमाणन प्रणाली बनाता है। पौधा सब्सिडी मौजूदा MIDH/NHM कंपोनेंट के तहत जारी रहती है
- 9 क्लीन प्लांट सेंटर में शामिल न होने वाली फ़सलें — सब्ज़ी, मसाला और बागान फ़सलें वर्तमान CPP दायरे से बाहर हैं (वे MIDH के तहत अलग से सहायता पाती रहती हैं)
यह योजना कहाँ लागू है
पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।
व्यक्तिगत किसान आवेदन नहीं
CPP आपूर्ति-श्रृंखला स्तर पर काम करता है — क्लीन प्लांट सेंटर मान्यता-प्राप्त नर्सरियों को प्रमाणित सामग्री देते हैं, जो किसानों को बेचती हैं। किसान मान्यता-प्राप्त नर्सरी से ख़रीदें; अलग योजना आवेदन ज़रूरी नहीं।
मान्यता चाहने वाली नर्सरियों के लिए
प्रमाणित स्वच्छ सामग्री बढ़ाने और बेचने की इच्छुक निजी नर्सरियाँ NHB द्वारा प्रशासित नए प्रमाणन ढाँचे के तहत मान्यता के लिए आवेदन करें — बुनियादी ढाँचा और क्षमता मानदंड लागू होते हैं।
आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम
चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।
- 1
जाँचें कि आपकी फ़सल शामिल है या नहीं
9 क्लीन प्लांट सेंटर आम, सेब, संतरा, अंगूर, अनार, अमरूद, लीची, अखरोट, एवोकाडो और चुने उष्णकटिबंधीय फलों को कवर करते हैं। पुष्टि करें कि आपकी फ़सल दायरे में है।
- 2
मान्यता-प्राप्त नर्सरी खोजें
जैसे-जैसे CPC प्रमाणित फ़ाउंडेशन सामग्री बनाना शुरू करें, आपके क्षेत्र की मान्यता-प्राप्त नर्सरियों में प्रमाणित पौधे उपलब्ध होंगे। नवीनतम सूची के लिए ज़िला बागवानी अधिकारी या NHB क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क करें।
- 3
प्रमाणन टैग वाले पौधे ख़रीदें
हर प्रमाणित पौधे पर टैग होता है जो उसे CPC के जाँचे, वायरस-मुक्त मातृ पौधे से जोड़ता है। ख़रीदने से पहले टैग सत्यापित करें — यह स्वच्छ रोपण सामग्री की आपकी गारंटी है।
- 4
MIDH/NHM पौधा सब्सिडी के साथ जोड़ें
रोपण सामग्री पर मौजूदा MIDH/राष्ट्रीय बागवानी मिशन सब्सिडी (आमतौर पर ₹20,000–₹60,000 प्रति हेक्टेयर, फ़सल के अनुसार) CPP के साथ जारी रहती है। प्रमाणित पौधों पर सब्सिडी के लिए ज़िला बागवानी अधिकारी से संपर्क करें।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
बजट घोषणा
फ़रवरी 2023 (केंद्रीय बजट 2023-24)
कैबिनेट मंज़ूरी
2024
MIDH के तहत ₹1,766 करोड़
ADB ऋण हस्ताक्षर
29 नवंबर 2024
$98 मिलियन
क्रियान्वयन अवधि
2024 से 2030
7 वर्ष
तथ्य आख़िरी बार जाँचे गए
27 सितंबर 2026
pib.gov.in और adb.org के आधार पर
अपनी पात्रता जाँचें
सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।
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यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।
डाउनलोड
केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।
आधिकारिक लिंक और हेल्पलाइन
पोर्टल को ही बुकमार्क करें — कोई भी तीसरी वेबसाइट भुगतान न जारी कर सकती है, न रोक सकती है, न तेज़ कर सकती है।
- राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB)nhb.gov.in — क्लीन प्लांट प्रोग्राम की प्राथमिक क्रियान्वयन एजेंसी
- बागवानी एकीकृत विकास मिशन (MIDH)midh.gov.in — जिसके तहत CPP लागू किया जा रहा है
- ADB प्रोजेक्ट पेज — Building India's Clean Plant Programवित्तपोषण विवरण और क्रियान्वयन दस्तावेज़ों के साथ ADB प्रोजेक्ट पेज
- PIB — CPP से बागवानी बदलावCPP कैसे भारत की बागवानी बदल रहा है, इस पर PIB प्रेस नोट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आत्मनिर्भर क्लीन प्लांट प्रोग्राम क्या है?
CPP MIDH के तहत ₹1,766 करोड़ का केंद्र सरकार का कार्यक्रम है, $98 मिलियन ADB ऋण से सह-वित्तपोषित, 2024 से 2030 तक चलेगा। यह भारत भर में ICAR केंद्रों पर 9 क्लीन प्लांट सेंटर बनाता है जो फल फ़सलों — आम, सेब, संतरा, अंगूर, अनार, अमरूद, लीची, अखरोट और एवोकाडो — के लिए प्रमाणित वायरस-मुक्त रोपण सामग्री बनाते हैं।
वायरस-मुक्त रोपण सामग्री क्यों ज़रूरी है?
संक्रमित पौधे से लगाया फलदार पेड़ अपने पूरे 15–25 साल के उत्पादक जीवन में कम फल और ख़राब गुणवत्ता देता है। वायरस रोपते समय दिखता नहीं — लक्षण सालों बाद आते हैं जब बाग़ लगा चुका होता है। प्रमाणित स्वच्छ सामग्री यह जोखिम जड़ से ख़त्म करती है।
9 क्लीन प्लांट सेंटर कहाँ हैं?
पुणे (अंगूर), श्रीनगर व मुक्तेश्वर (सेब, बादाम, अखरोट), नागपुर व बीकानेर (संतरा), बेंगलुरु (आम, अमरूद, एवोकाडो), लखनऊ (आम, अमरूद, लीची), शोलापुर (अनार), और पूर्वी भारत (उष्णकटिबंधीय फल)। हर एक मौजूदा ICAR अनुसंधान केंद्र पर है।
किसान को प्रमाणित पौधे कैसे मिलेंगे?
क्लीन प्लांट सेंटर वायरस-मुक्त मातृ पौधे बनाते हैं और मान्यता-प्राप्त निजी नर्सरियों को प्रमाणित फ़ाउंडेशन सामग्री देते हैं। ये नर्सरियाँ सामग्री बढ़ाकर प्रमाणित पौधे किसानों को बेचती हैं — हर पौधे पर प्रमाणन टैग होता है जो उसे जाँचे मातृ पौधे तक ट्रेस करता है। नज़दीकी मान्यता-प्राप्त नर्सरी के लिए ज़िला बागवानी अधिकारी से संपर्क करें।
क्या CPP पौधा ख़रीदने पर सब्सिडी देता है?
CPP ख़ुद आपूर्ति और प्रमाणन प्रणाली बनाता है — सीधे पौधा ख़रीदने पर सब्सिडी नहीं देता। लेकिन मौजूदा MIDH/राष्ट्रीय बागवानी मिशन की रोपण सामग्री सब्सिडी (आमतौर पर ₹20,000–₹60,000 प्रति हेक्टेयर) CPP के साथ जारी रहती है। किसान दोनों जोड़ सकते हैं — MIDH सब्सिडी से CPP प्रमाणित पौधे ख़रीदें।
ADB ऋण किसलिए है?
एशियन डेवलपमेंट बैंक ने 29 नवंबर 2024 को $98 मिलियन का ऋण मंज़ूर किया। ऋण क्लीन प्लांट सेंटर बनाने, डायग्नोस्टिक लैब सुसज्जित करने, कर्मचारी प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रणाली बुनियादी ढाँचे में सहायता करता है।
कौन-कौन सी फ़सलें शामिल हैं?
आम, सेब, संतरा (नारंगी, नींबू, किन्नू), अंगूर, अनार, अमरूद, लीची, अखरोट, एवोकाडो और चुने उष्णकटिबंधीय फल। सब्ज़ी, मसाला और बागान फ़सलें वर्तमान CPP दायरे में नहीं — वे MIDH के तहत अलग से सहायता पाती रहती हैं।
क्या कोई निजी नर्सरी CPP के तहत मान्यता पा सकती है?
हाँ। कार्यक्रम बीज अधिनियम 1966 के तहत नया प्रमाणन ढाँचा बनाता है जो बुनियादी ढाँचा और क्षमता मानक पूरा करने वाली निजी नर्सरियों को मान्यता देता है। मान्यता-प्राप्त नर्सरियाँ CPC से प्रमाणित फ़ाउंडेशन सामग्री लेकर प्रमाणित पौधे बढ़ा और बेच सकती हैं। मान्यता मानदंडों के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से संपर्क करें।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन undefined ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।
