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भारत सरकारपेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालयसक्रियअपडेट 27 सितंबर 2026

गोबरधन – राष्ट्रीय चक्रीय जैव-ऊर्जा योजना

GOBARdhan – National Circular Bioenergy Scheme

जिन किसानों के पास पशु या फसल अवशेष है वे गोबर और पराली बेचकर अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं — या सरकारी सब्सिडी से अपना बायोगैस प्लांट लगाकर गैस भी पाएँ और जैविक खाद भी, जो ₹1,500 प्रति टन बिकती है।

कुल परिव्यय
₹23,731 करोड़ (FY 2026-27 से 2035-36)
योजना की स्थिति
सक्रिय
कैबिनेट मंज़ूरी
6 अगस्त 2026
मंत्रालय
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस
पोर्टल
gobardhan.sbm.gov.in
घरेलू बायोगैस पात्रता
3+ पशु, 1–25 m³ प्लांट
जैविक खाद का दाम
₹1,500 / MT (FCO मानक)
CBG पूँजी सहायता
₹2 करोड़ तक प्रति TPD क्षमता

परिचय

गोबरधन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) केंद्र सरकार की योजना है जिसे 6 अगस्त 2026 को कैबिनेट ने ₹23,731 करोड़ के परिव्यय से मंज़ूर किया। यह FY 2026-27 से FY 2035-36 तक 10 साल चलेगी। इसका मकसद है गोबर, पराली और खेती का कचरा कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद में बदलना — ताकि किसान को कमाई हो और देश को स्वच्छ ईंधन मिले।

अगर किसान के पास तीन या ज़्यादा पशु हैं तो वह 1 से 25 घन मीटर का घरेलू बायोगैस प्लांट लगा सकता है। सरकार प्लांट के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता देती है, बायोगैस से चलने वाला जनरेटर या पंप जोड़ने पर अलग से ₹10,000, और गोबर को शौचालय स्लरी सिस्टम से जोड़ने पर ₹1,600 अतिरिक्त मिलते हैं। SC/ST किसानों और पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को 20% और ज़्यादा सब्सिडी दी जाती है।

प्लांट न भी लगाना हो तो भी किसान पास के CBG प्लांट को गोबर और फसल अवशेष बेचकर कमा सकता है। फसल अवशेष इकट्ठा करने की मशीनरी पर 50% तक सब्सिडी (या ₹90 लाख प्रति सेट, जो कम हो) मिलती है। बायोगैस बनने के बाद जो सड़ी हुई खाद बचती है वह उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) मानक पूरा करने पर ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन बिकती है — यानी गोबर से दो तरह की कमाई।

योजना का लक्ष्य 10 साल में CBG उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है। CBG ब्लेंडिंग लक्ष्य 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% और 2028-29 से 5% रखा गया है। CBG की प्रशासित क़ीमत ₹2,110 प्रति MMBTU कम-से-कम 10 साल के लिए तय है — जिससे प्लांट चलाने वालों और उन्हें कच्चा माल देने वाले किसानों, दोनों को लंबे समय तक आमदनी की गारंटी मिलती है।

योजना की मुख्य बातें

  • 10 साल में ₹23,731 करोड़

    अब तक का सबसे बड़ा जैव-ऊर्जा बजट — घरेलू बायोगैस, सामुदायिक प्लांट और व्यावसायिक CBG प्रोजेक्ट सब शामिल।

  • गोबर और पराली से कमाई

    जो गोबर और पराली पहले जलाते थे या फेंकते थे, अब उसे CBG प्लांट को बेचकर या ख़ुद का बायोगैस प्लांट लगाकर पैसा कमाएँ।

  • ₹1,500/टन जैविक खाद

    बायोगैस प्लांट से निकलने वाली सड़ी हुई खाद FCO मानक पूरा करने पर ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन बिकती है — गैस के अलावा दूसरी कमाई।

  • बायोगैस जनरेटर पर ₹10,000 अतिरिक्त

    घरेलू बायोगैस प्लांट पर जनरेटर या पंप जोड़ने पर बेस सब्सिडी के ऊपर ₹10,000 और मिलते हैं।

  • FPO, सहकारी समिति, SHG भी पात्र

    सामुदायिक और क्लस्टर बायोगैस प्रोजेक्ट किसान समूह, सहकारी समिति और स्वयं सहायता समूह रजिस्टर करा सकते हैं — प्रति ज़िला ₹50 लाख तक सहायता।

  • CBG पर 10 साल की क़ीमत गारंटी

    CBG का प्रशासित दाम ₹2,110 प्रति MMBTU कम-से-कम 10 साल तक तय — प्लांट चलाने वालों और कच्चा माल देने वाले किसानों, दोनों को लंबी आमदनी की गारंटी।

आपको क्या मिलता है

  • गोबर और पराली बेचकर कमाई

    गोबर, फसल का ठूँठ और खेती का कचरा पास के CBG प्लांट को बेचें — जो पहले जलाते या फेंकते थे, अब उसका ख़रीदार है।

  • सब्सिडी पर घरेलू बायोगैस प्लांट

    1–25 m³ प्लांट पर केंद्रीय वित्तीय सहायता, जनरेटर/पंप जोड़ने पर ₹10,000 अतिरिक्त, शौचालय स्लरी कनेक्शन पर ₹1,600। SC/ST और पूर्वोत्तर किसानों को 20% और ज़्यादा सब्सिडी।

  • जैविक खाद की बिक्री

    बायोगैस बनने के बाद बचा सड़ा गोबर FCO मानक पूरा करने पर ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन जैविक खाद के रूप में बिकता है — रासायनिक खाद पर निर्भरता भी कम।

  • फसल अवशेष इकट्ठा करने की मशीनरी पर सब्सिडी

    मशीनरी लागत का 50% तक (या ₹90 लाख प्रति सेट, जो कम हो) — बड़े पैमाने पर पराली-गोबर इकट्ठा करके CBG प्लांट को बेचना आसान।

कौन पात्र है

दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।

आप पात्र हैं अगर

  • तीन या ज़्यादा पशुओं वाला किसान — 1–25 m³ का घरेलू बायोगैस प्लांट लगा सकता है, केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ
  • कोई भी किसान जिसके पास गोबर या फसल अवशेष है — पास के CBG प्लांट को कच्चा माल बेच सकता है, न्यूनतम जोत ज़रूरी नहीं
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह (SHG) और ग्राम पंचायत — सामुदायिक या क्लस्टर बायोगैस प्रोजेक्ट के लिए
  • SC/ST किसान और पूर्वोत्तर राज्यों के किसान — घरेलू बायोगैस पर 20% अतिरिक्त सब्सिडी
  • डेयरी संस्थान, निजी डेवलपर और अपशिष्ट प्रबंधन कंपनियाँ — व्यावसायिक CBG प्लांट प्रोजेक्ट के लिए

ज़मीन होते हुए भी अपात्र

  • तीन से कम पशुओं वाला किसान घरेलू बायोगैस प्लांट के लिए — तीन पशु न्यूनतम हैं ताकि प्लांट चलाने लायक गोबर मिलता रहे
  • अकार्बनिक कचरा (प्लास्टिक, खतरनाक अपशिष्ट) — योजना सिर्फ़ गोबर, फसल अवशेष, रसोई कचरा और जैविक अपशिष्ट के लिए है
  • दोहरा पंजीकरण — जिस इकाई पर पहले से GOBARdhan या किसी अन्य केंद्रीय योजना से बायोगैस सब्सिडी मिल रही हो, उसी पर दोबारा नहीं

यह योजना कहाँ लागू है

पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।

  • आवेदक का पहचान प्रमाण

    आधार कार्ड या सरकारी फ़ोटो पहचान पत्र — आवेदक या अधिकृत प्रतिनिधि का।

  • प्लांट स्थान का विवरण

    प्रस्तावित बायोगैस/CBG प्लांट की जगह का पता, GPS निर्देशांक या सर्वे नंबर।

  • कच्चे माल की उपलब्धता का प्रमाण

    पशु संख्या (गोबर-आधारित प्लांट के लिए) या फसल अवशेष उपलब्धता — पशुधन गणना प्रविष्टि, भूमि रिकॉर्ड या FPO पत्र।

  • तकनीक और क्षमता विवरण

    प्लांट की डिज़ाइन गैस उत्पादन क्षमता (m³/दिन या TPD), तकनीक प्रदाता और प्रोजेक्ट विवरण।

  • बैंक खाते का विवरण

    सब्सिडी या केंद्रीय वित्तीय सहायता DBT से पाने के लिए खाता संख्या और IFSC।

आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम

चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।

  1. 1

    गोबरधन पोर्टल पर जाएँ

    gobardhan.sbm.gov.in पर जाकर अपनी श्रेणी चुनें — घरेलू किसान, FPO, सहकारी समिति, ग्राम पंचायत, निजी डेवलपर या CBG उत्पादक।

  2. 2

    पंजीकरण करें और प्रोजेक्ट विवरण भरें

    जगह, कच्चे माल का प्रकार, क्षमता और तकनीक विवरण भरकर फ़ॉर्म जमा करें। आपको एक यूनिक गोबरधन पंजीकरण संख्या मिलेगी।

  3. 3

    तकनीकी और वित्तीय मंज़ूरी लें

    घरेलू बायोगैस के लिए ज़िला SBM-G कार्यालय या राज्य ग्रामीण विकास विभाग से। CBG प्रोजेक्ट के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय से। MNRE-सहायता प्राप्त इकाइयों के लिए राज्य नोडल एजेंसी से।

  4. 4

    प्लांट बनाएँ और चालू करें

    मंज़ूर विनिर्देशों के अनुसार बायोगैस या CBG प्लांट बनाएँ। गाँव स्तर की इकाई 1 m³ से शुरू हो सकती है; व्यावसायिक CBG 2 TPD से।

  5. 5

    गैस, खाद और कच्चे माल से कमाएँ

    बायोगैस या CBG बेचें, सड़ी जैविक खाद ₹1,500/MT पर बेचें, और एग्रीगेटर हैं तो 50% सब्सिडी वाली मशीनरी से फसल अवशेष इकट्ठा करके CBG प्लांट को बेचें।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • कैबिनेट मंज़ूरी

    6 अगस्त 2026

    राष्ट्रीय चक्रीय जैव-ऊर्जा योजना

  • क्रियान्वयन अवधि

    FY 2026-27 से FY 2035-36

    10 वर्ष

  • CBG ब्लेंडिंग लक्ष्य

    3% (2026-27), 4% (2027-28), 5% (2028-29 से आगे)

  • आवेदन की अंतिम तारीख़

    कोई नहीं — gobardhan.sbm.gov.in पर चालू आधार पर पंजीकरण खुला है

  • तथ्य आख़िरी बार जाँचे गए

    27 सितंबर 2026

    pib.gov.in, pmindia.gov.in और gobardhan.sbm.gov.in के आधार पर

अपनी पात्रता जाँचें

सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।

  1. 1.क्या आपके पास तीन या ज़्यादा पशु हैं (घरेलू बायोगैस प्लांट के लिए), या गोबर/फसल अवशेष जो पास के CBG प्लांट को बेच सकें?
  2. 2.क्या आपका कच्चा माल जैविक है — गोबर, फसल का ठूँठ, रसोई का कचरा या अन्य सड़ने योग्य अपशिष्ट?
  3. 3.क्या आपके पास बायोगैस प्लांट लगाने की जगह है, या पास में कोई CBG प्लांट है जहाँ कच्चा माल बेच सकें?
  4. 4.क्या यह नया प्लांट है — इस पर पहले से किसी योजना से बायोगैस सब्सिडी नहीं मिल रही?
  5. 5.क्या आपके पास बैंक खाता और आधार है जिससे सब्सिडी DBT से मिल सके?

5 में से 0 जवाब दिए

यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।

डाउनलोड

केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गोबरधन योजना क्या है?

गोबरधन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) केंद्र सरकार की योजना है, 6 अगस्त 2026 को ₹23,731 करोड़ के बजट से मंज़ूर हुई। यह गोबर, पराली और दूसरे जैविक कचरे को कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद में बदलती है — किसान को कमाई होती है और देश को स्वच्छ ईंधन मिलता है।

किसान को गोबरधन से पैसा कैसे मिलता है?

तीन तरीक़ों से: (1) सब्सिडी वाला घरेलू बायोगैस प्लांट लगाकर गैस पाएँ — LPG और बिजली का ख़र्च बचे। (2) गोबर और पराली पास के CBG प्लांट को बेचकर नियमित आमदनी कमाएँ। (3) बायोगैस बनने के बाद बची जैविक खाद ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन बेचें।

घरेलू बायोगैस प्लांट के लिए कौन पात्र है?

जिस किसान के पास तीन या ज़्यादा पशु हैं — इतना गोबर चाहिए ताकि 1–25 m³ का प्लांट चल सके। सरकार प्लांट पर केंद्रीय वित्तीय सहायता, जनरेटर/पंप जोड़ने पर ₹10,000 अतिरिक्त, और शौचालय स्लरी कनेक्शन पर ₹1,600 अतिरिक्त देती है।

SC/ST और पूर्वोत्तर के किसानों को क्या अतिरिक्त मिलता है?

SC/ST किसानों और पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को घरेलू बायोगैस प्लांट पर बेस सब्सिडी के ऊपर 20% और अतिरिक्त सब्सिडी मिलती है।

कौन-कौन सा कच्चा माल चलता है?

गोबर, फसल का ठूँठ और पराली, रसोई का कचरा, चीनी मिल की प्रेस मड और कोई भी जैविक सड़ने योग्य कचरा। प्लास्टिक या खतरनाक कचरा नहीं चलता।

गोबरधन में पंजीकरण कैसे होता है?

gobardhan.sbm.gov.in पर जाएँ, अपनी श्रेणी (घरेलू किसान, FPO, सहकारी समिति, निजी डेवलपर आदि) चुनें, जगह और प्रोजेक्ट विवरण भरें और जमा करें। आपको एक यूनिक गोबरधन पंजीकरण नंबर मिलेगा। गाँव-स्तर के प्लांट के लिए ज़िला SBM-G कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।

क्या FPO या सहकारी समिति सामुदायिक बायोगैस प्लांट लगा सकती है?

हाँ। किसान उत्पादक संगठन, सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह और ग्राम पंचायत सामुदायिक या क्लस्टर बायोगैस प्रोजेक्ट पंजीकृत करा सकते हैं — सामुदायिक इकाइयों के लिए प्रति ज़िला ₹50 लाख तक सहायता।

व्यावसायिक CBG प्लांट पर कितनी सरकारी मदद मिलती है?

पात्र ग्रीनफ़ील्ड CBG प्रोजेक्ट को प्रति टन प्रतिदिन (TPD) स्थापित CBG क्षमता पर ₹2 करोड़ तक पूँजी सहायता। साथ ही CBG का प्रशासित दाम ₹2,110 प्रति MMBTU कम-से-कम 10 साल तक तय है।

गोबरधन का कुल बजट कितना है?

₹23,731 करोड़, FY 2026-27 से FY 2035-36 तक — इसमें पूँजी सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी, ऋण सहायता, माँग निर्माण, अवसंरचना विकास और ज़िला-स्तर पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण शामिल।

2026 का गोबरधन पहले वाले से कैसे अलग है?

पहला गोबरधन (2018 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शुरू) गाँव-स्तर के कचरा प्रबंधन और छोटी बायोगैस इकाइयों पर केंद्रित था, जल शक्ति मंत्रालय के अधीन। 2026 वाला कहीं बड़ा राष्ट्रीय चक्रीय जैव-ऊर्जा योजना है — पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत, ₹23,731 करोड़ के साथ, व्यावसायिक CBG उत्पादन, बायोगैस में लगभग दस गुना बढ़ोतरी, और प्राकृतिक गैस में 3-5% CBG मिश्रण अनिवार्य — यह लक्ष्य है।

क्या बायोगैस प्लांट से निकली जैविक खाद बेच सकते हैं?

हाँ। बायोगैस बनने के बाद बची सड़ी हुई स्लरी अगर उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) मानक पूरा करती है तो ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन जैविक खाद के रूप में बिकती है। इससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है और गैस के अलावा एक और कमाई का रास्ता मिलता है।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन undefined ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।