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भारत सरकारकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालयसक्रियअपडेट 27 सितंबर 2026

कृषि-वानिकी उप-मिशन – हर मेड़ पर पेड़

Sub-Mission on Agroforestry – Har Medh Par Ped

खेत की मेड़ों और खाली जगहों पर सरकारी सहायता से फल, इमारती लकड़ी या औषधीय पेड़ लगाएँ — फ़सल के साथ-साथ पेड़ों से अलग कमाई, मिट्टी की सेहत बेहतर और जलवायु झटकों से सुरक्षा।

योजना की स्थिति
सक्रिय (2016-17 से)
मंत्रालय
कृषि एवं किसान कल्याण
मूल योजना
NMSA / कृषोन्नति योजना
प्रकार
केंद्र प्रायोजित योजना
कवरेज
21 राज्य + 2 केंद्र शासित प्रदेश
जारी राशि
₹909.82 करोड़ (2024 के मध्य तक)
रोपण क्षेत्र
1.55 लाख हेक्टेयर
वित्तपोषण पैटर्न
60:40 (केंद्र:राज्य)

परिचय

कृषि-वानिकी उप-मिशन (SMAF), जिसे "हर मेड़ पर पेड़" के नाम से जाना जाता है, राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) के तहत चलने वाली केंद्र प्रायोजित योजना है। यह कृषोन्नति योजना के छत्र में आती है और 2016-17 से लगातार चल रही है। इसका मक़सद है किसान अपने खेत की मेड़ों पर और खेत के भीतर ख़ाली हिस्सों में पेड़ लगाएँ — फ़सल चलती रहे, और पेड़ अलग से कमाई दें।

योजना में फल देने वाले पेड़, इमारती लकड़ी के पेड़, औषधीय व सुगंधित पौधे, वृक्ष-आधारित तिलहन (नीम, महुआ, करंज) और रेशम व लाख पालन के लिए मेज़बान पेड़ शामिल हैं। सहायता राज्य सरकार के ज़रिए मिलती है — नर्सरी विकास, मेड़ रोपण और ब्लॉक रोपण के लिए।

SMAF 21 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है। सामान्य राज्यों में केंद्र-राज्य का हिस्सा 60:40 है, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में 90:10, और केंद्र शासित प्रदेशों में 100% केंद्रीय सहायता। 2024 के मध्य तक 17 राज्यों को ₹909.82 करोड़ जारी हो चुके थे और 1.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण हुआ था।

विशुद्ध वन-रोपण योजनाओं से अलग, SMAF किसान के खेत के लिए बनी है: ज़मीन पर फ़सल उगती रहती है, मेड़ों पर या ब्लॉक में लगे पेड़ 3–7 साल में फल, लकड़ी, औषधि या लाख/रेशम से अलग आमदनी देने लगते हैं। योजना में बाय-बैक और दाम गारंटी का भी प्रावधान है ताकि किसान को पेड़ पकने से पहले ही बाज़ार की चिंता न हो।

योजना की मुख्य बातें

  • एक ही ज़मीन पर पेड़ + फ़सल

    खेत की मेड़ों और ख़ाली हिस्सों पर फल, लकड़ी, औषधीय या तिलहन पेड़ लगाएँ — बाक़ी ज़मीन पर फ़सल चलती रहे, 3–7 साल में पेड़ों से अलग कमाई शुरू।

  • अब तक ₹909 करोड़ जारी

    2024 के मध्य तक 17 राज्यों को ₹909.82 करोड़ जारी हुए — 1.55 लाख हेक्टेयर में नर्सरी विकास और रोपण।

  • स्थानीय नर्सरी से पौधे

    योजना के तहत नर्सरी विकास का फंड मिलता है ताकि किसान को अनुशंसित प्रजातियों के अच्छे पौधे गाँव या ब्लॉक स्तर पर ही उपलब्ध हों।

  • बाय-बैक और दाम गारंटी

    खेत में उगाए पेड़ों के लिए बाय-बैक विकल्प और दाम समर्थन — पेड़ पकने से पहले ही बाज़ार तय।

  • छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता

    21 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के सभी किसान पात्र हैं, लेकिन छोटे और सीमांत किसानों को चयन में पहले मौक़ा।

  • मिट्टी और जलवायु सुरक्षा

    मेड़ पर पेड़ मिट्टी का कटाव रोकते हैं, पानी सोखने की क्षमता बढ़ाते हैं, कार्बन जमा करते हैं और गर्मी से फ़सल को ढाल देते हैं — एक मौसम नहीं, पीढ़ियों की सम्पत्ति।

आपको क्या मिलता है

  • सब्सिडी पर पेड़ रोपण

    मेड़ रोपण (खेत की सीमा पर), ब्लॉक रोपण (खेत के भीतर तय हिस्से में) और नर्सरी विकास — सब पर सरकारी सहायता।

  • पेड़ की उपज से अतिरिक्त आमदनी

    फल, इमारती लकड़ी, औषधीय/सुगंधित उपज, वृक्ष-तिलहन (नीम, महुआ, करंज) और रेशम/लाख मेज़बान पेड़ — फ़सल कटाई के अलावा एक और कमाई का रास्ता।

  • मिट्टी और पानी संरक्षण

    मेड़ के पेड़ कटाव रोकते हैं, मिट्टी का जैविक कार्बन बढ़ाते हैं, दलहनी प्रजातियाँ नाइट्रोजन स्थिर करती हैं और पानी का रिसाव बढ़ता है — लंबे समय में इनपुट लागत कम।

  • बाज़ार जुड़ाव में मदद

    खेत में उगाए पेड़ों के लिए बाय-बैक और दाम गारंटी — पेड़ कटाई की उम्र तक पहुँचे उससे पहले ख़रीदार तय।

कौन पात्र है

दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।

आप पात्र हैं अगर

  • SMAF लागू 21 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में कोई भी किसान — ज़मीन-मालिक या किरायेदार
  • छोटे और सीमांत किसानों को चयन में प्राथमिकता
  • खेत की मेड़ (बाउंड्री) या ब्लॉक में फ़सल के साथ-साथ पेड़ लगाने को तैयार किसान
  • किसान समूह, FPO और ग्राम पंचायत सामुदायिक स्तर के नर्सरी व रोपण कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं
  • पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के किसानों को बढ़ी केंद्रीय सहायता (60:40 की जगह 90:10)

ज़मीन होते हुए भी अपात्र

  • जिन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SMAF अभी लागू नहीं है वहाँ के किसान — फिलहाल 21 राज्य और 2 UT शामिल हैं
  • वन भूमि — योजना सिर्फ़ खेती की ज़मीन पर है, वन विभाग की या संरक्षित वन भूमि पर नहीं
  • पूरी तरह से वाणिज्यिक वृक्षारोपण जो खाद्य फ़सलों की जगह ले ले — SMAF कृषि-वानिकी (पेड़ + फ़सल साथ-साथ) के लिए है, एकल-फ़सल बागान के लिए नहीं

यह योजना कहाँ लागू है

पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।

  • पहचान प्रमाण

    आधार कार्ड या सरकारी फ़ोटो पहचान पत्र।

  • भूमि रिकॉर्ड

    खसरा / 7/12 उतारा / पट्टा — जिस ज़मीन पर पेड़ लगाने हैं उसकी मालिकी या किरायेदारी का प्रमाण।

  • बैंक खाते का विवरण

    सब्सिडी राज्य कृषि विभाग के ज़रिए बैंक खाते में आती है — खाता संख्या और IFSC ज़रूरी।

  • रोपण योजना / आवेदन फ़ॉर्म

    ज़िला कृषि कार्यालय से मिलने वाला फ़ॉर्म — पेड़ की प्रजाति, संख्या, क्षेत्र और मेड़/ब्लॉक का लेआउट।

  • मोबाइल नंबर

    पंजीकरण और स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी / RAEO से फ़ॉलो-अप के लिए।

आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम

चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।

  1. 1

    ज़िला कृषि कार्यालय से संपर्क करें

    अपने ज़िला कृषि अधिकारी (DAO) या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) से मिलें या फ़ोन करें और कृषि-वानिकी योजना में रुचि बताएँ। वे बताएँगे कि आपका ज़िला SMAF में शामिल है या नहीं।

  2. 2

    ज़मीन और पहचान का विवरण दें

    आधार, भूमि रिकॉर्ड और बैंक विवरण दें। अधिकारी आवेदन फ़ॉर्म भरने और रोपण योजना तैयार करने में मदद करेगा — प्रजाति, पेड़ों की संख्या, मेड़ या ब्लॉक का नक़्शा।

  3. 3

    मंज़ूरी और पौधे प्राप्त करें

    ज़िला स्तर पर मंज़ूरी मिलने पर SMAF-सहायता प्राप्त नर्सरी से अच्छे पौधे मिलेंगे या अधिकृत नर्सरी का पता बताया जाएगा। लागत पर सब्सिडी योजना के तहत मिलती है।

  4. 4

    रोपण और देखभाल

    मंज़ूर योजना के अनुसार खेत की मेड़ों या ब्लॉक में पेड़ लगाएँ। बाक़ी ज़मीन पर फ़सल चलती रहे। विस्तार अधिकारी रोपण की जीवित दर जाँचने आ सकते हैं।

  5. 5

    सब्सिडी का भुगतान

    सब्सिडी राज्य कृषि विभाग के ज़रिए बैंक खाते में आती है, आम तौर पर रोपण सत्यापन के बाद। कुछ राज्य जीवित दर के हिसाब से किस्तों में देते हैं।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • योजना शुरू

    2016-17

    NMSA / कृषोन्नति योजना के तहत

  • कृषोन्नति योजना 2.0 में जारी

    सितंबर 2024

    2024-25 से 2025-26 के लिए कैबिनेट मंज़ूरी

  • जारी राशि (2024 के मध्य तक)

    17 राज्यों को ₹909.82 करोड़

    1.55 लाख हेक्टेयर में रोपण

  • आवेदन की अंतिम तारीख़

    कोई नहीं — ज़िला कृषि कार्यालय के ज़रिए चालू आधार पर

  • तथ्य आख़िरी बार जाँचे गए

    27 सितंबर 2026

    pib.gov.in और agricoop.nic.in के आधार पर

अपनी पात्रता जाँचें

सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।

  1. 1.क्या आपका खेत SMAF लागू 21 राज्यों या 2 केंद्र शासित प्रदेशों में से किसी में है?
  2. 2.क्या आपके पास खेत की ज़मीन (मालिकी या किरायेदारी) है जहाँ फ़सल के साथ मेड़ों या ब्लॉक में पेड़ लगा सकते हैं?
  3. 3.क्या आप अपनी फ़सल के साथ-साथ पेड़ लगाएँगे — पूरे खेत को बागान में बदलने की जगह?
  4. 4.क्या आप SMAF के तहत अनुशंसित प्रजातियाँ लगाएँगे — फल, इमारती लकड़ी, औषधीय/सुगंधित पौधे, वृक्ष-तिलहन या रेशम/लाख मेज़बान पेड़?
  5. 5.क्या आपके पास बैंक खाता और आधार है जिससे सब्सिडी मिल सके?

5 में से 0 जवाब दिए

यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।

डाउनलोड

केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कृषि-वानिकी उप-मिशन (SMAF) क्या है?

SMAF, जिसे "हर मेड़ पर पेड़" कहते हैं, राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) के तहत केंद्र प्रायोजित योजना है। 2016-17 से चल रही है और किसानों को सब्सिडी पर फल, लकड़ी, औषधीय और तिलहन पेड़ खेत की मेड़ों और ब्लॉक में लगाने की सहायता देती है — फ़सल के साथ-साथ, फ़सल की जगह नहीं।

SMAF के लिए कौन पात्र है?

SMAF लागू 21 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में कोई भी किसान — ज़मीन-मालिक या किरायेदार। छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता मिलती है। योजना आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, मिज़ोरम, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर व लद्दाख़ में चलती है।

SMAF में कौन-कौन से पेड़ लगा सकते हैं?

फल देने वाले पेड़, इमारती लकड़ी की प्रजातियाँ, औषधीय और सुगंधित पौधे, वृक्ष-तिलहन (नीम, महुआ, करंज) और रेशम/लाख पालन के मेज़बान पेड़। कौन-सी प्रजाति आपके क्षेत्र और जलवायु के हिसाब से सही रहेगी — यह आपके ज़िला कृषि कार्यालय से पता चलेगा।

SMAF में पैसा कैसे मिलता है — किसान को कितना ख़र्च करना पड़ता है?

SMAF केंद्र प्रायोजित योजना है। सामान्य राज्यों में केंद्र 60% और राज्य 40% देता है; पूर्वोत्तर/पहाड़ी राज्यों में 90:10; केंद्र शासित प्रदेशों में 100% केंद्र। किसान को सब्सिडी पर पौधे और रोपण सहायता मिलती है — किसान का अपना हिस्सा कितना होगा, यह राज्य के नियमों पर निर्भर करता है।

SMAF के लिए आवेदन कैसे करें?

कोई ऑनलाइन पोर्टल नहीं है। अपने ज़िला कृषि कार्यालय या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) से संपर्क करें, आधार, भूमि रिकॉर्ड और बैंक विवरण दें — अधिकारी पंजीकरण और रोपण योजना बनाने में मदद करेगा। चयन ज़िला स्तर पर होता है।

पेड़ लगाने से फ़सल की ज़मीन कम नहीं होगी?

SMAF कृषि-वानिकी है, एकल-पेड़ बागान नहीं। मेड़ रोपण में पेड़ खेत की सीमा (मेड़/बाँध) पर लगते हैं जो वैसे भी ख़ाली या बेकार रहती है। ब्लॉक रोपण खेत का एक हिस्सा लेता है, लेकिन बाक़ी ज़मीन पर फ़सल चलती रहती है। समय के साथ पेड़ों की आमदनी फ़सल की कमाई में जुड़ती है, उसकी जगह नहीं लेती।

पेड़ से कमाई कब शुरू होती है?

प्रजाति पर निर्भर है। तेज़ बढ़ने वाले फल जैसे पपीता या सहजन 1–2 साल में देने लगते हैं। सागौन या शीशम जैसी लकड़ी की प्रजातियाँ पूरी कटाई में 10–15 साल लेती हैं, लेकिन बीच में छंटाई से आमदनी होती है। औषधीय व सुगंधित पौधे 2–3 साल से कमाने लगते हैं। कृषि-वानिकी योजना में छोटी और लंबी अवधि, दोनों की प्रजातियाँ मिलाकर लगाई जाती हैं।

SMAF और राष्ट्रीय बैम्बू मिशन (NBM) में क्या फ़र्क़ है?

NBM सिर्फ़ बाँस पर केंद्रित है — रोपण से लेकर प्रसंस्करण और बाज़ार तक। SMAF बहुत व्यापक है — फल, लकड़ी, औषधीय, तिलहन और रेशम/लाख मेज़बान पेड़, सब शामिल — और ख़ासतौर पर मौजूदा खेती की ज़मीन में पेड़ जोड़ने के लिए बनी है। किसान दोनों योजनाओं का लाभ ले सकता है — मेड़ पर बाँस (NBM) और ब्लॉक में अन्य पेड़ (SMAF)।

SMAF ने अब तक कितने क्षेत्र में काम किया है?

2024 के मध्य तक 17 राज्यों को ₹909.82 करोड़ जारी हुए और 1.55 लाख हेक्टेयर में रोपण और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन हुआ।

क्या SMAF पेड़ की उपज बेचने में भी मदद करती है?

हाँ। योजना खेत में उगाए पेड़ों के लिए बाय-बैक व्यवस्था और दाम गारंटी का प्रावधान रखती है ताकि किसान को पेड़ पकने से पहले ही ख़रीदार का भरोसा हो। बाज़ार-जुड़ाव की ठीक-ठीक सहायता राज्य पर निर्भर है — अपने ज़िला कृषि कार्यालय से पूछें।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन undefined ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।