मुख्य सामग्री पर जाएँ
Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
नारियल विकास बोर्ड (CDB), भारत सरकारकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालयसक्रियअपडेट 8 अक्टूबर 2026

नारियल विकास बोर्ड योजनाएँ (पुनर्रोपण, कायाकल्प व उत्पादकता)

Coconut Development Board Schemes (Replanting, Rejuvenation & Productivity)

नारियल किसानों के लिए सरकारी सहायता — पुराने, रोगग्रस्त व कम-उपज पेड़ों को जवान अधिक-उपज पेड़ों से बदलना, बचाने लायक़ बाग़ों का कायाकल्प, पेड़ों के बीच फ़सल से कमाई, और पेड़ों का बीमा — नारियल विकास बोर्ड द्वारा राज्य बाग़वानी व कृषि विभागों के ज़रिए चलाई जाती है।

क्रियान्वयन निकाय
नारियल विकास बोर्ड (CDB)
मंत्रालय
कृषि एवं किसान कल्याण
कटाई व हटाने का अनुदान
₹500/पेड़ (पहले 20), फिर ₹250/पेड़ — सीमा ₹13,000/हे.
पुनर्रोपण सब्सिडी
₹20 प्रति पौधा (अधिकतम 175 पेड़/हे.)
कायाकल्प अनुदान
₹15,000/हे. (₹7,500 की दो किस्तें)
प्रति-किसान सीमा
4 हेक्टेयर तक
कौन आवेदन कर सकता है
नारियल उगाने वाले राज्यों के मालिक-किसान
आवेदन कहाँ
राज्य बाग़वानी / कृषि विभाग व CDB फ़ील्ड दफ़्तर

त्वरित सारांश

इस पेज की मुख्य बातें लगभग दो मिनट में — पढ़ें या सुनें।

त्वरित सारांश

नारियल का पेड़ 60 से 80 साल का फ़ैसला है। दादा के लगाए बाग़ से आज भी परिवार की रोटी चलती है, पर जब पेड़ अपनी भरी उम्र पार कर जाते हैं — या जड़-सड़न व दूसरी बीमारियों की चपेट में आते हैं — तो ज़मीन, पानी और मेहनत वही रहती है पर पैदावार हर साल गिरती जाती है। नारियल विकास बोर्ड, कृषि मंत्रालय के तहत भारत सरकार का निकाय, ठीक इसी के लिए योजनाएँ चलाता है: पुराने, रोगग्रस्त और मुश्किल से फल देने वाले पेड़ों को जवान अधिक-उपज देने वाले पेड़ों से बदलना, और उन बाग़ों की उपज बढ़ाना जो अब भी बचाने लायक़ हैं।

ज़्यादातर किसान जिस योजना का इस्तेमाल करते हैं वह है पुनर्रोपण व कायाकल्प (रिप्लांटिंग व रिजुवनेशन)। यह ऐसे रोगग्रस्त या बूढ़े पेड़ को काटकर सुरक्षित हटाने का पैसा देती है जो साल में क़रीब 10 नारियल से कम देता है, उसकी जगह अच्छी क़िस्म लगाने के लिए प्रति-पौधा अनुदान देती है, और उन पेड़ों को खिलाने-इलाज कर वापस लाने के लिए अलग प्रति-हेक्टेयर अनुदान देती है जो बूढ़े तो हैं पर अब भी ठीक होने लायक़ हैं। पैसा सीधे लाभ के रूप में आता है, और एक किसान इसे 4 हेक्टेयर तक पा सकता है। इसके साथ बोर्ड उत्पादकता योजनाएँ चलाता है जो पेड़ों के बीच आमदनी वाली फ़सलें उगाने का पैसा देती हैं (ताकि जवान पेड़ों के बड़े होने तक भी ज़मीन कमाए), और एक नारियल पेड़ बीमा भी। यह नारियल उगाने वाले राज्यों के लिए योजना है, जिसके लिए राज्य बाग़वानी या कृषि विभाग और बोर्ड के दफ़्तरों के ज़रिए आवेदन होता है। चूँकि पुनर्रोपण रोपाई के मौसम से जुड़े सालाना चक्र पर चलता है, शुरू करने से पहले मौजूदा आवेदन खिड़की बोर्ड से ज़रूर पक्की कर लें। आगे का पन्ना दरें, पात्रता व आवेदन तरीका बताता है।

परिचय

नारियल विकास बोर्ड (CDB) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत भारत सरकार का एक वैधानिक निकाय है, जो नारियल खेती व उद्योग के एकीकृत विकास के लिए बना है। किसान के लिए इसकी सबसे सीधे काम आने वाली योजनाएँ वे हैं जो नारियल बाग़ की आमदनी पर सबसे बड़ा बोझ दूर करती हैं — वे पेड़ जो अपनी उपजाऊ उम्र पार कर चुके या जड़-सड़न व दूसरी बीमारियों की चपेट में हैं, और वे बाग़ जिनकी उपज गिर गई है पर दुबारा जीवित की जा सकती है।

मुख्य किसान योजना पुनर्रोपण व कायाकल्प (R&R) है, जो अपने बढ़े हुए (स्केल्ड-अप) रूप में लागू है। यह तीन हिस्सों में काम करती है। पहला, रोगग्रस्त, बूढ़े या अनुत्पादक पेड़ (साल में क़रीब 10 नारियल से कम देने वाला) की कटाई व हटाना: अनुदान पहले 20 पेड़ों के लिए ₹500 प्रति पेड़ और उसके बाद ₹250 प्रति पेड़ है, ₹13,000 प्रति हेक्टेयर की सीमा तक, हटाने के निरीक्षण के बाद भुगतान। दूसरा, पुनर्रोपण: हटाए पेड़ की जगह अनुमोदित स्रोत से अच्छी अधिक-उपज क़िस्म लगाने के लिए ₹20 प्रति पौधा सब्सिडी, जिसमें दुबारा लगाई आबादी 175 पेड़ प्रति हेक्टेयर से ज़्यादा न हो। तीसरा, कायाकल्प: ₹15,000 प्रति हेक्टेयर, ₹7,500 की दो बराबर किस्तों में, उन पेड़ों को खिलाने, इलाज व बहाल करने के लिए जो बूढ़े हैं पर अब भी ठीक होने लायक़ हैं। सहायता प्रति किसान 4 हेक्टेयर तक सीमित है, आवेदक को एक सटे इलाक़े का मालिक-किसान होना चाहिए, पुनर्रोपण उखाड़ने के 12 महीने के भीतर पूरा हो, और किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से मिट्टी जाँच ज़रूरी है।

R&R के साथ बोर्ड उत्पादकता योजनाएँ चलाता है — ख़ासकर नारियल-आधारित फ़सल प्रणाली या एकीकृत खेती अपनाने की सहायता, ताकि जवान पेड़ों के बड़े होने के दौरान किसान पेड़ों के बीच अंतर-फ़सल, पशुधन या संबद्ध गतिविधि से कमाए — और एक नारियल पेड़ बीमा योजना जो तय ख़तरों से पेड़ के नुक़सान की भरपाई करती है। ये नारियल उगाने वाले राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए योजनाएँ हैं, जो राज्य बाग़वानी या कृषि विभागों और बोर्ड के क्षेत्रीय व फ़ील्ड दफ़्तरों के ज़रिए क्लस्टर आधार पर लागू होती हैं। चूँकि पुनर्रोपण रोपाई के मौसम से जुड़ा है, आवेदन सालाना चक्र में खुलते हैं, हर समय नहीं — आवेदन से पहले मौजूदा खिड़की व ताज़ा दरें बोर्ड या स्थानीय कृषि भवन से पक्की करें।

योजना की मुख्य बातें

  • बेकार पेड़ हटाने का पैसा पाएँ

    रोगग्रस्त, बूढ़ा या मुश्किल से फल देने वाला पेड़ (साल में क़रीब 10 नारियल से कम) ज़मीन, पानी व धूप घेरता है पर देता लगभग कुछ नहीं। योजना उसे काटकर सुरक्षित हटाने के लिए ₹500 प्रति पेड़ (पहले 20, फिर ₹250), ₹13,000 प्रति हेक्टेयर तक देती है।

  • अधिक-उपज क़िस्म लगाने का अनुदान

    हटाए पेड़ की जगह, ₹20 प्रति पौधा सब्सिडी अनुमोदित स्रोत से अच्छी क़िस्म लगाने में मदद करती है — एक जवान पेड़ जो दशकों तक पुराने से ज़्यादा उपज देगा।

  • बचाने लायक़ बाग़ का कायाकल्प

    बूढ़े पर अब भी स्वस्थ पेड़ों के लिए, ₹15,000 प्रति हेक्टेयर दो किस्तों में खिलाने, इलाज व प्रबंधन का पैसा देता है जो गिरते बाग़ को वापस उपज पर लाता है — सब कुछ दुबारा लगाने से सस्ता व तेज़।

  • पेड़ों के बीच की ज़मीन से कमाई

    बोर्ड की उत्पादकता योजनाएँ नारियल-आधारित फ़सल व एकीकृत खेती का समर्थन करती हैं — पेड़ों के बीच अंतर-फ़सल, पशुधन या संबद्ध गतिविधि — ताकि ज़मीन दूसरी आमदनी दे, ख़ासकर जब दुबारा लगाए जवान पेड़ अभी बढ़ रहे हों।

  • पेड़ों का नुक़सान से बीमा

    एक नारियल पेड़ बीमा योजना तय ख़तरों से पेड़ के नुक़सान की भरपाई करती है, उस फ़सल में किसान के लंबे निवेश को बचाती है जो पूरी तरह फल देने में कई साल लेती है।

प्रमुख घटक

राज्य स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से इनमें से चुनाव करते हैं — हर घटक की अपनी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया है, जहाँ अलग पेज मौजूद है वहाँ पूरी जानकारी उसी पर है।

  • पुनर्रोपण व कायाकल्प (R&R)

    अनुत्पादक पेड़ों की कटाई व हटाना (₹500/₹250 प्रति पेड़, सीमा ₹13,000/हे.), अधिक-उपज पौधों से पुनर्रोपण (₹20/पौधा), और बूढ़े-पर-स्वस्थ पेड़ों का कायाकल्प (₹15,000/हे.)। प्रति किसान 4 हे. तक।

    पुराने, रोगग्रस्त या कम-उपज पेड़ों वाले, या गिरती उपज वाले बाग़ के किसान

  • उत्पादकता सुधार / एकीकृत खेती

    नारियल-आधारित फ़सल या एकीकृत खेती प्रणाली अपनाने की सहायता — पेड़ों के बीच अंतर-फ़सल, पशुधन व संबद्ध गतिविधि — क्लस्टर आधार पर, ताकि ज़मीन प्रति हेक्टेयर ज़्यादा कमाए। मौजूदा प्रति-हेक्टेयर दर बोर्ड से पक्की करें।

    बाग़ से दूसरी आमदनी चाहने वाले किसान व किसान क्लस्टर

  • नारियल पेड़ बीमा

    बीमा कवर जो फल देने वाले या जवान पेड़ के तय प्राकृतिक व अन्य ख़तरों से नुक़सान की भरपाई करता है, जिसका प्रीमियम किसान, बोर्ड व राज्य के बीच बँटता है।

    मौसम व बीमारी के नुक़सान से पेड़ बचाना चाहने वाले किसान

आपको क्या मिलता है

  • बाग़ फिर उपज देने लगे

    मुश्किल से फल देते पेड़ों को जवान अधिक-उपज पेड़ों से बदलना, और बचाने लायक़ पेड़ों का कायाकल्प, उसी ज़मीन, पानी व मेहनत से नारियल की पैदावार बढ़ाता है।

  • बदलाव की लागत साझा

    हटाना, पौधे व कायाकल्प सबका अनुदान है, इसलिए किसान को उस बाग़ को नया करने की पूरी शुरुआती लागत नहीं चुकानी पड़ती जो कुछ साल बाद ही लौटाना शुरू करेगा।

  • जवान पेड़ों के बड़े होने तक आमदनी

    अंतर-फ़सल व एकीकृत खेती सहायता का मतलब है दुबारा लगाए पेड़ के फल देने तक के सालों में ज़मीन दूसरी फ़सलों या संबद्ध गतिविधि से कमाती है।

  • लंबी फ़सल के लिए सुरक्षा

    पेड़ बीमा तूफ़ान, कीट या बीमारी से पेड़ के नुक़सान का सहारा देता है — उस फ़सल के लिए असली ख़तरा जो दशकों का निवेश है।

कौन पात्र है

दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।

आप पात्र हैं अगर

  • नारियल उगाने वाले राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मालिक-किसान नारियल उत्पादक
  • हटाने के लिए रोगग्रस्त, बूढ़े या अनुत्पादक पेड़ (साल में क़रीब 10 नारियल से कम देने वाले) और/या कायाकल्प के लिए बूढ़े-पर-स्वस्थ पेड़ों वाले किसान
  • अनुमोदित स्रोत से अधिक-उपज क़िस्म लगाने वाले किसान, पेड़ आबादी 175 प्रति हेक्टेयर के भीतर रखते हुए
  • उत्पादकता योजनाओं के तहत नारियल-आधारित फ़सल या एकीकृत खेती प्रणाली अपनाने वाले किसान व किसान क्लस्टर

ज़मीन होते हुए भी अपात्र

  • पुनर्रोपण व कायाकल्प के तहत प्रति किसान 4 हेक्टेयर से ज़्यादा के दावे
  • छोड़े गए या अनुपस्थित भू-स्वामियों के बाग़ (कायाकल्प के लिए), और इतने स्वस्थ पेड़ जिन्हें हटाना जायज़ न हो
  • अनुमोदित स्रोत से बाहर के पौधों से पुनर्रोपण, या 175 पेड़ प्रति हेक्टेयर से ज़्यादा
  • मौजूदा सालाना आवेदन खिड़की के बाहर, या बिना ज़रूरी मिट्टी जाँच के आवेदन करना

यह योजना कहाँ लागू है

पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।

  • मालिकाना व पहचान का सबूत

    नारियल बाग़ का ज़मीन मालिकाना रिकॉर्ड, किसान का पहचान प्रमाण (आधार) और सीधे लाभ भुगतान के लिए आधार-जुड़े खाते की बैंक पासबुक।

  • बाग़ व पेड़ का ब्यौरा

    बाग़ का क्षेत्रफल, हटाने, पुनर्रोपण या कायाकल्प वाले पेड़ों की संख्या व हालत — दिशा-निर्देशों के मुताबिक़ हटाने वाले पेड़ चिह्नित किए हुए।

  • अनुमोदित पौध सामग्री

    सबूत कि पुनर्रोपण के पौधे किसी अनुशंसित अधिक-उपज क़िस्म के और अनुमोदित या मान्यता प्राप्त स्रोत से हैं।

  • मिट्टी जाँच रिपोर्ट

    पुनर्रोपण व कायाकल्प दिशा-निर्देशों के मुताबिक़, किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से मिट्टी जाँच।

आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम

चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।

  1. 1

    मौजूदा आवेदन खिड़की पक्की करें

    पुनर्रोपण रोपाई के मौसम से जुड़े सालाना चक्र पर चलता है। खुली खिड़की व ताज़ा दरें नारियल विकास बोर्ड, राज्य बाग़वानी/कृषि विभाग या स्थानीय कृषि भवन से जाँचें।

  2. 2

    बाग़ का आकलन व मिट्टी जाँच करवाएँ

    हटाने वाले पेड़ (साल में क़रीब 10 नारियल से कम) और कायाकल्प वाले पेड़ पहचानें, और मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से मिट्टी जँचवाएँ।

  3. 3

    दस्तावेज़ों के साथ आवेदन करें

    राज्य बाग़वानी/कृषि विभाग या CDB फ़ील्ड दफ़्तर के ज़रिए आवेदन करें — मालिकाना सबूत, बाग़ ब्यौरा, आधार-जुड़ा बैंक खाता व मिट्टी रिपोर्ट के साथ।

  4. 4

    हटाना, पुनर्रोपण व निरीक्षण

    चिह्नित पेड़ हटाएँ और उखाड़ने के 12 महीने के भीतर अनुमोदित अधिक-उपज क़िस्म दुबारा लगाएँ; अनुदान जारी होने से पहले काम का निरीक्षण होता है।

  5. 5

    अनुदान सीधे लाभ के रूप में पाएँ

    कटाई-हटाना, प्रति-पौधा व कायाकल्प अनुदान आधार-जुड़े बैंक खाते में आते हैं; कायाकल्प दो किस्तों में जारी होता है।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • क्रियान्वयन निकाय

    नारियल विकास बोर्ड

    नारियल के एकीकृत विकास के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत वैधानिक निकाय

  • आवेदन चक्र

    सालाना, रोपाई के मौसम से जुड़ा

    पुनर्रोपण आवेदन मौसमी खिड़की में खुलते हैं, हर समय नहीं — मौजूदा खिड़की बोर्ड से पक्की करें

  • तथ्य आख़िरी बार जाँचे गए

    8 अक्टूबर 2026

    नारियल विकास बोर्ड की पुनर्रोपण व कायाकल्प योजना पन्ने (coconutboard.gov.in) के आधार पर, जो 8 अक्टूबर 2026 को अद्यतन था। आवेदन से पहले इस साल की खिड़की व दरें बोर्ड से पक्की करें।

अपनी पात्रता जाँचें

सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।

  1. 1.क्या आप किसी नारियल उगाने वाले राज्य में मालिक-किसान नारियल उत्पादक हैं, जिसका बाग़ एक सटे इलाक़े में है?
  2. 2.क्या आपके पास हटाने व दुबारा लगाने के लिए रोगग्रस्त, बूढ़े या कम-उपज पेड़ (साल में क़रीब 10 नारियल से कम) हैं, या कायाकल्प के लिए बूढ़े-पर-स्वस्थ पेड़ — 4 हेक्टेयर के भीतर?
  3. 3.क्या आप मौजूदा सालाना खिड़की के भीतर, मिट्टी जाँच करवाकर और अनुमोदित अधिक-उपज क़िस्म (≤175 पेड़/हे.) से पुनर्रोपण करते हुए आवेदन कर सकते हैं?

3 में से 0 जवाब दिए

यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।

डाउनलोड

केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पुनर्रोपण व कायाकल्प योजना किस चीज़ का पैसा देती है?

तीन चीज़ें: रोगग्रस्त, बूढ़े या अनुत्पादक पेड़ को काटकर हटाना (पहले 20 पेड़ों के लिए ₹500 प्रति पेड़, फिर ₹250, ₹13,000 प्रति हेक्टेयर तक); उसकी जगह अधिक-उपज क़िस्म दुबारा लगाना (₹20 प्रति पौधा); और बूढ़े-पर-स्वस्थ पेड़ों का कायाकल्प (₹15,000 प्रति हेक्टेयर, ₹7,500 की दो किस्तों में)। किसान 4 हेक्टेयर तक दावा कर सकता है।

कौन-से पेड़ हटाने के पात्र हैं?

वे पेड़ जो रोगग्रस्त, बूढ़े या अनुत्पादक हैं — आम तौर पर जो साल में क़रीब 10 नारियल से कम देते हैं — और दिशा-निर्देशों के मुताबिक़ हटाने के लिए चिह्नित हैं। स्वस्थ, अच्छा फल देने वाले पेड़ कटाई-हटाने के अनुदान के पात्र नहीं।

कौन आवेदन कर सकता है, और किन राज्यों में?

नारियल उगाने वाले राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मालिक-किसान नारियल उत्पादक, एक सटे इलाक़े के बाग़ के लिए आवेदन करते हुए। यह राज्य बाग़वानी या कृषि विभाग और बोर्ड के क्षेत्रीय व फ़ील्ड दफ़्तरों के ज़रिए लागू होती है।

पैसा कैसे मिलता है?

सीधे लाभ के रूप में किसान के आधार-जुड़े बैंक खाते में, हटाने व पुनर्रोपण के निरीक्षण के बाद। कायाकल्प अनुदान ₹7,500 प्रति हेक्टेयर की दो बराबर किस्तों में जारी होता है।

क्या योजना अभी आवेदन के लिए खुली है?

पुनर्रोपण रोपाई के मौसम से जुड़े सालाना चक्र पर चलता है, इसलिए आवेदन हर समय नहीं, एक मौसमी खिड़की में खुलते हैं। बोर्ड का योजना पन्ना 8 अक्टूबर 2026 तक अद्यतन था, पर शुरू करने से पहले इस साल की खिड़की व दरें नारियल विकास बोर्ड या स्थानीय कृषि भवन से ज़रूर पक्की करें।

बोर्ड किसान को और क्या देता है?

पुनर्रोपण व कायाकल्प के अलावा, बोर्ड नारियल-आधारित फ़सल व एकीकृत खेती प्रणाली का समर्थन करता है ताकि किसान पेड़ों के बीच की ज़मीन से कमाए, और एक नारियल पेड़ बीमा योजना चलाता है जो तय ख़तरों से पेड़ के नुक़सान की भरपाई करती है। इनकी मौजूदा दरें बोर्ड से पक्की करें।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन undefined ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।