Dendrocalamus asper (sweet bamboo)
एक विदेशी, बहुत बड़ा बाँस जो मुख्यतः अपनी मोटी, हल्के स्वाद वाली नई कोंपलों के लिए उगाया जाता — व्यापार में श्रेष्ठ खाने योग्य बाँस-कोंपल — जबकि भारी बल्लियाँ भी अच्छी निर्माण-लकड़ी। गहरी, अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी व गरमाहट चाहिए।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- बाँस
- प्रकार
- वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित प्रजाति (विदेशी)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- कोंपल-कटाई वर्ष 3–4 से
- अपेक्षित उपज
- पानी के साथ अच्छी मिट्टी पर ऊँची कोंपल-उपज
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- राष्ट्रीय बाँस मिशन के तहत अनुशंसित एक विदेशी प्रजाति; कोई विकसित किस्म नहीं
इस किस्म के बारे में
डेंड्रोकैलेमस एस्पर दक्षिण-पूर्व एशिया का एक बड़ा, मोटी-दीवार वाला झुरमुटदार बाँस है, राष्ट्रीय बाँस मिशन की अनुशंसित प्रजातियों में सूचीबद्ध और भारत में मुख्यतः खाने-योग्य-कोंपल फ़सल के रूप में उगाया जाता। इसकी नई कोंपलें मोटी, कोमल व हल्की — ताज़े, डिब्बाबंद व अचार बाज़ारों में सबसे माँगी जाने वाली किस्म — और लगभग तीसरे या चौथे साल से काटी जा सकतीं। परिपक्व बल्लियाँ, 20 मी तक व बहुत भारी-दीवार, भी मज़बूत निर्माण-लकड़ी हैं। इसे गहरी, अच्छी जल-निकासी वाली काली या बलुई-दोमट मिट्टी, गरमाहट और, अच्छी कोंपल-उपज को, पक्की सिंचाई चाहिए; यह पाले या जलभराव वाली ज़मीन को उपयुक्त नहीं।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
कोंपल-कटाई वर्ष 3–4 से
अपेक्षित उपज
पानी के साथ अच्छी मिट्टी पर ऊँची कोंपल-उपज
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- आमतौर मज़बूत; कोंपलें छेदकों व कृंतकों को खींचतीं
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- मोटी, हल्की, कोमल कोंपलें — श्रेष्ठ खाने योग्य बाँस-कोंपल, एक असली ताज़ा व प्रसंस्करण बाज़ार के साथ
- भारी-दीवार परिपक्व बल्लियाँ भी मज़बूत निर्माण-लकड़ी, इसलिए फ़सल दो तरह कमाई देती
- गहरी मिट्टी पर पानी के साथ तेज़ बढ़वार व ऊँची उपज
ध्यान रखने योग्य बातें
- पाला-संवेदनशील व जलभराव असहनशील — एक गरम, गहरे, अच्छी जल-निकासी वाले स्थल की ज़रूरत
- भोजन को कोंपलें काटना और लकड़ी को बल्लियाँ बढ़ने देना एक-दूसरे के विरुद्ध खींचते; एक झुरमुट को एक मुख्य मक़सद के लिए प्रबंधित करना पड़ता
- निकलती कोंपलें कोंपल-छेदकों, कृंतकों व जंगली सूअर के लिए एक तेज़ आकर्षण
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- केरल
- कर्नाटक
- महाराष्ट्र
- असम
- नागालैंड
- मिज़ोरम
