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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
बाँससभी सीज़नवानस्पतिक रूप से प्रवर्धित प्रजातिअपडेट किया गया 6 सितंबर 2026

Dendrocalamus strictus (male bamboo)

भारत का सबसे व्यापक बाँस और मध्य प्रदेश व मध्य भारत के सूखे पर्णपाती वनों का मुख्य आधार। बल्लियाँ छोटी (8–16 मी) व अक्सर लगभग ठोस, जो मज़बूत लाठियाँ, औज़ार-हत्थे, अगरबत्ती तीलियाँ व लुगदी बनातीं। सच में सूखा-सहनशील — 750–1000 मिमी बारिश पर बारानी उगाई जाती।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिपहली कटाई वर्ष 5–6 (सूखी ज़मीन पर धीमी)
अपेक्षित उपजबारानी में मध्यम — मूल्य यह है कि सूखी, ख़राब ज़मीन पर भी उपज देती है
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
बाँस
प्रकार
वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित प्रजाति
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
पहली कटाई वर्ष 5–6 (सूखी ज़मीन पर धीमी)
अपेक्षित उपज
बारानी में मध्यम — मूल्य यह है कि सूखी, ख़राब ज़मीन पर भी उपज देती है
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
एक मूल भारतीय प्रजाति व सूखे-क्षेत्र खेती के लिए प्रमुख राष्ट्रीय बाँस मिशन प्रजाति; कोई विकसित किस्म नहीं

इस किस्म के बारे में

डेंड्रोकैलेमस स्ट्रिक्टस, "नर बाँस" या "ठोस बाँस", भारत का सबसे प्रचुर बाँस है, जो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र व ओडिशा के सूखे पर्णपाती वनों के बड़े क्षेत्र ढकता और खेत व भूमि-सुधार वानिकी में व्यापक रूप से लगाया जाता। यह अपेक्षाकृत छोटी बल्लियों (8–16 मी, 2.5–8 सेमी चौड़ी) के मध्यम घने झुरमुट बनाता जो अक्सर लगभग ठोस होतीं, जिससे वह मज़बूती मिलती जो उन्हें लाठियों, औज़ार-हत्थों, तंबू-खंभों, अगरबत्ती तीलियों व काग़ज़ लुगदी की मानक सामग्री बनाती। इसका परिभाषित गुण सूखा-सहनशीलता है — यह 750–1000 मिमी सालाना बारिश पर उगती व उपज देती जहाँ ऊँची-उपज प्रजातियाँ नाकाम रहेंगी — जो इसे सूखी बारानी ज़मीन व भूमि-क्षरण नियंत्रण के लिए डिफ़ॉल्ट विकल्प बनाता है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारवानस्पतिक रूप से प्रवर्धित प्रजाति
    अवधिपहली कटाई वर्ष 5–6 (सूखी ज़मीन पर धीमी)
    उपज क्षमताबारानी में मध्यम — मूल्य यह है कि सूखी, ख़राब ज़मीन पर भी उपज देती है
    रोग-प्रतिरोधबहुत मज़बूत व सूखा-सहनशील; सूखी जगहों पर कोई गंभीर रोग नहीं
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

बुवाई व खेती

  • दूरीसूखी बारानी ज़मीन पर आमतौर चौड़ा 5 × 5 मी (लगभग 400 झुरमुट/हेक्टेयर)

उपज व अवधि

पकने की अवधि

पहली कटाई वर्ष 5–6 (सूखी ज़मीन पर धीमी)

अपेक्षित उपज

बारानी में मध्यम — मूल्य यह है कि सूखी, ख़राब ज़मीन पर भी उपज देती है

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • बहुत मज़बूत व सूखा-सहनशील; सूखी जगहों पर कोई गंभीर रोग नहीं

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • सच में सूखा-सहनशील — सूखी, ख़राब, बारानी ज़मीन पर भरोसे से उपज देने वाला एकमात्र बाँस
  • ठोस या लगभग-ठोस बल्लियाँ अपने आकार के लिए असामान्य रूप से मज़बूत
  • क्षरित व ढलानी ज़मीन को स्थिर व पुनर्निर्मित करने को उत्कृष्ट

ध्यान रखने योग्य बातें

  • बंबूसा बलकोआ या बीमा से छोटी बल्लियाँ व कम जैव-मात्रा — जहाँ पक्की सिंचाई उपलब्ध हो वहाँ यह विकल्प नहीं
  • बहुत सूखी जगहों पर पहली व्यावसायिक कटाई तक पहुँचने में धीमी

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • मध्य प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • महाराष्ट्र
  • ओडिशा
  • झारखंड
  • राजस्थान