Dendrocalamus hamiltonii (Kako bans)
पूर्वोत्तर व उप-हिमालयी पट्टी का एक बड़ा पहाड़ी बाँस, लंबी पोरियों के साथ, जो निर्माण, टोकरी, चटाई व काग़ज़ में इस्तेमाल होता। इसकी कोमल कोंपलें इस क्षेत्र में व्यापक रूप से ताज़ी व किण्वित खाई जातीं। अधिकांश बाँसों से ज़्यादा ठंड सहता।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- बाँस
- प्रकार
- वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित प्रजाति
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- पहली कटाई वर्ष 4–5
- अपेक्षित उपज
- अपने ऊँची-बारिश वाले मूल इलाक़े में ऊँची
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- एक मूल पूर्वोत्तर भारतीय प्रजाति व राष्ट्रीय बाँस मिशन प्रजाति; कोई विकसित किस्म नहीं
इस किस्म के बारे में
डेंड्रोकैलेमस हैमिल्टोनाई (काको बाँस, पाओ) पूर्वोत्तर व उप-हिमालयी पहाड़ों का एक बड़ा, ढीले झुरमुट वाला बाँस है, राष्ट्रीय बाँस मिशन प्रजातियों में सूचीबद्ध और क्षेत्र के सबसे-इस्तेमाल बाँसों में से एक। इसकी बल्लियाँ 12–18 मी तक, लंबी पोरियों व मध्यम-पतली दीवार के साथ, घर-निर्माण, चटाई, टोकरी व काग़ज़ लुगदी को अच्छी काम करतीं। नरम, मीठी-सी नई कोंपलें एक प्रमुख क्षेत्रीय भोजन, ताज़ी और, ज़्यादा मशहूर, किण्वित खाई जातीं। यह ऊँची-बारिश पहाड़ी दशाओं को सूट करता व निचली-भूमि प्रजातियों से बेहतर ठंड सहता, पर इसकी पतली-दीवार बल्लियाँ बहुत जल्दी सुखाने पर चिटखने को प्रवण।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
पहली कटाई वर्ष 4–5
अपेक्षित उपज
अपने ऊँची-बारिश वाले मूल इलाक़े में ऊँची
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- पहाड़ों में मज़बूत; पतली-दीवार बल्लियाँ जल्दी सुखाने पर चिटख जातीं
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- लंबी, काम-लायक़ पोरियाँ चटाई, टोकरी व घर-निर्माण को आदर्श
- मीठी, कोमल कोंपलें — एक बड़ा खाद्य उत्पाद, ताज़ी व किण्वित खाई जातीं
- अधिकांश खेती बाँसों से ज़्यादा ठंड-सहनशील, पहाड़ों को उपयुक्त
ध्यान रखने योग्य बातें
- पतली-दीवार बल्लियाँ बहुत जल्दी सुखाने पर चिटख जातीं — उन्हें धीमी, छायादार सुखाई चाहिए
- ऊँची-बारिश पहाड़ी स्थलों को सबसे उपयुक्त; सूखे मैदानों में कम उत्पादक
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- असम
- अरुणाचल प्रदेश
- मेघालय
- सिक्किम
- पश्चिम बंगाल
- नागालैंड
