GAUCH 1
गुजरात कृषि विश्वविद्यालय की पुरानी हाइब्रिड, गुजरात व दक्षिण की बारानी पट्टी में ऊँची उपज के लिए बोई जाती है — पर म्लानि दबाव में जीसीएच 8 सुरक्षित है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- अरंडी
- प्रकार
- हाइब्रिड
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 150–180 दिन
- बीज दर
- सामान्य अरंडी-संकर सलाह लगभग 10–12 किलो/हेक्टेयर बताती है — यह जीएयूसीएच 1 के लिए पुष्ट आँकड़ा नहीं है
- अपेक्षित उपज
- सिंचाई में अधिक; बारानी में कम व अधिक अनिश्चित
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई / हल्की मिट्टी
- जारी
- सुझाया गया जारी-वर्ष 1973–1976 (दो स्वतंत्र रूप से प्राप्त स्रोत सटीक वर्ष पर असहमत हैं) · गुजरात कृषि विश्वविद्यालय — मादा रेखा वीपी-1 × नर रेखा वी-19 का संकरण
इस किस्म के बारे में
जीएयूसीएच 1 गुजरात कृषि विश्वविद्यालय की एक शुरुआती अरंडी हाइब्रिड है, जिसके लिए दो सीधे प्राप्त स्रोत सटीक जारी-वर्ष पर असहमत हैं (एक में 1973, दूसरे में 1976) पर संकरण पर सहमत हैं — मादा (पिस्टिलेट) रेखा वीपी-1 × नर रेखा वी-19। इसे एक शुरुआती-पकने वाली हाइब्रिड बताया गया है जिसमें सूखे से बचाव की क्षमता है, जो गुजरात के सिंचित इलाक़ों व दक्षिण भारत की बारानी अरंडी पट्टी दोनों में ऊँची उपज क्षमता देती है, पर साथ ही म्लानि व जड़ सड़न के प्रति जानी-मानी संवेदनशीलता भी है — जो इस रिकॉर्ड के अपने diseaseResistance क्षेत्र से क़रीब-क़रीब मेल खाती है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयखरीफ़ बुवाई, गुजरात में सामान्यतः जुलाई के पहले पखवाड़े में, सामान्य अरंडी खेती सलाह के अनुसार — यह जीएयूसीएच 1 के लिए पुष्ट आँकड़ा नहीं है
- बीज दरसामान्य अरंडी-संकर सलाह लगभग 10–12 किलो/हेक्टेयर बताती है — यह जीएयूसीएच 1 के लिए पुष्ट आँकड़ा नहीं है
- दूरीएक सीधे प्राप्त एग्री फ़ार्मिंग गाइड सामान्यतः हाइब्रिड अरंडी बीज उत्पादन के लिए मादा:नर रोपण अनुपात 4-6:1 व दूरी लगभग 90×40 से 90×60 सेमी बताती है — यह जीएयूसीएच 1 के लिए पुष्ट आँकड़ा नहीं है
- उर्वरकसामान्य अरंडी सलाह लगभग 40:40:20 किलो एन:पी:के/हेक्टेयर बताती है — बुवाई पर पूरा पी व के तथा आधा एन, शेष एन क़रीब एक महीने बाद — यह जीएयूसीएच 1 के लिए पुष्ट आँकड़ा नहीं है
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई से बलुई दोमट मिट्टी, इस रिकॉर्ड के अपने बलुई मिट्टी क्षेत्र से मेल खाती
उपज व अवधि
पकने की अवधि
150–180 दिन
अपेक्षित उपज
सिंचाई में अधिक; बारानी में कम व अधिक अनिश्चित
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- सुझाया गया शुरुआती-पकने वाला हाइब्रिड, जिसमें सूखे से बचाव की क्षमता है — कम भरोसेमंद बारिश वाले इलाक़ों में उपयोगी
- ऊँची उपज क्षमता, गुजरात के सिंचित इलाक़ों व दक्षिण भारत की बारानी अरंडी पट्टी दोनों में अनुकूल
ध्यान रखने योग्य बातें
- दो स्वतंत्र रूप से प्राप्त स्रोत सटीक जारी-वर्ष पर असहमत हैं — एक में 1973, दूसरे में 1976 — हालांकि दोनों वीपी-1 × वी-19 संकरण व म्लानि/जड़ सड़न संवेदनशीलता पर सहमत हैं
- दो प्राप्त स्रोतों में से एक जीएयूसीएच 1 को गुजरात की "देश की पहली अरंडी हाइब्रिड" बताता है, पर अन्य खोज परिणाम यह श्रेय जीसीएच-3 को देते हैं, जिसे सुझाए गए अनुसार 1968 में जारी किया गया — कई साल पहले — इसलिए "पहली हाइब्रिड" वाले दावे को यहाँ अपुष्ट माना गया है और ऊपर के विवरण में उपयोग नहीं किया गया
- ऊपर दिए गए बीज दर, दूरी, उर्वरक व बुवाई-खिड़की आँकड़े सामान्य व्यावसायिक अरंडी-संकर खेती सलाह हैं, जीएयूसीएच 1 के लिए पुष्ट आँकड़े नहीं
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- गुजरात
- कर्नाटक
- तमिलनाडु
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
म्लानि संवेदनशीलता के बावजूद जीएयूसीएच 1 आज भी क्यों बोई जाती है?
इसकी ऊँची उपज क्षमता व शुरुआती-पकने, सूखे से बचने वाली आदत आज भी इसे गुजरात के सिंचित इलाक़ों व दक्षिण भारत की बारानी पट्टी दोनों में आकर्षक बनाती है, और एक पुरानी, अच्छी तरह स्थापित हाइब्रिड होने के नाते यह व्यापक रूप से उपलब्ध व किसानों के लिए परिचित है। पर हाल में म्लानि के इतिहास वाली ज़मीन पर, जीसीएच 8 — जो ख़ास तौर पर म्लानि-प्रतिरोध के लिए बनाई गई — अब ज़्यादा सुरक्षित विकल्प है, इस रिकॉर्ड के अपने नोट के अनुसार।
क्या जीएयूसीएच 1 वाक़ई भारत की पहली अरंडी हाइब्रिड थी?
एक प्राप्त स्रोत इसे इस तरह बताता है, पर यह दावा अच्छी तरह पुष्ट नहीं है — अन्य स्रोत गुजरात की जीसीएच-3 की ओर इशारा करते हैं, जिसे सुझाए गए अनुसार 1968 में जारी किया गया, यानी पहले की हाइब्रिड। "पहली हाइब्रिड" वाले दावे को पुष्ट तथ्य की बजाय सावधानी से देखें।
स्रोत: Castor Cultivation Information Guide — Agri Farming, Castor Crop Cultivation: Techniques and High-Value Varieties — Agriculture.Institute. संपादकीय नीति.
