JRC-212
सफ़ेद जूट किस्म, मध्यम से ऊँची ज़मीन पर पछेती बुवाई के लिए उपयुक्त, मार्च–अप्रैल में बोई जाती है जहाँ तोसा कम भरोसेमंद है। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- जूट
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 110–125 दिन
- अपेक्षित उपज
- 25–28 क्विंटल/हेक्टेयर रेशा
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ़, बैरकपुर, पश्चिम बंगाल — 1954 में जारी, देसी जर्मप्लाज़्म से चयन
इस किस्म के बारे में
जेआरसी-212, जिसे लोकप्रिय नाम सबुज सोना से भी जाना जाता है, एक सफ़ेद जूट (Corchorus capsularis) किस्म है, जिसे आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ़, बैरकपुर, पश्चिम बंगाल द्वारा 1954 में देसी जर्मप्लाज़्म से चयन कर जारी किया गया। इसकी पत्तियाँ पूर्ण हरी, बीज का छिलका चमकदार चॉकलेटी रंग का, और फलियाँ नॉन-डिहिसेंट (नॉन-शैटरिंग) हैं, और यह संपूर्ण कैप्सुलैरिस (सफ़ेद जूट) पट्टी के मध्यम व ऊँचे क्षेत्रों के लिए अनुशंसित है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
110–125 दिन
अपेक्षित उपज
25–28 क्विंटल/हेक्टेयर रेशा
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- सामान्य संवेदनशीलता — कोई विशेष बना-बनाया प्रतिरोध नहीं
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
ध्यान रखने योग्य बातें
- 2026-08-15 को सुधारा गया: पुष्ट द्वितीयक स्रोत (≥2 स्वतंत्र रूप से सहमत स्रोत) 25–28 क्विंटल/हेक्टेयर रेशा उपज बताते हैं, जो इस रिकॉर्ड की पुरानी "18–22 क्विंटल/हेक्टेयर" yieldPotential से अधिक थी — yieldPotential को "25–28 क्विंटल/हेक्टेयर" में सुधारा गया।
- 2026-08-15 को समीक्षा की गई: स्रोत में अवधि दो अलग-अलग मापदंडों में दी गई है: 50% फूल आने तक 150–160 दिन व पूर्ण बीज-परिपक्वता तक 220–230 दिन — दोनों में से कोई भी इस रिकॉर्ड की अपनी "110–125 दिन" duration फ़ील्ड से सीधे मेल नहीं खाता, जो रेशा-कटाई चरण (किसानों के लिए व्यावहारिक रूप से प्रासंगिक आँकड़ा) दर्शाता है, फूल आने/बीज-परिपक्वता से बहुत पहले — duration को जानबूझकर यथावत छोड़ा गया क्योंकि यह फ़सल-चक्र के एक अलग बिंदु को मापता है, कोई ग़लत संख्या नहीं।
- सीआरआईजेएएफ़ की अपनी डोमेन (crijaf.icar.gov.in) व AICRP जूट-नेटवर्क साइट (aicrp.icar.gov.in) दोनों इस चरण में सुलभ नहीं हुईं (DNS विफलता), जो स्थायी icar.gov.in-सबडोमेन गड़बड़ी से मेल खाता है — यहाँ सभी तथ्य पुष्ट द्वितीयक स्रोतों (एक सीधे प्राप्त तकनीकी प्रस्तुति व स्वतंत्र वेबसर्च परिणाम) पर आधारित हैं, किसी सीधे पढ़े गए सीआरआईजेएएफ़ प्राथमिक दस्तावेज़ पर नहीं।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- पश्चिम बंगाल
- बिहार
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जेआरसी-212 को किसने और कब जारी किया?
आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ़, बैरकपुर ने इसे 1954 में देसी जर्मप्लाज़्म से चयन कर जारी किया — इस डेटासेट की सबसे पुरानी जूट किस्मों में से एक।
जेआरसी-212 को सबुज सोना भी क्यों कहा जाता है?
सबुज सोना ("हरा सोना") इसका लोकप्रिय बंगाली नाम है, जो उस क्षेत्र में जूट के एक मूल्यवान नक़दी फ़सल के ऐतिहासिक दर्जे को दर्शाता है जहाँ यह किस्म विकसित हुई और व्यापक रूप से उगाई जाती है।
जेआरसी-212 किस प्रकार की जूट है — सफ़ेद या तोसा?
यह सफ़ेद जूट (Corchorus capsularis) है — 'जेआरसी' उपसर्ग सीआरआईजेएएफ़ की सफ़ेद-जूट प्रजनन-पंक्तियों को चिह्नित करता है, जो तोसा (Corchorus olitorius) किस्मों में प्रयुक्त 'जेआरओ' उपसर्ग से अलग है।
जेआरसी-212 कितनी रेशा उपज देती है?
पुष्ट द्वितीयक स्रोत 25–28 क्विंटल/हेक्टेयर बताते हैं — इस रिकॉर्ड के yieldPotential फ़ील्ड को उसी आँकड़े में सुधारा गया।
जेआरसी-212 किन क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त है?
संपूर्ण सफ़ेद-जूट (कैप्सुलैरिस) उगाने वाली पट्टी के मध्यम व ऊँचे क्षेत्र, मार्च से अप्रैल में बुवाई व जुलाई के अंत तक कटाई — यह इस रिकॉर्ड की मौजूदा पछेती-बुवाई फ़्रेमिंग से मेल खाता है।
