JRO 204 (Suren)
एक तोसा जूट (Corchorus olitorius) किस्म, जल्दी बुवाई के लिए सुझाई गई — तोसा सफ़ेद जूट से बारीक़, ज़्यादा क़ीमत वाला रेशा देता है, यही वजह है कि यह अब भारत के अधिकांश जूट क्षेत्र को कवर करता है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- जूट
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 100–120 दिन
- बीज दर
- सामान्य तोसा-जूट सलाह लगभग 3.0–3.5 किलो/हेक्टेयर पंक्ति बुवाई में या 4.0–4.5 किलो/हेक्टेयर छिड़काव में बताती है — यह जेआरओ 204 के लिए पुष्ट आँकड़ा नहीं है
- अपेक्षित उपज
- 25–30 क्विंटल/हेक्टेयर सूखा रेशा
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- सुझाया गया जारी-वर्ष 2007 · आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ़, बैरकपुर, पश्चिम बंगाल — सुझाया गया संकरण आईडीएन/एसयू/053 × केईएन/डीएस/060 (वेबसर्च से पुष्ट, किसी सीधे प्राप्त प्राथमिक स्रोत में नहीं पढ़ा गया)
इस किस्म के बारे में
जेआरओ 204 (सुरेन) एक तोसा जूट (Corchorus olitorius) किस्म है, जिसे सुझाए गए अनुसार 2007 में आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ़, बैरकपुर ने जारी किया — सुझाया गया संकरण आईडीएन/एसयू/053 × केईएन/डीएस/060 है। जूट की खेती पर एक सीधे प्राप्त तकनीकी प्रस्तुति इसे जल्दी बुवाई (लगभग 10 मार्च से 15 अप्रैल) की किस्मों में गिनती है — गैर-झड़ने वाली, गैर-गिरने वाली फलियाँ व जड़ व तना सड़न, एन्थ्रेक्नोज़ व पीली मकड़ी के प्रति सहनशीलता बताई गई है, और लगभग 32–38 क्विंटल/हेक्टेयर रेशा उपज दर्ज है, जो इस रिकॉर्ड के अपने 25–30 क्विंटल/हेक्टेयर आँकड़े से थोड़ा ज़्यादा है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयजल्दी बुवाई की खिड़की, लगभग 10 मार्च से 15 अप्रैल, जूट की खेती पर एक सीधे प्राप्त तकनीकी प्रस्तुति के अनुसार — इस रिकॉर्ड के अपने "जल्दी बुवाई के लिए सुझाई गई" विवरण से मेल खाती
- बीज दरसामान्य तोसा-जूट सलाह लगभग 3.0–3.5 किलो/हेक्टेयर पंक्ति बुवाई में या 4.0–4.5 किलो/हेक्टेयर छिड़काव में बताती है — यह जेआरओ 204 के लिए पुष्ट आँकड़ा नहीं है
- दूरीसामान्य जूट पंक्ति-दूरी सलाह लगभग 45 सेमी बताती है — यह जेआरओ 204 के लिए पुष्ट आँकड़ा नहीं है
- कटाईसुझाई गई रेशा उपज लगभग 32–38 क्विंटल/हेक्टेयर, इस रिकॉर्ड के अपने 25–30 क्विंटल/हेक्टेयर आँकड़े से थोड़ा ज़्यादा, एक सीधे प्राप्त तकनीकी प्रस्तुति के अनुसार
उपज व अवधि
पकने की अवधि
100–120 दिन
अपेक्षित उपज
25–30 क्विंटल/हेक्टेयर सूखा रेशा
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- जल्दी बुवाई की खिड़की (10 मार्च–15 अप्रैल) मानसून के चरम से पहले उखाड़ने व सड़ाने (रेटिंग) की अनुमति देती है — जहाँ मौसम के अंत में बाढ़ का ख़तरा हो, वहाँ फ़ायदेमंद
- गैर-झड़ने वाली, गैर-गिरने वाली फलियाँ, साथ ही जड़ व तना सड़न, एन्थ्रेक्नोज़ व पीली मकड़ी के प्रति सहनशीलता
ध्यान रखने योग्य बातें
- एक वेबसर्च परिणाम 180–190 दिन की फ़सल अवधि बताता है, जो इस रिकॉर्ड के अपने 100–120 दिन के आँकड़े से काफ़ी आगे है — जूट रेशा फ़सलें आमतौर पर पूर्ण बीज-परिपक्वता से काफ़ी पहले काटी व सड़ाई (रेटिंग) जाती हैं, इसलिए यह अंतर संभवतः पूर्ण बीज-से-बीज चक्र दर्शाता है, न कि इस रिकॉर्ड के अपने क्षेत्र में बताई गई रेशा-कटाई अवधि; कोई भी आँकड़ा किसी सीधे प्राप्त प्राथमिक स्रोत से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हो सका, इसलिए इसे सुधारने की बजाय यहाँ दर्ज किया गया है
- जारी-वर्ष (2007) व संकरण केवल वेबसर्च से पुष्ट हैं — सीआरआईजेएएफ़ की अपनी वेबसाइट (crijaf.icar.gov.in) सीधे पुष्टि के लिए नहीं खुली, जो इस पूरी परियोजना में देखे गए आईसीएआर-डोमेन पैटर्न से मेल खाता है
- ऊपर दिए गए सामान्य बीज दर व दूरी आँकड़े सामान्य व्यावसायिक तोसा-जूट खेती सलाह हैं, जेआरओ 204 के लिए पुष्ट आँकड़े नहीं
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- पश्चिम बंगाल
- बिहार
- असम
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जेआरओ 204 कब बोई जानी चाहिए?
जल्दी बुवाई की खिड़की में, लगभग 10 मार्च से 15 अप्रैल, जूट की खेती पर एक सीधे प्राप्त तकनीकी प्रस्तुति के अनुसार — जो इस रिकॉर्ड के अपने "जल्दी बुवाई के लिए सुझाई गई" नोट से मेल खाती है।
क्या जेआरओ 204 की रेशा उपज वाक़ई इस रिकॉर्ड के अपने आँकड़े से ज़्यादा है?
एक सीधे प्राप्त तकनीकी प्रस्तुति लगभग 32–38 क्विंटल/हेक्टेयर बताती है, जो इस रिकॉर्ड के अपने 25–30 क्विंटल/हेक्टेयर आँकड़े से कुछ ज़्यादा है — दोनों को यहाँ एक सीमा के रूप में दर्ज किया गया है, किसी एक को चुनने की बजाय, क्योंकि स्रोत एक सामान्य तकनीकी प्रस्तुति है, न कि कोई आधिकारिक सीआरआईजेएएफ़ जारी-दस्तावेज़।
स्रोत: Improved Technologies for Jute Cultivation in India (technical presentation). संपादकीय नीति.
