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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
जूटखरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

JRC-321

अगेती-पकने वाली सफ़ेद जूट किस्म, निचली भूमि व अगेती बारिश के लिए उपयुक्त, फरवरी–मार्च में बोई जाती है। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि100–115 दिन
अपेक्षित उपज18–22 क्विंटल/हेक्टेयर रेशा
उपयुक्त मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

फसल
जूट
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
100–115 दिन
अपेक्षित उपज
18–22 क्विंटल/हेक्टेयर रेशा
उपयुक्त मिट्टी
चिकनी / काली मिट्टी
जारी
आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ़, बैरकपुर, पश्चिम बंगाल — 1954 में जारी, देसी जर्मप्लाज़्म "हेवती" से चयन

इस किस्म के बारे में

जेआरसी-321, जिसे लोकप्रिय रूप से सोनाली कहा जाता है, एक सफ़ेद जूट (Corchorus capsularis) किस्म है, जिसे आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ़, बैरकपुर, पश्चिम बंगाल द्वारा 1954 में देसी जर्मप्लाज़्म "हेवती" से चयन कर जारी किया गया। इसे सफ़ेद जूट किस्मों में सबसे बारीक रेशा गुणवत्ता (1.50 टेक्स बारीकी) के लिए महत्व दिया जाता है और यह ख़ासतौर पर निचली, बाढ़-प्रवण भूमि के लिए उपयुक्त है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि100–115 दिन
    उपज क्षमता18–22 क्विंटल/हेक्टेयर रेशा
    रोग-प्रतिरोधजलभराव, निचली-भूमि स्थितियों के प्रति अच्छी खेत-सहनशीलता
    मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

100–115 दिन

अपेक्षित उपज

18–22 क्विंटल/हेक्टेयर रेशा

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • जलभराव, निचली-भूमि स्थितियों के प्रति अच्छी खेत-सहनशीलता

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रखने योग्य बातें

  • 2026-08-15 को सुधारा गया: पुष्ट द्वितीयक स्रोत जेआरसी-321 को उत्तर बंगाल, पश्चिम बंगाल, असम व बिहार के निचले, बाढ़-प्रवण क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बताते हैं — states को पुराने एकल-राज्य (पश्चिम बंगाल) फ़ील्ड से असम व बिहार जोड़कर सुधारा गया (उत्तर बंगाल पश्चिम बंगाल का ही एक क्षेत्र है, इस फ़ाइल के states फ़ील्ड में अलग राज्य के रूप में ट्रैक नहीं किया जाता, इसलिए इसे मौजूदा पश्चिम बंगाल प्रविष्टि में समाहित रखा गया)। वही स्रोत बताते हैं कि सफ़ेद जूट सामान्यतः तोसा जूट से बेहतर जलभराव सहन करता है, जो इस रिकॉर्ड की अपनी "जलभराव, निचली-भूमि स्थितियों के प्रति अच्छी खेत-सहनशीलता" diseaseResistance शब्दावली का समर्थन करता है (क़िस्म-विशिष्ट पुष्टि नहीं, सामान्य समर्थन)।
  • 2026-08-15 को समीक्षा की गई: एक सीधे प्राप्त तकनीकी प्रस्तुति 20–25 क्विंटल/हेक्टेयर रेशा उपज बताती है, जो इस रिकॉर्ड की मौजूदा "18–22 क्विंटल/हेक्टेयर" yieldPotential रेंज के क़रीब व आंशिक रूप से अतिव्यापी है — कोई मज़बूत विरोधाभास नहीं, इसलिए yieldPotential यथावत छोड़ी गई।
  • जेआरसी-212 जैसी ही डोमेन-पहुँच गड़बड़ी: सीआरआईजेएएफ़ की अपनी साइट व AICRP जूट-नेटवर्क साइट दोनों इस चरण में सुलभ नहीं हुईं (DNS विफलता) — यहाँ सभी तथ्य पुष्ट द्वितीयक स्रोतों पर आधारित हैं, किसी सीधे पढ़े गए सीआरआईजेएएफ़ प्राथमिक दस्तावेज़ पर नहीं।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • पश्चिम बंगाल
  • असम
  • बिहार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जेआरसी-321 को किसने और कब जारी किया?

आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ़, बैरकपुर ने इसे 1954 में जारी किया, जो देसी जर्मप्लाज़्म "हेवती" से चयनित है।

जेआरसी-321 का रेशा किस लिए ख़ास है?

इसकी बारीकी लगभग 1.50 टेक्स है, जिसे सफ़ेद जूट किस्मों में सर्वश्रेष्ठ रेशा-बारीकी गुणवत्ता बताया गया है — अधिकांश अन्य किस्मों से एक वास्तविक गुणवत्ता बढ़त।

जेआरसी-321 किन राज्यों में उगाई जा सकती है?

स्रोत सामग्री इसे उत्तर बंगाल, पश्चिम बंगाल, असम व बिहार की निचली, बाढ़-प्रवण भूमि के लिए उपयुक्त बताती है — इस रिकॉर्ड के states फ़ील्ड में अब पश्चिम बंगाल, असम व बिहार दर्ज हैं (उत्तर बंगाल को पश्चिम बंगाल में समाहित रखा गया है)।

जेआरसी-321 विशेष रूप से बाढ़-प्रवण भूमि के लिए अच्छी क्यों है?

सफ़ेद जूट किस्में सामान्यतः तोसा जूट से बेहतर जलभराव सहन करती हैं, और जेआरसी-321 को विशेष रूप से निचली, बाढ़-प्रवण पट्टियों के लिए अनुशंसित किया जाता है — यह इस रिकॉर्ड की मौजूदा diseaseResistance फ़्रेमिंग के अनुरूप है।

जेआरसी-321 कब बोई जानी चाहिए?

फरवरी के अंत से मार्च के अंत तक, इस रिकॉर्ड की मौजूदा फ़्रेमिंग के अनुसार — एक अगेती बुवाई विंडो, जो उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है जहाँ मानसून के साथ बाढ़ आती है।