Khasi Mandarin
खासी व जयंतिया पहाड़ियों की जीआई-टैग वाली मैंडरिन — उन पहाड़ी सीढ़ीदार खेतों में उगाई जाती है जहाँ न नागपुर और न कूर्ग मैंडरिन स्थानीय फसल है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- संतरा
- प्रकार
- रोपण सामग्री
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- ग्राफ़्टेड या पौध में साल 4–5 से फल
- अपेक्षित उपज
- 60–90 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- कोई औपचारिक प्रजनन-रिलीज़ नहीं मिली — पूर्वोत्तर भारत की लंबे समय से स्थापित देशी किस्म; 2014 में जीआई-टैग प्राप्त।
इस किस्म के बारे में
खासी मैंडरिन (Citrus reticulata), जिसे स्थानीय रूप से सोह न्यामत्रा या सोह मिंत्रा कहा जाता है, पूर्वोत्तर भारत की सबसे व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण साइट्रस किस्म है, जो मेघालय, असम व सटे पहाड़ी राज्यों में उगाई जाती है — एक सीधे फ़ेच किए गए डिजिटल जीआई फ़ीचर के अनुसार, मेघालय के अपने पूर्वी व पश्चिमी खासी हिल्स ज़िले ही क्षेत्र के मैंडरिन-खेती क्षेत्रफल का लगभग 60% और उत्पादन का 67% से ज़्यादा हिस्सा रखते हैं। इसे 2014 में जीआई टैग मिला (उसी स्रोत के अनुसार), और तब से इसे 'संतरों का राजा' के रूप में बेचा जाता है, तथा परंपरागत रूप से नवंबर–फ़रवरी में तोड़ा जाता है, जब सितंबर से गिरते तापमान के साथ फल हरे से चमकीले नारंगी रंग में बदलता है। मेघालय की फ़सल में अच्छी तरह दस्तावेज़ीकृत गिरावट आई है, जिसकी बड़ी वजह सिट्रस ट्रिस्टेज़ा वायरस (CTV) है: 2015 में छह पूर्वोत्तर राज्यों में 300 खासी मैंडरिन पेड़ों के सर्वे पर आधारित एक सीधे फ़ेच किया गया PMC अध्ययन DAS-ELISA जाँच से 57.33% कुल CTV प्रकोप बताता है, जो मेघालय में विशेष रूप से 60% (चेरापूंजी में 66.66%, बारापानी में 60%, उमस्निंग में 55%) तक पहुँचता है और पेड़ों की उम्र के साथ तेज़ी से बढ़ता है — 15 साल से पुराने बाग़ों में 76.4% प्रकोप। वही अध्ययन बताता है कि ह्वांगलोंगबिंग (सिट्रस ग्रीनिंग) भी क्षेत्र में सिट्रस-डिक्लाइन के साथ अलग से दस्तावेज़ीकृत है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
ग्राफ़्टेड या पौध में साल 4–5 से फल
अपेक्षित उपज
60–90 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- विशिष्ट शर्करा-अम्ल स्वाद संतुलन और अच्छी शेल्फ़-लाइफ़ इसे सिर्फ़ मेघालय ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में सबसे व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण साइट्रस किस्म बनाती है — एक सीधे फ़ेच किए गए डिजिटल जीआई फ़ीचर के अनुसार।
- 2014 से जीआई-टैग प्राप्त, जो खासी व जयंतिया पहाड़ियों के किसानों को एक संरक्षित क्षेत्रीय पहचान देता है, जिसे 'संतरों का राजा' के रूप में बेचा जाता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- इस रिकॉर्ड का अपना diseaseResistance फ़ील्ड ('सिट्रस ग्रीनिंग के प्रति संवेदनशील — यहाँ भी नर्सरी-गुणवत्ता की वही सावधानी लागू') सीधे मापे गए आँकड़ों से मज़बूती से पुष्ट होता है: 2015 के छह-राज्य PMC सर्वे में मेघालय के अपने खासी मैंडरिन पेड़ों में 57–60%+ CTV प्रकोप मिला, जो बाग़ की उम्र के साथ तेज़ी से बढ़ता है — यह एक सक्रिय, अच्छी तरह दस्तावेज़ीकृत गिरावट है, कोई सैद्धांतिक जोखिम नहीं।
- क्षेत्र के साहित्य में CTV व ह्वांगलोंगबिंग दोनों को गिरावट के सह-कारण बताया गया है — रोपण सामग्री ख़रीदते समय दोनों को, सिर्फ़ ग्रीनिंग को नहीं, सक्रिय जोखिम मानें।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- मेघालय
- असम
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
फ़िलहाल खासी मैंडरिन पर रोग-दबाव कितना गंभीर है?
गंभीर और सीधे मापा गया। छह पूर्वोत्तर राज्यों में 300 खासी मैंडरिन पेड़ों के 2015 सर्वे (एक सीधे फ़ेच किया गया PMC शोधपत्र) में कुल 57.33% सिट्रस ट्रिस्टेज़ा वायरस प्रकोप मिला, जो मेघालय में विशेष रूप से 60% और 15 साल से पुराने बाग़ों में 76% से ज़्यादा तक पहुँचता है — यह इस रिकॉर्ड की अपनी 'सिट्रस ग्रीनिंग के प्रति संवेदनशील' सावधानी से मेल खाता है, और पेड़ों की उम्र के साथ और बिगड़ता है।
'सोह न्यामत्रा' और 'संतरों का राजा' का क्या मतलब है?
सोह न्यामत्रा (सोह मिंत्रा भी लिखा जाता है) फल का खासी-भाषा नाम है; 'संतरों का राजा' 2014 के जीआई टैग के बाद से इस्तेमाल होने वाला मार्केटिंग नाम है, जो पूर्वोत्तर की सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक साइट्रस किस्म के रूप में इसकी स्थिति दर्शाता है — अकेले पूर्वी व पश्चिमी खासी हिल्स ज़िले क्षेत्र के मैंडरिन-खेती क्षेत्रफल का लगभग 60% रखते हैं।
स्रोत: High incidence of citrus tristeza virus in mandarin (Citrus reticulata) in North-East states of India — PMC, Khasi Mandarin — Digital GI. संपादकीय नीति.
