Nagpur Mandarin (Nagpur Santra)
ग्राफ़्टेड पौध, असली बीज नहीं। जीआई-टैग वाली मैंडरिन, जिसकी वजह से नागपुर हर मंडी में जाना जाता है — केवल प्रमाणित, ग्रीनिंग-जाँची नर्सरी से ही ख़रीदें।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- संतरा
- प्रकार
- रोपण सामग्री
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- ग्राफ़्टेड पौधे में साल 4–5 से फल
- अपेक्षित उपज
- 100–150 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- विदर्भ क्षेत्र में लंबे समय से उगाई जाने वाली चयनित किस्म, कोई औपचारिक रूप से पैदा की गई आईसीएआर/विश्वविद्यालय रिलीज़ नहीं; 1 सितंबर 2014 को जीआई-टैग मिला (एक खोज-परिणाम-मात्र आँकड़ा जीआई प्रमाणपत्र संख्या 315 बताता है, जो स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है)।
इस किस्म के बारे में
नागपुर मैंडरिन (Citrus reticulata Blanco), जिसे स्थानीय रूप से संतरा कहा जाता है, महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र और सटे मध्य प्रदेश में एक सदी से भी ज़्यादा समय से व्यावसायिक रूप से उगाई जा रही है — इसी वजह से नागपुर शहर को भारत का 'ऑरेंज सिटी' कहा जाता है। एक सीधे फ़ेच किए गए डाउन टू अर्थ लेख के अनुसार, जीआई टैग 1 सितंबर 2014 को दिया गया, जो एक अनोखे अम्ल-शर्करा मिश्रण से बने विशिष्ट मीठे-खट्टे स्वाद को मान्यता देता है — दुनिया की किसी और मैंडरिन में यह मेल नहीं मिलता — साथ ही फल के आकार, रंग, बीज-संख्या व रस-रसायन के लिए पंजीकृत मानक भी तय करता है (एक खोज-परिणाम-मात्र आँकड़ा प्रमाणपत्र संख्या 315 बताता है, जो किसी सीधे फ़ेच किए प्राथमिक स्रोत से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है)। एक सीधे फ़ेच किए गए विकिपीडिया लेख के अनुसार, पेड़ साल में दो अतिव्यापी फ़सलें देता है: सितंबर-दिसंबर वाली अंबिया फ़सल, जो अब भी थोड़ी खट्टी होती है, और जनवरी से शुरू होने वाली मृग फ़सल, जो ज़्यादा मीठी व पूरी तरह पकी होती है। इस किस्म की देखभाल भाकृअनुप-केंद्रीय साइट्रस अनुसंधान संस्थान (सीसीआरआई), नागपुर करता है — जिसकी स्थापना 1985 में केंद्रीय साइट्रस अनुसंधान स्टेशन के रूप में हुई, 1986 में इसे राष्ट्रीय साइट्रस अनुसंधान केंद्र का दर्जा मिला और अक्तूबर 2014 में पूर्ण संस्थान का दर्जा — यह जानकारी संस्थान पर एक सीधे फ़ेच किए गए विकिपीडिया लेख से मिलती है — यह साइट्रस अनुसंधान के लिए भारत की राष्ट्रीय नोडल संस्था है, जिसमें ग्रीनिंग (ह्वांगलोंगबिंग) प्रबंधन भी शामिल है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
ग्राफ़्टेड पौधे में साल 4–5 से फल
अपेक्षित उपज
100–150 क्विंटल/हेक्टेयर, पूर्ण फलन पर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- एक अनोखा, राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अम्ल-शर्करा स्वाद संतुलन (2014 के जीआई टैग का आधार), साथ ही सालाना दो-फ़सल चक्र (अंबिया व मृग) जो ज़्यादातर अन्य भारतीय मैंडरिन में नहीं मिलता।
- एक समर्पित राष्ट्रीय संस्थान — भाकृअनुप-सीसीआरआई, नागपुर — का समर्थन प्राप्त है, जिसका दायरा ख़ास तौर पर नागपुर मैंडरिन की खेती-विज्ञान, किस्म-विकास व रोग-प्रबंधन (सिट्रस ग्रीनिंग सहित) तक फैला है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- जीआई सुरक्षा एक बार में 10 साल के लिए मिलती है (नवीकरण योग्य) और प्रमाणित लोगो के क़ानूनी इस्तेमाल के लिए हर किसान का अलग पंजीकरण ज़रूरी है — रिपोर्ट के अनुसार लगभग ₹1,500 प्रति किसान, जिसका कुछ हिस्सा सरकार साझा करती है — यह हर विदर्भ संतरा किसान के लिए स्वतः लागू नहीं होता, एक सीधे फ़ेच किए गए डाउन टू अर्थ लेख के अनुसार।
- सिट्रस ग्रीनिंग (ह्वांगलोंगबिंग) महाराष्ट्र की मैंडरिन पट्टी में अब भी एक सक्रिय, दस्तावेज़ीकृत ख़तरा है — इस रिकॉर्ड का अपना diseaseResistance फ़ील्ड पहले से यह इशारा करता है; ग्राफ़्टेड पौध केवल प्रमाणित, ग्रीनिंग-जाँची नर्सरी से ही ख़रीदें।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- महाराष्ट्र
- मध्य प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नागपुर मैंडरिन पर जीआई टैग असल में क्या सुरक्षित करता है?
यह 'नागपुर ऑरेंज' नाम को विदर्भ क्षेत्र से आने वाली, पंजीकृत मानकों को पूरा करने वाली उपज के लिए सुरक्षित करता है — फल का आकार, रंग, बीज-संख्या और एक विशिष्ट अम्ल-शर्करा रस-रसायन — 1 सितंबर 2014 से, हर 10 साल में नवीकरण योग्य, जिसमें प्रमाणित किसान अलग पंजीकरण के बाद आधिकारिक लोगो इस्तेमाल कर सकते हैं।
नागपुर मैंडरिन साल में दो बार क्यों तोड़ी जाती है?
पेड़ मानसून के आसपास फूलता है और दो अतिव्यापी फ़सलें देता है: सितंबर-दिसंबर वाली अंबिया फ़सल, जो अब भी थोड़ी खट्टी होती है, और जनवरी से शुरू होने वाली मृग फ़सल, जो ज़्यादा मीठी व पूरी तरह पकी होती है — इस किस्म से जुड़ा एक दस्तावेज़ीकृत दो-फ़सल पैटर्न।
स्रोत: Nagpur orange — Wikipedia, GI tag for Nagpur orange to benefit both farmers and consumers — Down To Earth, Central Citrus Research Institute, Nagpur — Wikipedia. संपादकीय नीति.
