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परवलसभी सीज़नबेल/जड़ कलमअंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Rajendra Parwal-1

एक खेती-मार्गदर्शिका में आशाजनक परवल किस्मों के बीच राजेंद्र परवल-1 के नाम से दर्ज; नाम राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा की ओर इशारा करता है। हमें इसकी जारी करने की सूचना, परीक्षण या उपज का आँकड़ा नहीं मिला।

सीज़नसभी सीज़न
फल कब सेइस किस्म के लिए प्रकाशित नहीं; स्वर्ण किस्मों के ICAR उदाहरण: अक्टूबर की रोपाई के 4–6 महीने बाद पहली तुड़ाई
अपेक्षित उपजकिस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं; तुलना के लिए ICAR स्वर्ण किस्मों का 25–30 टन/हेक्टेयर देता है
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
परवल
प्रकार
बेल/जड़ कलम
सीज़न
सभी सीज़न
फल कब से
इस किस्म के लिए प्रकाशित नहीं; स्वर्ण किस्मों के ICAR उदाहरण: अक्टूबर की रोपाई के 4–6 महीने बाद पहली तुड़ाई
बीज दर
बेल की कलमें, दस मादा पौधों पर एक नर पौधे के साथ (भुवनेश्वर परीक्षण में 10:1 अनुपात रखा गया)
अपेक्षित उपज
किस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं; तुलना के लिए ICAR स्वर्ण किस्मों का 25–30 टन/हेक्टेयर देता है
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
किस्म का अलग रोग रिकॉर्ड नहीं मिला
जारी
नाम राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय) की ओर इशारा करता है; जारी करने की सूचना या साल नहीं मिला

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

राजेंद्र परवल-1 खेती-मार्गदर्शिकाओं में दर्ज परवल की किस्म है, जहाँ यह आशाजनक किस्मों में स्वर्ण अलौकिक, स्वर्ण रेखा, फ़ैज़ाबाद परवल की पंक्तियों और चेस संकरों के साथ आती है। नाम बिहार के पूसा के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, की ओर इशारा करता है। पर हमें जारी करने की सूचना, साल, फल का विवरण, परीक्षण या उपज का आँकड़ा नहीं मिला। राजेंद्र परवल नाम का एक नमूना उन 22 किस्मों और स्थानीय प्रकारों में था जिन्हें ICAR-IIHR के भुवनेश्वर केंद्र ने 2008-10 में उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा से जुटाकर 2 x 1 मी पर लगाया। सारे परवल की तरह यह फसल बेल की कलम से उगती है और हर दस मादा पौधों पर एक नर पौधा चाहिए।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

राजेंद्र परवल-1 तभी चुनिए जब आपकी स्थानीय नर्सरी में यही मिलती हो और आप इसकी मातृ बेलों पर फल देख सकें। खेती की एक स्लाइड-सामग्री इसे आशाजनक परवल किस्मों में स्वर्ण अलौकिक, स्वर्ण रेखा और फ़ैज़ाबाद परवल की पंक्तियों के साथ गिनाती है। नाम पूसा के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, की ओर इशारा करता है। हमें जारी करने की सूचना, साल, परीक्षण या उपज का आँकड़ा नहीं मिला। राजेंद्र परवल नाम का एक नमूना 2008-10 के भुवनेश्वर परीक्षण के 22 नमूनों में था। पर शोध-पत्र सबसे ज़्यादा उपज वाली किस्म स्वर्ण अलौकिक को बताता है, 10.21 किग्रा प्रति पौधा, और राजेंद्र परवल को अलग से नहीं गिनता। अगर आप इसे लगाएँ तो अलौकिक के बग़ल में परीक्षण खंड रखिए और दोनों को तौलिए।

बुवाई और खेती

  • बीज दरबेल की कलमें, दस मादा पौधों पर एक नर पौधे के साथ (भुवनेश्वर परीक्षण में 10:1 अनुपात रखा गया)
  • दूरीभुवनेश्वर परीक्षण में 2 x 1 मी; ICAR के पुरी उदाहरण में मचान के नीचे 1.5 x 1.5 मी

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • बिहार में स्थानीय रूप से मिलती है, इसलिए कलमें आपके पास आसानी से मिल सकती हैं।
  • उसी बेल की कलम से उगती है और बेहतर दर्ज की गई स्वर्ण किस्मों की तरह ही सँभाली जाती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • जारी करने की सूचना, उपज का आँकड़ा, रोग का रिकॉर्ड या फल का विवरण नहीं मिला; विक्रेता जो भी आँकड़ा बताए वह बिना स्रोत का है।
  • द्विलिंगी: इसे 10 मादा पौधों पर 1 नर पौधे के अनुपात में नर पौधे चाहिए, और कलम का लिंग फूल आने से पहले पहचाना नहीं जा सकता।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • बिहार

किस्म-सूची पढ़ना: क्या पता है और क्या नहीं

जो पता है वह यह है: नाम खेती-मार्गदर्शिकाओं में आशाजनक किस्म के रूप में आता है। राजेंद्र परवल नाम का एक पौधा भुवनेश्वर परीक्षण (2008-10) के 22 में से एक था। उसमें 2 x 1 मी पर मादा और नर पौधों का 10:1 अनुपात रखा गया था। उस परीक्षण में उपज 2.48 से 10.21 किग्रा प्रति पौधा, फल प्रति पौधा 79.86 से 502 और फल का वज़न 14.31 से 37.98 ग्राम रहा, और स्वर्ण अलौकिक सबसे ऊपर थी। राजेंद्र परवल इन दायरों के भीतर कहीं बैठती है, पर छपी तालिका इतनी बिगड़ी हुई है कि हम उसकी पंक्ति भरोसे से नहीं पढ़ सके।

जो पता नहीं: इसे किसने और कब जारी किया, फल का रंग और आकार, पहली तुड़ाई तक के दिन, प्रति हेक्टेयर उपज, और रोग का कोई स्कोर। जब कोई विक्रेता इसके आँकड़े बताए तो स्रोत पूछिए। मातृ खेत माँगना अच्छी कसौटी है: बेल पर फल गिनिए, दस फल तौलिए और उसी मौसम की किसी स्वर्ण बेल से मिलाइए। खेत में दस मिनट आपको किसी पर्चे से ज़्यादा बताएँगे।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह बीज से नहीं, कलम से तैयार होती है, इसलिए रोपाई सामग्री आप ख़ुद ले सकते हैं। कलम सिर्फ़ स्वस्थ, अच्छी बढ़त वाले और सही किस्म के पौधों से लीजिए, रोगी पौधे से कभी नहीं — कलम अपने मातृ पौधे को साथ ले जाती है। नर्सरी या सरकारी फ़ार्म से साफ़ रोपाई सामग्री मिल जाए, तो शुरुआत वहीं से सुरक्षित है।

दूसरी किस्मों से तुलना

परवल की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Faizabad Parwal-1पूर्वी उत्तर प्रदेश के वे किसान जिनकी स्थानीय नर्सरी में यह मिलती है; किसी नई किस्म से तुलना करेंइस किस्म के लिए प्रकाशित नहीं; स्वर्ण किस्मों के ICAR उदाहरण: अक्टूबर की रोपाई के 4–6 महीने बाद पहली तुड़ाईकिस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं; तुलना के लिए ICAR-IIVR अपनी काशी किस्मों का 230 क्विंटल/हेक्टेयर देता हैउत्तर प्रदेश
Faizabad Parwal-4उत्तर प्रदेश के वे किसान जिनकी नर्सरी में यह मिलती है; बड़ा खंड लगाने से पहले परखेंइस किस्म के लिए प्रकाशित नहीं; स्वर्ण किस्मों के ICAR उदाहरण: अक्टूबर की रोपाई के 4–6 महीने बाद पहली तुड़ाईकिस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं; तुलना के लिए ICAR-IIVR अपनी काशी किस्मों का 230 क्विंटल/हेक्टेयर देता हैउत्तर प्रदेश
Rajendra Parwal-1यही पेजबिहार के वे किसान जिनकी स्थानीय नर्सरी में यह मिलती है और जो मातृ बेलों पर फल देख सकते हैंइस किस्म के लिए प्रकाशित नहीं; स्वर्ण किस्मों के ICAR उदाहरण: अक्टूबर की रोपाई के 4–6 महीने बाद पहली तुड़ाईकिस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं; तुलना के लिए ICAR स्वर्ण किस्मों का 25–30 टन/हेक्टेयर देता हैबिहार
Rajendra Parwal-2बिहार के वे किसान जो फल लगी बेलें परख सकें; इसकी तुलना स्वर्ण खंड से कीजिएइस किस्म के लिए प्रकाशित नहीं; स्वर्ण किस्मों के ICAR उदाहरण: अक्टूबर की रोपाई के 4–6 महीने बाद पहली तुड़ाईकिस्म का कोई आँकड़ा प्रकाशित नहीं; तुलना के लिए ICAR स्वर्ण किस्मों का 25–30 टन/हेक्टेयर देता हैबिहार
Swarna Alaukikनरम बीज वाला सब्ज़ी और मिठाई वाला फल; पूर्वी पठार और ओडिशा का तटअक्टूबर की रोपाई के लगभग 4–6 महीने बाद पहली तुड़ाई; फल फ़रवरी से अक्टूबर तक (ICAR के उदाहरण)स्वर्ण किस्मों का औसत 25–30 टन/हेक्टेयर (ICAR); पुरी, ओडिशा में 2020 में एक एकड़ से 107 क्विंटलझारखंड, ओडिशा, बिहार
Swarna Rekhaवे ख़रीदार जिन्हें धारीदार फल चाहिए; पूर्वी पठार और ओडिशाअक्टूबर की रोपाई के लगभग 4–6 महीने बाद पहली तुड़ाई; फल फ़रवरी से अक्टूबर तक (ICAR के उदाहरण)46 जीनप्रारूपों के राँची परीक्षण (2021-23) में रेखा और सुरुचि का साझा औसत 21.10 टन/हेक्टेयर; ICAR तीनों स्वर्ण किस्मों के लिए 25–30 टन/हेक्टेयर बताता हैझारखंड, ओडिशा, बिहार
Swarna Suruchiराँची केंद्र का सादा हल्का हरा फल; पहले परीक्षण खंड माँगिएअक्टूबर की रोपाई के लगभग 4–6 महीने बाद पहली तुड़ाई; फल फ़रवरी से अक्टूबर तक (ICAR के उदाहरण)46 जीनप्रारूपों के राँची परीक्षण (2021-23) में सुरुचि और रेखा का साझा औसत 21.10 टन/हेक्टेयर; ICAR तीनों स्वर्ण किस्मों के लिए 25–30 टन/हेक्टेयर बताता हैझारखंड, ओडिशा, बिहार

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और परवल का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

परवल के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजेंद्र परवल-1 किसने विकसित की और कब जारी हुई?

हमें जारी करने की सूचना, विकसित करने वाला या साल नहीं मिला। नाम बिहार के पूसा के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय की ओर इशारा करता है, जो अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय है। एक खेती-स्लाइड सामग्री इस किस्म को आशाजनक परवल में गिनाती है। यह नाम का सुराग है, रिकॉर्ड नहीं। नर्सरी से पूछिए कि उसके मातृ पौधे किसने दिए। विश्वविद्यालय के बागवानी विभाग से पूछिए कि किस्म कभी औपचारिक रूप से जारी हुई या नहीं और प्रमाणित कलमें कहाँ रखी जाती हैं।

राजेंद्र परवल-1 से कितनी उपज की योजना बनाऊँ?

इस किस्म की कोई प्रकाशित उपज नहीं है। तुलना के लिए, ICAR स्वर्ण किस्मों के लिए 25 से 30 टन/हेक्टेयर बताता है। ICAR-IIVR कहता है कि उसकी काशी परवल किस्मों की औसत उपज 230 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, यानी 23 टन/हेक्टेयर। पुरी के एक किसान ने स्वर्ण अलौकिक के एक एकड़ से 107 क्विंटल दर्ज किए। राँची के पहले साल के मातृ खंड ने एक हेक्टेयर से 18 टन दिए। अपनी तुड़ाई के रिकॉर्ड कुछ और न कहें तब तक निचले छोर, 18 टन/हेक्टेयर, से योजना बनाइए।

राजेंद्र परवल-1 चुनूँ या स्वर्ण अलौकिक?

अगर आपकी प्राथमिकता प्रमाण है, तो स्वर्ण अलौकिक। भुवनेश्वर के 22 नमूनों में यह सबसे ज़्यादा उपज वाली थी (10.21 किग्रा प्रति पौधा)। राँची के 46 जीनप्रारूपों के परीक्षण में यह आशाजनक पंक्ति रही। पुरी के एक किसान ने इसे तीन शहरी बाज़ारों में सबसे ज़्यादा पसंद की जाने वाली पाया। राजेंद्र परवल-1 के पास इनमें से कोई रिकॉर्ड नहीं। अगर आपकी नर्सरी केवल राजेंद्र परवल-1 दे सकती है, या आपके ख़रीदार इसे पहले से जानते हैं, तो लगाइए। पर तुलना के लिए अलौकिक का अलग खंड रखिए ताकि पहले मौसम के अंत में वज़न मिला सकें।

कितने नर पौधे चाहिए और कहाँ से मिलेंगे?

हर 10 मादा पौधों पर 1 नर पौधा रखिए, जैसा 2024 का राँची शोध-पत्र सलाह देता है और भुवनेश्वर परीक्षण में हुआ। पुरी के खेत की तरह लगाए एक एकड़ के लिए, यानी 1,750 पौधे, लगभग 160 नर और 1,590 मादा पौधे होते हैं। फूल आने तक नर और मादा कलमें एक-सी दिखती हैं, इसलिए लिंग का रिकॉर्ड उसी को रखना होगा जिसने इन्हें तैयार किया। नर्सरी से नर कलमें लेबल लगे अलग लॉट में माँगिए, उन्हें खंड भर में बराबर बाँटकर लगाइए और जगह दर्ज कर लीजिए, वरना पहली बार फूल आने पर खाली जगहें दिखेंगी।

स्रोत: Cultivation practices of pointed gourd — slide deck listing promising varieties (secondary source; names only), Phenotypic diversity analysis in pointed gourd — Cucurbit Genetics Cooperative Report 33-34, 2010-11 (CHES Bhubaneswar, ICAR-IIHR; includes Rajendra Parwal), Genetic diversity in pointed gourd genotypes under eastern plateau and hill region — Indian Journal of Agricultural Sciences 94(7), 2024 (ICAR-RCER, Ranchi), Shri Sachin Jha: a budding agri-entrepreneur — ICAR (ICAR-RCER, Ranchi; trellis mother block, plant prices), Shri Chandan Kumar Khuntia: a successful farmer-entrepreneur — ICAR (trellis, mulching, fruit the market rejected), ICAR-IIVR, Varanasi organizes Pointed Gourd Field Day-cum-Kisan Gosthi, 21 June 2019 — ICAR. संपादकीय नीति.