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सोयाबीनखरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

JS 20-29

जेएनकेवीवी जबलपुर की नई किस्म, जेएस 335 से असली उपज बढ़त के साथ — अब मध्य प्रदेश के ज़्यादातर इलाक़ों में इसकी जगह ले रही है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि95–100 दिन
अपेक्षित उपज20–22 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

फसल
सोयाबीन
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
95–100 दिन
अपेक्षित उपज
20–22 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
चिकनी / काली मिट्टी
जारी
जेएनकेवीवी, जबलपुर में जेएस 97-52 × जेएस 95-56 के संकरण से विकसित, भारत के मध्य क्षेत्र के लिए जारी

इस किस्म के बारे में

जेएस 20-29 जेएनकेवीवी, जबलपुर में जेएस 97-52 × जेएस 95-56 के संकरण से विकसित एक मध्यम अवधि की सोयाबीन किस्म है — जो जलभराव-सहनशील लाइन जेएस 97-52 पर आधारित है — और भारत के मध्य क्षेत्र के लिए जारी की गई है। यह जेएस 335 से असली उपज बढ़त देती है और अपने जारी होने के बाद से मध्य प्रदेश के ज़्यादातर इलाक़ों में इसकी जगह ले रही है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि95–100 दिन
    उपज क्षमता20–22 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधरतुआ व फली झुलसा की मध्यम सहनशीलता
    मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

95–100 दिन

अपेक्षित उपज

20–22 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • जलभराव-सहनशील लाइन जेएस 97-52 से विकसित, जहाँ भारी खरीफ़ बारिश के बाद पानी खड़ा होना बार-बार का जोख़िम हो वहाँ बढ़त देती है
  • जेएस 335 से असली उपज बढ़त — यही वजह है कि यह मध्य प्रदेश के ज़्यादातर इलाक़ों में उसकी जगह ले रही है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • स्रोत के अनुसार बताई गई उपज अलग-अलग है: सामान्य सीमा 20–22 क्विंटल/हेक्टेयर है, जबकि कुछ बीज-व्यापार पेज अच्छे प्रबंधन में 25–30 क्विंटल/हेक्टेयर बताते हैं

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मध्य प्रदेश में जेएस 20-29, जेएस 335 की जगह क्यों ले रही है?

यह जेएस 335 से दर्ज उपज बढ़त देती है और लगभग वैसी ही छोटी-मध्यम अवधि रखती है, इसलिए वही बुवाई कैलेंडर बेहतर रिटर्न के साथ फिट बैठता है — यही वजह है कि राज्य के ज़्यादातर हिस्सों में किसान बदलाव कर रहे हैं।

क्या जेएस 20-29 पुरानी जेएस किस्मों से जलभराव बेहतर झेलती है?

इसे जलभराव-सहनशील लाइन जेएस 97-52 को जनक बनाकर विकसित किया गया, जिसका मक़सद उन खेतों में बढ़त देना है जहाँ भारी खरीफ़ बारिश के बाद पानी खड़ा होना बार-बार की समस्या हो — यह एक दर्ज प्रजनन उद्देश्य है, हालाँकि खेत में असली प्रदर्शन जलभराव की अवधि व गहराई पर निर्भर करता है।

स्रोत: Breeding for higher yield, early maturity, wider adaptability and waterlogging tolerance in soybean — PMC, सोयाबीन JS-2029 — Cultivation Of India (Kisaanhelpline). संपादकीय नीति.