NRC 157
आईसीएआर-आईआईएसआर इंदौर की रिलीज़, विशेष रूप से देर से बुवाई (20 जुलाई तक) को कम उपज-नुक़सान के साथ सहन करने के लिए जानी जाती है। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- सोयाबीन
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- ~94 दिन
- अपेक्षित उपज
- ~16.5 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- चिकनी / काली मिट्टी
- जारी
- आईसीएआर-आईआईएसआर इंदौर (प्रजनक: डॉ. संजय गुप्ता); सितंबर 2022 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकृत
इस किस्म के बारे में
एनआरसी 157 सोयाबीन की एक किस्म है, जिसे आईसीएआर-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर), इंदौर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय गुप्ता ने विकसित किया। इसे सितंबर 2022 में मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में खेती के लिए स्वीकृति दी। इसकी सबसे खास बात देर से बुवाई सहन करने की क्षमता है — संस्थान के परीक्षणों में पाया गया कि 20 जुलाई तक बुवाई करने पर भी उपज में बहुत कम नुक़सान होता है, जिससे यह तब उपयोगी विकल्प बनती है जब मानसून के कारण सामान्य जुलाई-प्रारंभ बुवाई खिड़की निकल जाए।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
~94 दिन
अपेक्षित उपज
~16.5 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
ध्यान रखने योग्य बातें
- इस चरण में मिले सभी आँकड़े — 94 दिन की अवधि, ~16.5 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज, और ऑल्टरनेरिया लीफ़ स्पॉट, बैक्टीरियल पस्ट्यूल व टारगेट लीफ़ स्पॉट के प्रति मध्यम प्रतिरोध — इस रिकॉर्ड के मौजूदा फ़ील्ड से क़रीब से मेल खाते हैं, जो इस राउंड के लिए असामान्य रूप से स्पष्ट पुष्टि है।
- इस चरण में एनआरसी 157 की सटीक आईआईएसआर अधिसूचना/राजपत्र तिथि नहीं मिली — सितंबर 2022 की तारीख़ मध्य प्रदेश सरकार की स्वीकृति की रिपोर्टिंग तिथि दर्शाती है, ज़रूरी नहीं कि यही सीवीआरसी/एसवीआरसी अधिसूचना तिथि हो।
- खोज के बावजूद एनआरसी 157 के लिए कोई पेडिग्री या जनक-संकरण जानकारी नहीं मिली — इस चरण में सिर्फ़ इसकी रिलीज़ जानकारी ही दस्तावेज़ीकृत मिली।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- मध्य प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एनआरसी 157 को किसने और कहाँ विकसित किया?
आईसीएआर-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर), इंदौर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय गुप्ता ने एनआरसी 157 विकसित की।
यदि मानसून की बुवाई देर हो जाए तो एनआरसी 157 क्यों उपयोगी है?
संस्थान के परीक्षणों में पाया गया कि यह 20 जुलाई तक बुवाई सहन कर लेती है और उपज में बहुत कम नुक़सान होता है, जबकि अधिकांश सोयाबीन किस्में जुलाई की शुरुआत के बाद बुवाई होने पर काफ़ी उपज खो देती हैं।
एनआरसी 157 को मध्य प्रदेश के लिए कब स्वीकृति मिली?
मध्य प्रदेश सरकार ने सितंबर 2022 में इसे स्वीकृति दी, साथ ही दो अन्य आईसीएआर-आईआईएसआर रिलीज़ — एनआरसी 131 और एनआरसी 136 — को भी।
एनआरसी 157 किन रोगों के प्रति प्रतिरोधी है?
यह ऑल्टरनेरिया लीफ़ स्पॉट, बैक्टीरियल पस्ट्यूल और टारगेट लीफ़ स्पॉट के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है — मध्य भारत की सोयाबीन पट्टी में आम तीन पत्ती-रोग।
क्या एनआरसी 157 कम अवधि वाली या लंबी अवधि वाली सोयाबीन है?
यह कम अवधि वाली किस्म है, लगभग 94 दिन में पकती है — यह इसकी सहयोगी किस्म एनआरसी 131 (93 दिन) के क़रीब और एनआरसी 136 (105 दिन) से छोटी अवधि की है।
स्रोत: ICAR-Indian Institute of Soybean Research, Indore's NRC 157, 131, and 136 got the State Government's Recommendation — ICAR. संपादकीय नीति.
