JS 95-60
जेएस 335 से दस दिन पहले पकती है — रबी बुवाई से पहले जो अतिरिक्त हफ़्ता मिलता है, इसे चुनने की यही असली वजह है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- सोयाबीन
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 85–90 दिन
- बीज दर
- 60–80 किग्रा/हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- 20–30 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- जेएनकेवीवी, जबलपुर में लाइन पीएस 73-22 से सीधे चयन द्वारा विकसित
इस किस्म के बारे में
जेएस 95-60 जेएनकेवीवी, जबलपुर में लाइन पीएस 73-22 से सीधे चयन द्वारा विकसित एक अति-अगेती सोयाबीन किस्म है — वही मूल लाइन जिससे बाद में जेएस 93-05 चुनी गई। इसकी फलियों में चार दाने होते हैं और यह जेएस 335 से लगभग दस दिन पहले पकती है, जिससे रबी बुवाई से पहले एक अतिरिक्त हफ़्ता मिलता है — यही मुख्य वजह है कि किसान इसे पुरानी किस्म पर चुनते हैं, ख़ासकर कम वर्षा व ऊँचाई वाले इलाक़ों में। उपज क्षमता: लगभग 20–30 क्विंटल/हेक्टेयर उपयुक्त बढ़वार परिस्थितियों में — फ्रंट-लाइन प्रदर्शनों में 31.25 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज दर्ज हुई है — हालाँकि वास्तविक उपज स्थान, मिट्टी, वर्षा, फ़सल प्रबंधन व सीज़न के अनुसार बदलती है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बीज दर60–80 किग्रा/हेक्टेयर
- दूरी30 सेमी क़तार दूरी
उपज व अवधि
पकने की अवधि
85–90 दिन
अपेक्षित उपज
20–30 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- पीला मोज़ेक विषाणु के प्रति संवेदनशील
- तना मक्खी के प्रति संवेदनशील
प्रबंधन सुझाव
- बीज उपचार करें और मौसम भर पीला मोज़ेक विषाणु व तना मक्खी पर नज़र रखें — इस किस्म में इनके प्रति कोई अंतर्निहित प्रतिरोध नहीं है
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- फलियों में चार दाने — अन्य जेएस-श्रृंखला किस्मों में आम तीन-दाने वाली फली से अलग
- जेएस 335 से लगभग दस दिन पहले पकती है, जहाँ रबी बुवाई से पहले समय कम हो वहाँ खेत जल्दी ख़ाली करती है
- फली चटकने की समस्या नहीं — उसी किस्म विवरण के अनुसार जो इसकी बीज दर व दूरी बताता है
ध्यान रखने योग्य बातें
- पीला मोज़ेक विषाणु या तना मक्खी के प्रति कोई अंतर्निहित प्रतिरोध नहीं — किसी भी संवेदनशील किस्म की तरह बीज उपचार व खेत की निगरानी ज़रूरी
- बीज-व्यापार विवरण के अनुसार कम वर्षा व ऊँचाई वाले इलाक़ों की काली दोमट मिट्टी के लिए सबसे उपयुक्त
- 20–30 क्विंटल/हेक्टेयर की उपज क्षमता किसान-खेत व फ्रंट-लाइन-प्रदर्शन परीक्षणों को दर्शाती है, जिसमें अधिकतम 31.25 क्विंटल/हेक्टेयर दर्ज हुई — किसी विशेष खेत पर वास्तविक उपज मिट्टी की उर्वरता, वर्षा व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है, इसलिए इसे गारंटी नहीं, प्राप्त करने योग्य दायरा मानें
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- मध्य प्रदेश
- महाराष्ट्र
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जेएस 95-60, जेएस 335 से कैसे अलग है?
यह लगभग दस दिन पहले पकती है और अलग मूल लाइन से आती है (पीएस 73-22 से चयन, जबकि जेएस 335 जेएस 78-77 × जेएस 71-05 के संकरण से है) — जल्दी कटाई ही मुख्य वजह है कि किसान इसे चुनते हैं, ख़ासकर जब रबी बुवाई का समय कम हो।
क्या जेएस 95-60 में कोई रोग-प्रतिरोध है?
कोई पुष्ट अंतर्निहित प्रतिरोध नहीं — किस्म विवरण के अनुसार यह पीला मोज़ेक विषाणु व तना मक्खी के प्रति संवेदनशील है, इसलिए किसी प्रतिरोधी किस्म के मुक़ाबले यहाँ बीज उपचार व निगरानी ज़्यादा मायने रखती है।
स्रोत: सोयाबीन की उन्नत किस्म JS 95-60 — Kisaanhelpline, JS 9560 Soybean Variety — SKB Seeds, Molecular characterization and genetic diversity studies of Indian soybean cultivars using SSR markers — PMC, New Soyabean Variety is Creating Social Changes — ICAR. संपादकीय नीति.
