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सोयाबीनखरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 13 अगस्त 2026

JS 95-60

जेएस 335 से दस दिन पहले पकती है — रबी बुवाई से पहले जो अतिरिक्त हफ़्ता मिलता है, इसे चुनने की यही असली वजह है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि85–90 दिन
अपेक्षित उपज20–30 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
सोयाबीन
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
85–90 दिन
बीज दर
60–80 किग्रा/हेक्टेयर
अपेक्षित उपज
20–30 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
जेएनकेवीवी, जबलपुर में लाइन पीएस 73-22 से सीधे चयन द्वारा विकसित

इस किस्म के बारे में

जेएस 95-60 जेएनकेवीवी, जबलपुर में लाइन पीएस 73-22 से सीधे चयन द्वारा विकसित एक अति-अगेती सोयाबीन किस्म है — वही मूल लाइन जिससे बाद में जेएस 93-05 चुनी गई। इसकी फलियों में चार दाने होते हैं और यह जेएस 335 से लगभग दस दिन पहले पकती है, जिससे रबी बुवाई से पहले एक अतिरिक्त हफ़्ता मिलता है — यही मुख्य वजह है कि किसान इसे पुरानी किस्म पर चुनते हैं, ख़ासकर कम वर्षा व ऊँचाई वाले इलाक़ों में। उपज क्षमता: लगभग 20–30 क्विंटल/हेक्टेयर उपयुक्त बढ़वार परिस्थितियों में — फ्रंट-लाइन प्रदर्शनों में 31.25 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज दर्ज हुई है — हालाँकि वास्तविक उपज स्थान, मिट्टी, वर्षा, फ़सल प्रबंधन व सीज़न के अनुसार बदलती है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि85–90 दिन
    उपज क्षमता20–30 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधमध्यम — रतुआ व फली झुलसा
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बीज दर60–80 किग्रा/हेक्टेयर
  • दूरी30 सेमी क़तार दूरी

उपज व अवधि

पकने की अवधि

85–90 दिन

अपेक्षित उपज

20–30 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

प्रबंधन सुझाव

  • बीज उपचार करें और मौसम भर पीला मोज़ेक विषाणु व तना मक्खी पर नज़र रखें — इस किस्म में इनके प्रति कोई अंतर्निहित प्रतिरोध नहीं है

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • फलियों में चार दाने — अन्य जेएस-श्रृंखला किस्मों में आम तीन-दाने वाली फली से अलग
  • जेएस 335 से लगभग दस दिन पहले पकती है, जहाँ रबी बुवाई से पहले समय कम हो वहाँ खेत जल्दी ख़ाली करती है
  • फली चटकने की समस्या नहीं — उसी किस्म विवरण के अनुसार जो इसकी बीज दर व दूरी बताता है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पीला मोज़ेक विषाणु या तना मक्खी के प्रति कोई अंतर्निहित प्रतिरोध नहीं — किसी भी संवेदनशील किस्म की तरह बीज उपचार व खेत की निगरानी ज़रूरी
  • बीज-व्यापार विवरण के अनुसार कम वर्षा व ऊँचाई वाले इलाक़ों की काली दोमट मिट्टी के लिए सबसे उपयुक्त
  • 20–30 क्विंटल/हेक्टेयर की उपज क्षमता किसान-खेत व फ्रंट-लाइन-प्रदर्शन परीक्षणों को दर्शाती है, जिसमें अधिकतम 31.25 क्विंटल/हेक्टेयर दर्ज हुई — किसी विशेष खेत पर वास्तविक उपज मिट्टी की उर्वरता, वर्षा व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है, इसलिए इसे गारंटी नहीं, प्राप्त करने योग्य दायरा मानें

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जेएस 95-60, जेएस 335 से कैसे अलग है?

यह लगभग दस दिन पहले पकती है और अलग मूल लाइन से आती है (पीएस 73-22 से चयन, जबकि जेएस 335 जेएस 78-77 × जेएस 71-05 के संकरण से है) — जल्दी कटाई ही मुख्य वजह है कि किसान इसे चुनते हैं, ख़ासकर जब रबी बुवाई का समय कम हो।

क्या जेएस 95-60 में कोई रोग-प्रतिरोध है?

कोई पुष्ट अंतर्निहित प्रतिरोध नहीं — किस्म विवरण के अनुसार यह पीला मोज़ेक विषाणु व तना मक्खी के प्रति संवेदनशील है, इसलिए किसी प्रतिरोधी किस्म के मुक़ाबले यहाँ बीज उपचार व निगरानी ज़्यादा मायने रखती है।

स्रोत: सोयाबीन की उन्नत किस्म JS 95-60 — Kisaanhelpline, JS 9560 Soybean Variety — SKB Seeds, Molecular characterization and genetic diversity studies of Indian soybean cultivars using SSR markers — PMC, New Soyabean Variety is Creating Social Changes — ICAR. संपादकीय नीति.