Co 0238 (Karan-4)
तीन-आँख वाले टुकड़ों से लगाई जाती है, असली बीज से नहीं। उत्तर भारत में कभी सबसे ज़्यादा रिकवरी वाली किस्म — एक दशक बाद कुछ इलाक़ों में इसका लाल सड़न प्रतिरोध कमज़ोर पड़ा है, इसलिए मौजूदा सलाह के लिए गन्ना विकास परिषद से ज़रूर पूछें।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- गन्ना
- प्रकार
- रोपण सामग्री
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- कटाई तक 10–12 महीने
- अपेक्षित उपज
- 900–1,000 क्विंटल/हेक्टेयर, उच्च शक्कर रिकवरी
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 2009 में जारी · आईसीएआर-गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, करनाल · क्रॉस CoLk 8102 × Co 775, उत्तर-पश्चिम उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के लिए
इस किस्म के बारे में
को 0238 (जिसे करन-4 नाम से भी बेचा जाता है) आईसीएआर-गन्ना प्रजनन संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र, करनाल में क्रॉस CoLk 8102 × Co 775 से विकसित की गई और 2009 में फ़सल मानक, अधिसूचना व किस्म जारी करने की केंद्रीय उप-समिति द्वारा जारी की गई — एक सीधे फ़ेच किए गए आईसीएआर पेज से यह जनकता व रिलीज़ इतिहास पुष्ट होता है। सात स्थानों (2006–08) पर हुए एआईसीआरपी परीक्षणों में इसने पुरानी उत्तर-पश्चिम क्षेत्र चेक किस्म CoJ 64 से गन्ना उपज में लगभग 20% व शक्कर उपज में क़रीब 16% ज़्यादा प्रदर्शन किया, और आगे चलकर उप-उष्णकटिबंधीय पट्टी पर छा गई: 2015–16 तक यह उत्तर भारत के लगभग पाँचवें हिस्से गन्ना क्षेत्र को कवर करती थी, और उत्तर प्रदेश की एक चीनी मिल ने दिसंबर 2015 में 12.1% शक्कर रिकवरी दर्ज की, जिसे उस समय उप-उष्णकटिबंधीय भारत में अब तक की सबसे ज़्यादा बताया गया। यह A1-ग्रेड, हल्के पीले रंग का गुड़ भी देती है, जिसकी वजह से यह गुड़-उत्पादक ज़िलों के साथ-साथ चीनी मिल क्षेत्रों में भी फैली। यह दबदबा एक क़ीमत पर आया: एक दशक के भीतर पश्चिमी व मध्य उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्सों में इसका लाल सड़न प्रतिरोध टूट गया — इस रिकॉर्ड के अपने diseaseResistance व note फ़ील्ड पहले से ही इस टूटन को इंगित करते हैं, और एक सीधे फ़ेच किए गए व्यापार रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल के मौसमों में लाल-सड़न-प्रभावित क्षेत्र के लिए विकल्प किस्मों की औपचारिक सिफ़ारिश हेतु समीक्षा बुलाई। 2021 के एक शुगर टेक शोधपत्र (इस चरण में केवल शीर्षक से — इसका सार पेवॉल के पीछे है, स्वतंत्र रूप से नहीं पढ़ा गया) के अनुसार यह टूटन CF13 नाम के नए पैथोटाइप से हुई और इसे "वर्टिफ़ोलिया प्रभाव" बताया गया — पादप-रोगविज्ञान का जाना-पहचाना पैटर्न, जहाँ एकल-जीन-प्रतिरोधी किस्म का व्यापक, लगभग-एकल-किस्म रोपण ही वह चयन दबाव बनाता है जो मेल खाते रोगजनक रेस को विकसित होकर प्रतिरोध पार करने देता है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
कटाई तक 10–12 महीने
अपेक्षित उपज
900–1,000 क्विंटल/हेक्टेयर, उच्च शक्कर रिकवरी
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- जारी होने के समय एआईसीआरपी परीक्षण प्रविष्टियों में गन्ना उपज में पहले स्थान पर रही, पुरानी चेक किस्म CoJ 64 से क़रीब 20% गन्ना उपज व 16% शक्कर उपज ज़्यादा — दस्तावेज़ीकृत
- A1-ग्रेड, हल्के पीले रंग की गुड़ गुणवत्ता ने इसे गुड़-उत्पादक ज़िलों के साथ-साथ चीनी मिल क्षेत्रों में भी जगह दिलाई
- अपने चरम पर रिकॉर्ड रिकवरी: दिसंबर 2015 में एक यूपी मिल की 12.1% रिकवरी को उप-उष्णकटिबंधीय भारत में अब तक की सबसे ज़्यादा बताया गया
ध्यान रखने योग्य बातें
- इस रिकॉर्ड के अपने diseaseResistance व note फ़ील्ड पहले से ही लाल सड़न की टूटन को सही ढंग से इंगित करते हैं — स्रोत-आधारित रिपोर्टिंग इसकी पुष्टि व तारीख़ देती है, यहाँ किसी बात का खंडन नहीं करती
- 2021 के एक समीक्षित शोधपत्र के शीर्षक से इसका सटीक तंत्र पता चलता है — एक नया लाल-सड़न पैथोटाइप (CF13) जिसने को 0238 का प्रतिरोध पार कर लिया — व्यापक लगभग-एकल-किस्म रोपण से बना "वर्टिफ़ोलिया प्रभाव" पैटर्न — हालाँकि इसका पूरा टेक्स्ट पेवॉल के पीछे था और इस चरण में स्वतंत्र रूप से नहीं पढ़ा गया
- टूटन के बाद भी, उत्तर प्रदेश सरकार की हाल की समीक्षा (सीधे फ़ेच की गई व्यापार रिपोर्टिंग के अनुसार) ने को 0238 को पूरी तरह बंद करने को नहीं कहा — इसने लाल-सड़न-प्रभावित इलाक़ों के किसानों के लिए नई विकल्प किस्मों की एक सूची सुझाई (CoS 19231, CoSe 17451, Co 15023, Co 0118, CoLk 14201, CoLk 15466, CoLk 16202, CoLk 16470, Cos 13235, Cos 17231, Cos 18831)
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- पंजाब
- हरियाणा
- उत्तराखंड
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत की सबसे अच्छी किस्मों में से एक होने के बावजूद को 0238 का लाल सड़न प्रतिरोध क्यों टूट गया?
इसका मूल प्रतिरोध 2009 में जारी होने के समय आम लाल सड़न रेस के विरुद्ध काम करता था। उत्तर भारत में व्यापक, लगभग-एकल-किस्म रोपण ने भारी चयन दबाव बनाया, और एक नया, ज़्यादा उग्र पैथोटाइप (पादप-रोगविज्ञान साहित्य में CF13 के रूप में दर्ज) उस प्रतिरोध को पार करने के लिए विकसित हुआ — पादप प्रजनन में एक जाना-पहचाना पैटर्न, को 0238 के प्रजनन तरीक़े की कोई ख़ास कमी नहीं।
लाल-सड़न-प्रभावित इलाक़ों में अधिकारी को 0238 की जगह किन किस्मों की सिफ़ारिश कर रहे हैं?
व्यापार प्रेस में रिपोर्ट की गई उत्तर प्रदेश सरकार की हाल की समीक्षा के अनुसार, सुझाई गई विकल्प किस्मों में CoS 19231, CoSe 17451, Co 15023 व Co 0118 शामिल हैं, साथ ही कई CoLk/Cos किस्में (CoLk 14201, CoLk 15466, CoLk 16202, CoLk 16470, Cos 13235, Cos 17231, Cos 18831) — मौजूदा सूची के लिए अपने स्थानीय गन्ना विकास परिषद से ज़रूर पूछें, क्योंकि लाल सड़न का दबाव बदलने के साथ यह सूची भी बदलती रहती है।
स्रोत: Co 0238 – The Wonder Variety of Sugarcane — ICAR, Uttar Pradesh: "Replacement of Co 0238 sugarcane variety necessary due to red rot disease and yield decline" — ChiniMandi. संपादकीय नीति.
