Modern (Morden)
भारत में हाइब्रिड बीज आम होने से पहले की सबसे पुरानी खुली-परागित सूरजमुखी किस्मों में से एक — डीआरएसएच 1 या केबीएसएच 44 से कम उपज सीमा, पर बीज बचाया जा सकता है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- सूरजमुखी
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 85–90 दिन
- अपेक्षित उपज
- 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- कनाडा के मैनिटोबा स्थित मॉर्डन रिसर्च स्टेशन से लाई गई; बेंगलुरु स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएएस) की एआईसीआरपी (सूरजमुखी) केंद्र द्वारा लगभग 1978 में खेती के लिए जारी
इस किस्म के बारे में
मॉडर्न (जिसे "मॉर्डन" भी लिखा जाता है) का नाम कनाडा के मैनिटोबा प्रांत के मॉर्डन रिसर्च स्टेशन से आया है — 1960 के दशक में निदेशक एरिक पुट के नेतृत्व में एक सूरजमुखी-प्रजनन केंद्र, जिन्हें कभी-कभी कनाडा में "सूरजमुखी फ़सल के दादा" कहा जाता है, और जिसने अगस्त 1966 में दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सूरजमुखी सम्मेलन आयोजित किया था। इस स्टेशन का नाम पाने वाली खुली-परागित सामग्री भारत लाई गई और लगभग 1978 में बेंगलुरु स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएएस) की एआईसीआरपी (सूरजमुखी) केंद्र द्वारा खेती के लिए जारी की गई — विदेशी खुली-परागित सूरजमुखी किस्मों (सोवियत-प्रजनित पेरेडोविक जैसी किस्मों के साथ) की उसी पहली लहर के हिस्से के रूप में, जिसने 1970-80 के दशक से हाइब्रिड बीज के हावी होने से पहले भारत में इस फ़सल को स्थापित किया।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
85–90 दिन
अपेक्षित उपज
12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- खुली-परागित, इसलिए किसान हर साल बीज बचाकर दोबारा बो सकते हैं — डीआरएसएच-1 या केबीएसएच-44 के विपरीत, जहाँ पर-परागण के कारण बचाया गया बीज हाइब्रिड शक्ति खो देता है
- इस रिकॉर्ड के अनुसार 85–90 दिन की छोटी अवधि, एक अलग स्रोत में बताई गई 85–95 दिन की सीमा के क़रीब — तंग बुवाई-खिड़की के लिए उपयोगी
ध्यान रखने योग्य बातें
- एक बीज-व्यापार किस्म सूची इसमें 38–40% तेल सामग्री बताती है और इसे आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश के लिए सुझाती है, जबकि इस रिकॉर्ड के मौजूदा `states` फ़ील्ड में इसकी जगह पंजाब व हरियाणा सूचीबद्ध हैं — संभवतः इसलिए क्योंकि पंजाब/हरियाणा 1970-80 के दशक की खुली-परागित लहर में मॉडर्न का मूल उत्तर-भारतीय अपनाव क्षेत्र रहा होगा, जबकि बीज-व्यापार सूची यह दर्शाती है कि आज इसके नाम से बीज कहाँ बेचा जाता है। इस शोध चरण में किसी दूसरे स्रोत से किसी भी आँकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी, इसलिए दोनों को यहाँ बताया गया है, किसी एक को अंतिम नहीं माना गया।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- पंजाब
- हरियाणा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर यह भारत की सबसे पुरानी सूरजमुखी किस्मों में से एक है, तो इसे "मॉडर्न" क्यों कहा जाता है?
"मॉडर्न" कनाडा के मैनिटोबा स्थित "मॉर्डन" शोध केंद्र के नाम का भारतीय उच्चारण लगता है, जहाँ यह खुली-परागित सामग्री मूल रूप से विकसित हुई थी — यह इस बात का दावा नहीं है कि किस्म हाल ही में विकसित हुई है।
स्रोत: Sunflower magazine — National Sunflower Association (Eric Putt, Morden Research Station history), Top 10 Famous Sunflower Varieties in India — India Inputs. संपादकीय नीति.
