DRSH 1
तिलहन अनुसंधान निदेशालय से जारी — सूरजमुखी पर-परागित फसल है, इसलिए भारत में लगभग सारी व्यावसायिक बुवाई खुली-परागित नहीं, हाइब्रिड बीज से होती है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- सूरजमुखी
- प्रकार
- हाइब्रिड
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 90–95 दिन
- अपेक्षित उपज
- 18–22 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- तिलहन अनुसंधान निदेशालय (अब आईसीएआर-आईआईओआर), हैदराबाद द्वारा 2005 में जारी; देश भर के सूरजमुखी राज्यों के लिए सुझाई गई
इस किस्म के बारे में
डीआरएसएच-1 तिलहन अनुसंधान निदेशालय (अब आईसीएआर-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान), हैदराबाद द्वारा विकसित एक एकल-संकरण (सिंगल-क्रॉस) सूरजमुखी हाइब्रिड है (एआरएम-243ए × 6डी-1), जिसे 2005 में देश भर के सूरजमुखी क्षेत्रों के लिए सिफ़ारिश के साथ जारी किया गया — इस रिकॉर्ड में सूचीबद्ध तीन राज्यों से कहीं व्यापक दायरा। उत्तरी कर्नाटक के स्वतंत्र खेत परीक्षणों में इसे तुलना में शामिल हाइब्रिड्स के बीच काफ़ी लंबा (लगभग 177.5 सेमी) दर्ज किया गया।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
90–95 दिन
अपेक्षित उपज
18–22 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- राष्ट्रीय सिफ़ारिश रखती है, कई क्षेत्रीय सूरजमुखी हाइब्रिड्स के विपरीत जो एक ही एआईसीआरपी क्षेत्र तक सीमित होते हैं
- जारी होने के दो दशक बाद भी भारतीय सूरजमुखी प्रदर्शन परीक्षणों में बेंचमार्क/चेक हाइब्रिड के रूप में उपयोग होती है — इसकी बनी रहने वाली प्रासंगिकता का संकेत
ध्यान रखने योग्य बातें
- डीआरएसएच-1 के पास कई स्रोतों के अनुसार अखिल-भारतीय सिफ़ारिश है, जो इस रिकॉर्ड के तीन-राज्य states फ़ील्ड (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र) से कहीं व्यापक है — यह तीन राज्य इसके मुख्य व्यावसायिक-अपनाव वाले राज्य लगते हैं, पूरी सिफ़ारिश का दायरा नहीं — यदि व्यापक-राज्य माँग ट्रैक की जा रही हो तो ग़ौर करने लायक़। इस शोध चरण में किसी भी स्रोत ने इसकी आल्टरनेरिया पत्ती झुलसा सहनशीलता को लेकर कुछ नहीं बताया, इसलिए इस रिकॉर्ड की मौजूदा "मध्यम" रेटिंग वैसी ही छोड़ी गई है — न पुष्टि, न खंडन।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- कर्नाटक
- आंध्र प्रदेश
- महाराष्ट्र
स्रोत: Success stories galore in media meet at NAARM, Hyderabad — ICAR. संपादकीय नीति.
