रैथा सिरी योजना
रागी, ज्वार, कंगनी, कुटकी या कोदो जैसे मिलेट उगाने पर ₹10,000 प्रति हेक्टेयर सीधी सहायता, साथ में प्रसंस्करण व ब्रांडिंग सब्सिडी।
संचालक: कृषि विभाग, कर्नाटक सरकार
- DBT दर
- ₹10,000/हेक्टेयर
- कवर फसल
- रागी, ज्वार, कंगनी, कुटकी, कोदो
- सत्यापन
- राज्य फसल सर्वे (भू समृद्धि)
- अतिरिक्त सहायता
- प्रसंस्करण/ब्रांडिंग पर 50% सब्सिडी
- पहली शुरुआत
- 2019-20 बजट, ~₹10cr पायलट अनुदान
- विस्तार
- 2023-24, अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष
परिचय
रैथा सिरी छोटे मिलेट — रागी, ज्वार, कंगनी, कुटकी, कोदो व अन्य पौष्टिक अनाज — उगाने वाले किसान को एक तय प्रति हेक्टेयर सहायता देती है, जिसकी पुष्टि राज्य के फसल सर्वे से होती है, अलग कागज़ी आवेदन से नहीं।
खेती प्रोत्साहन के अलावा योजना प्रसंस्करण व ब्रांडिंग उपकरण पर भी सब्सिडी देती है, ताकि मिलेट किसान व उनके FPO कच्चा अनाज नहीं बल्कि साफ़, पैक किया अनाज बेच सकें।
रैथा सिरी पहली बार कर्नाटक के 2019-20 बजट में एक छोटे पायलट के तौर पर शुरू हुई थी, लगभग ₹10 करोड़ के शुरुआती अनुदान के साथ। इसे मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के 2023-24 बजट में काफ़ी बढ़ाया गया, संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष (2023) के मौके पर, वही ₹10,000/हेक्टेयर दर रखते हुए पर क्षेत्रफल विस्तार, उत्पादन व उत्पादकता पर राज्यभर ज़्यादा ज़ोर के साथ।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- मिलेट खेती के लिए किसान के बैंक खाते में सीधे ₹10,000 प्रति हेक्टेयर।
- रागी, ज्वार, कंगनी, कुटकी, कोदो व अन्य छोटे मिलेट कवर।
- व्यक्तिगत किसान या FPO के लिए प्रसंस्करण व ब्रांडिंग उपकरण पर 50% सब्सिडी।
- मौजूदा फसल सर्वे से सत्यापन — ज़्यादातर मामलों में अलग खेत निरीक्षण नहीं चाहिए।
- अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष के दौरान कर्नाटक के प्रोत्साहन के तहत 2023-24 बजट में काफ़ी बढ़ाई गई।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- कर्नाटक में पात्र छोटा मिलेट उगाने वाला किसान
- फसल विवरण राज्य के फसल सर्वे (भू समृद्धि/FRUITS) में दर्ज हो
- भूमि व आधार किसान डेटाबेस (FID) में जुड़े हों
शामिल नहीं
- धान या गेहूं जैसे बड़े अनाज — यह प्रोत्साहन खासतौर पर छोटे मिलेट के लिए है
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- FID (किसान आईडी) पंजीकरण
- भूमि रिकॉर्ड (RTC/पहणी)
- बैंक पासबुक
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
FID पंजीकरण कराएँ
अगर पहले से नहीं है तो कर्नाटक किसान आईडी (FID) सिस्टम में पंजीकरण करें — योजना इसी रिकॉर्ड को जाँचती है।
- 2
मिलेट फसल फसल सर्वे में दर्ज हो यह सुनिश्चित करें
पुष्टि करें कि मौसमी फसल सर्वे में फील्ड अधिकारी ने आपकी जोत में छोटा मिलेट दर्ज किया है।
- 3
DBT प्राप्त करें
सत्यापन के बाद ₹10,000/हेक्टेयर प्रोत्साहन सीधे जुड़े बैंक खाते में आता है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- अगर आपकी मिलेट फसल फसल सर्वे में नहीं दिख रही या DBT नहीं आया है, तो पहले अपने रैथा संपर्क केंद्र (RSK) पर बताएं।
- समाधान न होने पर जनस्पंदन (iPGRS) — कर्नाटक की सामान्य लोक-शिकायत व्यवस्था — के टोल-फ्री हेल्पलाइन 1902 पर, ipgrs.karnataka.gov.in पोर्टल पर, या किसी बापूजी सेवा केंद्र पर आगे बढ़ाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अलग आवेदन फ़ॉर्म भरना होगा?
ज़्यादातर नहीं — भुगतान फसल सर्वे डेटा से शुरू होता है, लेकिन अगर आपका मिलेट फसल नहीं दिख रहा तो रैथा संपर्क केंद्र से संपर्क करें।
क्या ₹10,000 प्रति एकड़ है या प्रति हेक्टेयर?
प्रति हेक्टेयर — छोटे खेत के लिए राशि उसी अनुपात में घटती है।
क्या FPO सदस्यों की तरफ़ से प्रसंस्करण सब्सिडी ले सकता है?
हाँ, सदस्यों की मिलेट उपज संभालने वाला पंजीकृत FPO 50% प्रसंस्करण/ब्रांडिंग सब्सिडी ले सकता है।
क्या रैथा सिरी बिल्कुल नई योजना है?
नहीं — यह पहली बार 2019-20 बजट में लगभग ₹10 करोड़ के छोटे पायलट के तौर पर शुरू हुई थी, फिर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के 2023-24 बजट में संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष के तहत काफ़ी बढ़ाई गई, वही ₹10,000/हेक्टेयर दर पर।
क्या पात्रता के लिए न्यूनतम भूमि सीमा है?
कुछ स्रोत 1 हेक्टेयर न्यूनतम बताते हैं, पर यह योजना के मौजूदा आधिकारिक मार्गदर्शन में पुष्ट नहीं है, और प्रोत्साहन छोटे खेतों के लिए अनुपात में घटता बताया गया है — अपनी सटीक स्थिति रैथा संपर्क केंद्र से जाँच लें।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को raitamitra.karnataka.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
