Pusa Composite 383
सबसे सूखे बाजरा इलाक़ों के लिए खुली-परागित कम्पोज़िट — हाइब्रिड से कम उपज, पर अगले सीज़न के लिए बीज बचाया जा सकता है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- बाजरा
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 70–75 दिन
- अपेक्षित उपज
- 16–20 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई / हल्की मिट्टी
- जारी
- आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली (किसी भी सुलभ स्रोत में सटीक जारी-वर्ष उपलब्ध नहीं)
इस किस्म के बारे में
पूसा कम्पोज़िट 383 आईसीएआर-आईएआरआई द्वारा विकसित एक खुली-परागित बाजरा किस्म है, जिसे संस्थान की अपनी किस्म सूची में दोहरे उद्देश्य (दाना व चारा) के लिए, डाउनी मिल्ड्यू प्रतिरोधी और अच्छी चारा गुणवत्ता वाली बताया गया है। यह राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब व दिल्ली में सुझाई जाती है। हाइब्रिड की बजाय खुली-परागित कम्पोज़िट होने के कारण किसान अगले सीज़न के लिए फ़सल से बीज बचा सकते हैं, पर इसकी उपज सीमा एचएचबी 67 इम्प्रूव्ड या आरएचबी 177 जैसी हाइब्रिड से कम रहती है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
70–75 दिन
अपेक्षित उपज
16–20 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- खुली-परागित होने से फ़सल से अगले सीज़न के लिए बीज बचाया जा सकता है — हर साल नया हाइब्रिड बीज ख़रीदने की ज़रूरत नहीं
- दोहरे उद्देश्य वाली: आईएआरआई इसे दाना व चारा दोनों की अच्छी गुणवत्ता के लिए सूचीबद्ध करता है, जहाँ फ़सल पशुओं को भी खिलाई जाती हो वहाँ उपयोगी
- सात राज्यों (राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली) में व्यापक सिफ़ारिश दायरा
ध्यान रखने योग्य बातें
- आईएआरआई की अपनी सूची में औसत उपज 2.2–2.4 टन/हेक्टेयर (22–24 क्विंटल/हेक्टेयर) दर्ज है, जो इस रिकॉर्ड के 16–20 क्विंटल/हेक्टेयर के सतर्क आँकड़े से कुछ अधिक है — अधिक आँकड़े को संस्थान-परीक्षण की संभावना और कम आँकड़े को खेत की व्यावहारिक अपेक्षा मानें।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- राजस्थान
- हरियाणा
- उत्तर प्रदेश
स्रोत: Pearl Millet varieties/hybrids — IARI Technology Transfer Unit. संपादकीय नीति.
