Pusa Composite 701
आईसीएआर-आईएआरआई की एक ओपन-पॉलिनेटेड (कम्पोज़िट) क़िस्म — हाइब्रिड के विपरीत, इस सीज़न की फ़सल से बचाया गया बीज अगले सीज़न बिना बड़ी उपज-गिरावट के दोबारा बोया जा सकता है। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- बाजरा
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 78–82 दिन
- अपेक्षित उपज
- 20–23 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई / हल्की मिट्टी
- जारी
- आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली के जेनेटिक्स प्रभाग द्वारा विकसित; भारत के A-ज़ोन शुष्क क्षेत्र के लिए 2016 में आधिकारिक रूप से जारी
इस किस्म के बारे में
पूसा कम्पोज़िट 701 एक ओपन-पॉलिनेटेड (कम्पोज़िट) बाजरा किस्म है, जिसे आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली के जेनेटिक्स प्रभाग ने विकसित किया और भारत के A-ज़ोन शुष्क क्षेत्र के लिए 2016 में आधिकारिक रूप से जारी किया — यह दो सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पन्नों (इसका अपना iari-varieties डेटाबेस व इसका ZTM-BPD टेक्नोलॉजी-ट्रांसफ़र पन्ना) से पुष्ट होता है। दोनों इस बात पर सहमत हैं कि इसे राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब व दिल्ली के लिए अनुशंसित किया गया है, यह लगभग 80 दिनों में मध्यम परिपक्वता तक पहुँचती है, डाउनी मिल्ड्यू के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है, और विशेष रूप से सीमित-सिंचाई, जल-अभाव वाली बढ़वार स्थितियों के लिए विकसित की गई थी। ZTM-BPD पन्ना इसे अतिरिक्त रूप से एक दोहरे-उद्देश्य वाली किस्म भी बताता है, जो दाना व भूसा (चारा) दोनों उपज के लिए मूल्यवान है, परीक्षणों में औसत लगभग 2.3 टन/हेक्टेयर (23 क्विंटल/हेक्टेयर) दाना उपज दर्ज करता है, और बताता है कि प्रतिरोधकता डाउनी मिल्ड्यू के साथ-साथ ब्लास्ट तक भी फैली है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
78–82 दिन
अपेक्षित उपज
20–23 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- डाउनी मिल्ड्यू के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी, और अलग से ब्लास्ट के प्रति भी प्रतिरोधी बताई गई — बाजरे के शुष्क क्षेत्रों में दो सबसे नुक़सानदेह रोग — आईएआरआई के अपने किस्म पन्नों के अनुसार
- हाइब्रिड की बजाय ओपन-पॉलिनेटेड कम्पोज़िट होने के कारण, किसान अपनी फ़सल से बीज बचाकर बिना बड़ी उपज-गिरावट के दोबारा बो सकते हैं — जहाँ हर सीज़न नया हाइब्रिड बीज ख़रीदना संभव न हो वहाँ उपयोगी
- विशेष रूप से सीमित-सिंचाई ("जल-अभाव") बढ़वार स्थितियों के लिए विकसित, और सभी सातों A-ज़ोन राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली) में अनुशंसित — व्यापक अनुकूलनशीलता
- दोहरे-उद्देश्य वाली: दाने के साथ-साथ भूसा (चारा) उपज के लिए भी मूल्यवान — जहाँ किसान पशुधन भी पालता हो वहाँ उपयोगी
ध्यान रखने योग्य बातें
- ऊपर दी गई अवधि, उपज व राज्य-सूची को आईएआरआई के अपने किस्म पन्नों (iari-varieties डेटाबेस व ZTM-BPD टेक्नोलॉजी-ट्रांसफ़र पन्ना, दोनों सीधे फ़ेच किए गए) से मिलान कर सुधारा गया (2026-08-15) — लगभग 80 दिनों की मध्यम परिपक्वता, ~2.3 टन/हेक्टेयर (23 क्विंटल/हेक्टेयर) औसत परीक्षण उपज, व पूरे सात-राज्य A-ज़ोन की सिफ़ारिश — पहले के कम आँकड़ों व छोटी राज्य-सूची की जगह, जो एक असत्यापित पास से आए थे।
- इस शोध चरण में मिले किसी स्रोत में कम्पोज़िट बनाने वाली विशिष्ट पैरेंट लाइनें, सटीक बीज दर, या इस किस्म से जुड़ी बुवाई-समय/दूरी की सिफ़ारिश नहीं दी गई, सामान्य बाजरा प्रथा से अलग — अंदाज़ा लगाने की बजाय अनकहा छोड़ा गया।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- राजस्थान
- हरियाणा
- गुजरात
- मध्य प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
- पंजाब
- दिल्ली
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मैं पूसा कम्पोज़िट 701 का बीज बचाकर अगले साल दोबारा बो सकता हूँ?
हाँ — यही एक ओपन-पॉलिनेटेड कम्पोज़िट किस्म का उद्देश्य है: हाइब्रिड के विपरीत, खेत में बचाया गया बीज हाइब्रिड बीज की तरह उपज में तेज़ी से गिरावट नहीं दिखाता। आईएआरआई की अपनी रिलीज़ सामग्री इसी वजह से इसकी सिफ़ारिश करती है।
पूसा कम्पोज़िट 701 आधिकारिक रूप से किन राज्यों के लिए अनुशंसित है?
आईएआरआई के अपने किस्म पन्नों के अनुसार, पूरा A-ज़ोन: राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब व दिल्ली — कभी-कभी इसके लिए बताए जाने वाले तीन राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, गुजरात) से कहीं अधिक।
क्या पूसा कम्पोज़िट 701 डाउनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोधी है?
हाँ — आईएआरआई इसे डाउनी मिल्ड्यू के प्रति "अत्यधिक प्रतिरोधी" बताती है, और अलग से ब्लास्ट के प्रति भी प्रतिरोधकता बताती है — बाजरे के दो प्रमुख रोग-दबाव।
पूसा कम्पोज़िट 701 को परिपक्व होने में कितना समय लगता है?
आईएआरआई के अपने पन्ने इसे "मध्यम परिपक्वता", लगभग 78–82 दिन बताते हैं।
क्या पूसा कम्पोज़िट 701 वर्षा-आधारित या कम-सिंचाई वाली खेती के लिए उपयुक्त है?
हाँ — आईएआरआई ने इसे विशेष रूप से सीमित-सिंचाई, जल-अभाव वाली बढ़वार स्थितियों के लिए विकसित व अनुशंसित किया है, यही एक वजह है कि यह पश्चिमी व उत्तरी भारत के शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाती है।
स्रोत: IARI Varieties — Pearl Millet (Pusa Composite 701) — ICAR-IARI, Pearl Millet Varieties/Hybrids — ZTM-BPD Technology Transfer Unit, ICAR-IARI. संपादकीय नीति.
