Pusa A-4
IARI की खुले परागण की किस्म। फलियाँ गहरी हरी, पाँच धारियों वाली, 12–15 सेमी लंबी हैं और जल्दी सख्त नहीं होतीं। पीला शिरा मोज़ेक विषाणु और तना और फल छेदक को खेत में सह लेती है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- भिंडी (ओकरा)
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- पहली तुड़ाई लगभग 45 दिन में
- बीज दर
- खुली परागित किस्म के लिए 8 किग्रा प्रति हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- 13–16 टन/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- रोग-प्रतिरोध
- YVMV सह लेती है; तना और फल छेदक को भी खेत में कुछ हद तक सह लेती है
- जारी
- ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने जारी की
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
पूसा A-4 नई दिल्ली के ICAR-IARI की खुले परागण की भिंडी है। इसकी फलियाँ लंबी (12–15 सेमी), गहरी हरी और पाँच धारियों वाली होती हैं, और पौधे पर जल्दी सख्त नहीं पड़तीं। यह खेत में पीला शिरा मोज़ेक विषाणु को सह लेती है। साथ ही तना और फल छेदक को भी कुछ हद तक सह लेती है, जो कम ही किस्मों में मिलता है। इससे छिड़काव का बोझ थोड़ा घटता है। उत्तरी मैदानों की गर्मी और बरसात की शुरुआत वाली फसल के लिए यह ठीक है। पहली तुड़ाई जल्दी, लगभग 45 दिन में आ जाती है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
अगर आप उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान या दिल्ली में गर्मी या बरसात की शुरुआती भिंडी उगाते हैं, तो पूसा ए-4 लगाइए। यह ऐसी लंबी फलियाँ देती है जो पौधे पर सख़्त नहीं होतीं: 12–15 सेंटीमीटर, गहरी हरी, पाँच धारियों वाली, पहली तुड़ाई लगभग 45 दिन में और उपज 13–16 टन/हेक्टेयर। इसकी ख़ास बात यह है कि यह पीला शिरा मोज़ेक और तना और फल छेदक, दोनों को खेत में कुछ हद तक सह लेती है। इससे छिड़काव का बोझ थोड़ा घटता है। ध्यान रखिए कि दोनों खेत-सहनशीलता हैं, पूरा प्रतिरोध नहीं, इसलिए भारी दबाव में छिड़काव कार्यक्रम फिर भी चाहिए। सबसे गर्म उत्तर-पश्चिमी गर्मी के लिए हिसार उन्नत, पूर्वी मैदानों के लिए काशी क्रांति, और पत्ती-मुड़न हो तो अर्का अभय चुनिए।
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयजून–अगस्त और फ़रवरी
- बीज दरखुली परागित किस्म के लिए 8 किग्रा प्रति हेक्टेयर
- दूरीमेड़ और नाली 45 सेमी की दूरी पर, और हर 30 सेमी पर एक थान
- बुवाई विधिहर थान में तीन बीज बोएँ और 10 दिन बाद छाँटकर दो पौधे रखें। ड्रिप पर 120 सेमी चौड़ी क्यारियों पर जोड़ी-कतार का माप 90 x 45 x 45 सेमी रहता है
- सिंचाईअंकुरण के बाद हफ़्ते में एक बार सिंचाई करें
- उर्वरकआधार खुराक में 25 टन/हेक्टेयर गोबर खाद के साथ 20 किग्रा N, 50 किग्रा P और 30 किग्रा K प्रति हेक्टेयर, और 30 दिन पर 20 किग्रा N/हेक्टेयर (तमिलनाडु मार्गदर्शिका)
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- लंबी (12–15 सेमी), नरम फलियाँ, जो पौधे पर जल्दी सख्त नहीं पड़तीं।
- YVMV और तना और फल छेदक, दोनों को खेत में सह लेती है, इसलिए छिड़काव कम लगता है।
- जल्दी की किस्म है, पहली तुड़ाई लगभग 45 दिन में।
ध्यान रखने योग्य बातें
- यह सहनशीलता खेत के स्तर की है, पूरा बचाव नहीं। ज़्यादा दबाव में छिड़काव का कार्यक्रम फिर भी चाहिए।
- उत्तरी मैदानों की गर्मी और बरसात की शुरुआत वाली फसल में सबसे अच्छी चलती है।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- पंजाब
- हरियाणा
- राजस्थान
- दिल्ली
छिड़काव का बोझ कम: इसका असल मतलब
पूसा ए-4 पीला शिरा मोज़ेक विषाणु सह लेती है और तना और फल छेदक को भी खेत में कुछ हद तक सहती है। किस्म के ज़िम्मे दो तरह का दबाव आ जाने का मतलब है आम मौसम में छिड़काव कम — यह पैसे और मेहनत की बचत है, फ़सल न देखने की छूट नहीं।
छेदक के प्रति खेत-सहनशीलता का मतलब है नुक़सान कम, शून्य नहीं। झुकी शाखाओं की नोकें काटते रहिए। छेद और कीड़े के चूरे वाली फलियाँ निकालते रहिए, उन्हें खेत से बाहर ले जाइए। तुड़ाई समय पर कीजिए जिससे ज़्यादा पकी फलियों पर अंडे न बैठें। विषाणु की तरफ़ सफ़ेद मक्खी दबाकर रखिए और मेड़ पर खरपतवार मत रहने दीजिए। इसकी फलियाँ 12–15 सेमी, पाँच धारियों वाली होती हैं और जल्दी सख़्त नहीं होतीं। इसलिए दो तुड़ाइयों के बीच गुणवत्ता कुछ देर तक बनी रहती है। जब रोज़ खेत में न जा पाएँ, तब यह काम आता है।
क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?
यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।
दूसरी किस्मों से तुलना
भिंडी (ओकरा) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | पकने की अवधि | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Arka Abhay | वे खेत जहाँ पीला शिरा मोज़ेक के साथ पत्ती-मुड़न भी लगती है | पहली तुड़ाई लगभग 50–55 दिन में | 15–18 टन/हेक्टेयर | कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु |
| Arka Anamika | बरसात की भिंडी, बिना काँटों वाली और देर तक नरम फलियाँ | पहली तुड़ाई लगभग 55 दिन में | 12–18 टन/हेक्टेयर | कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा |
| Hisar Unnat (HRB-108) | गर्म, सूखे उत्तर-पश्चिम की गर्मी वाली फ़सल | पहली तुड़ाई लगभग 50 दिन में | 12–15 टन/हेक्टेयर | हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश |
| Kashi Kranti (VRO-22) | पूर्वी और मध्य मैदानों के लिए जल्दी आने वाली, चमकदार सीधी फलियाँ | पहली तुड़ाई लगभग 45–50 दिन में | 15–18 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल |
| Kashi Pragati (VRO-6) | ICAR-IIVR की ऊँची, जल्दी वाली, विषाणु से बची रहने वाली भिंडी, हर पौधे पर 20–25 गहरी हरी फलियाँ | पहली तुड़ाई 44–46 दिन में | औसत 16 टन/हेक्टेयर, संभावित 18 टन/हेक्टेयर | राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली, ओडिशा, आंध्र प्रदेश |
| Parbhani Kranti | महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों के लिए बरसात की परखी हुई भिंडी | पहली तुड़ाई लगभग 55 दिन में | 9–12 टन/हेक्टेयर | महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना |
| Pusa A-4यही पेज | उत्तरी मैदानों में लंबी नरम फलियाँ, और छिड़काव का बोझ कम | पहली तुड़ाई लगभग 45 दिन में | 13–16 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली |
| Pusa Sawani | जानी-पहचानी फली, पर सिर्फ़ वहाँ जहाँ सफ़ेद मक्खी पक्की तरह काबू में हो | पहली तुड़ाई लगभग 50 दिन में | 10–15 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और भिंडी (ओकरा) का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके भिंडी (ओकरा) के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर भिंडी (ओकरा) किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरभिंडी (ओकरा) की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में भिंडी (ओकरा) की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में भिंडी (ओकरा) का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
भिंडी (ओकरा) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पूसा ए-4 से छिड़काव में असल में कितनी बचत होती है?
कुछ, पूरी नहीं। छेदक और YVMV की खेत-सहनशीलता का मतलब है दबाव कम, इसलिए हल्के मौसम में एक दौर छूट सकता है। सफ़ेद मक्खी या छेदक का दबाव भारी हो तो पूरा कार्यक्रम फिर भी चाहिए, और कौन-सी हालत है यह हर कुछ दिन खेत देखने से ही पता चलता है।
जल्दी सख़्त न होने वाली फलियाँ क्यों मायने रखती हैं?
अगर ठीक उसी दिन तुड़ाई न हो सके — मज़दूर न मिले, बारिश आ जाए, मंडी का चक्कर छूट जाए — तो आम किस्म की फलियाँ रेशेदार होकर रद्द हो जाती हैं। पूसा ए-4 की फलियाँ कुछ और समय नरम रहती हैं, जिससे छूटे तुड़ाई-दिन का नुक़सान छोटा रह जाता है।
क्या पूसा ए-4 बरसात की मुख्य फ़सल के लिए ठीक है?
यह उत्तरी मैदानों की गर्मी और बरसात की शुरुआती फ़सल में सबसे अच्छी रहती है। पूरे मानसून की फ़सल में, जब विषाणु का दबाव सबसे ऊपर होता है, काशी क्रांति या अर्का अनामिका जैसी पूरी तरह प्रतिरोधी किस्म सुरक्षित चुनाव है। और पत्ती-मुड़न भी हो तो अर्का अभय।
पूसा A-4 का कितना बीज चाहिए, और खेत कैसे बनाएँ?
खुले परागण वाली किस्म के लिए 8 किलो प्रति हेक्टेयर, मेड़ और नालियाँ 45 सेमी की दूरी पर और हर 30 सेमी पर थाला, और जमाव के बाद हफ़्ते-हफ़्ते सिंचाई। जून–अगस्त की फ़सल में नाली के बजाय मेड़ पर बोने से तना पानी से बाहर रहता है।
पूसा A-4 कितनी उपज देती है, और पहली तुड़ाई कब होती है?
13–16 टन/हेक्टेयर, और पहली तुड़ाई लगभग 45 दिन पर, जो यहाँ सबसे जल्दी वालों में है। YVMV सहनशीलता और तना-फल छेदक की कुछ खेत-स्तरीय सहनशीलता के साथ छिड़काव का बोझ पुरानी किस्म से हल्का रहता है। यह तुड़ाई के पहले कुछ हफ़्तों में सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
स्रोत: Crop Production Guide (Horticulture), TNAU and Department of Horticulture, Tamil Nadu: bhendi seed rate, spacing, drip layout, season, irrigation and fertiliser. संपादकीय नीति.
