Arka Anamika
बेंगलुरु के IIHR की खुले परागण की किस्म, और YVMV-रोधी किस्मों में सबसे भरोसेमंद में से एक। फलियाँ बिना काँटों की, नरम और गहरी हरी हैं और देर तक नरम रहती हैं। पौधा ऊँचा है और बरसात में अच्छी उपज देता है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- भिंडी (ओकरा)
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- पहली तुड़ाई लगभग 55 दिन में
- बीज दर
- 8 किग्रा प्रति हेक्टेयर — खुली परागित किस्म की दर, जबकि संकर के लिए 2.5 किग्रा/हेक्टेयर। तमिलनाडु की मार्गदर्शिका इसे अपनी सुझाई भिंडी किस्मों में गिनती है
- अपेक्षित उपज
- 12–18 टन/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- रोग-प्रतिरोध
- पीला शिरा मोज़ेक विषाणु (YVMV) से बचाव
- जारी
- ICAR-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), बेंगलुरु ने जारी की
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
अर्का अनामिका बेंगलुरु के ICAR-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान की खुले परागण की भिंडी है। पीला शिरा मोज़ेक विषाणु (YVMV) से बचाव वाली किस्मों में यह सबसे ज़्यादा भरोसेमंद किस्मों में गिनी जाती है। फलियाँ बिना काँटों की (त्वचा में खुजली करने वाले रोएँ नहीं), गहरी हरी और नरम होती हैं, और जल्दी सख्त नहीं पड़तीं। पौधा ऊँचा और शाखाओं वाला है। खरीफ़ (बरसात) की फसल में यह खास तौर पर अच्छी चलती है, जब विषाणु का दबाव सबसे ज़्यादा होता है। पहली तुड़ाई लगभग 55 दिन में आ जाती है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
अगर आपकी मुख्य फ़सल खरीफ़ की है, जब विषाणु का दबाव सबसे ऊपर होता है, तो अर्का अनामिका लगाइए। इसकी फलियाँ बाज़ार और तुड़ाई करने वालों, दोनों को पसंद आती हैं — बिना काँटों की, जिससे तुड़ाई में खुजली नहीं होती, गहरी हरी, नरम और देर से सख़्त होने वाली। ICAR-IIHR की यह पुरानी भरोसेमंद किस्म पीला शिरा मोज़ेक से बचाव रखती है। पहली तुड़ाई लगभग 55 दिन में आती है और ऊँचे, शाखाओं वाले पौधे से 12–18 टन/हेक्टेयर मिलती है। और खुली-परागित होने से बीज रखा जा सकता है। दो बातें: इसका बचाव एनेशन पत्ती-मुड़न पर लागू नहीं होता, और ऊँचे पौधे को पूरी जगह चाहिए वरना हल्की मिट्टी पर हवा में गिर जाता है। पत्ती-मुड़न भी हो तो अर्का अभय चुनिए।
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयजून–अगस्त और फ़रवरी
- बीज दर8 किग्रा प्रति हेक्टेयर — खुली परागित किस्म की दर, जबकि संकर के लिए 2.5 किग्रा/हेक्टेयर। तमिलनाडु की मार्गदर्शिका इसे अपनी सुझाई भिंडी किस्मों में गिनती है
- दूरी45 x 30 सेमी। 45 सेमी की दूरी पर मेड़ और नाली बनाएँ, हर थान में 30 सेमी पर तीन बीज डालें, और 10 दिन बाद छाँटकर दो पौधे रखें
- बुवाई विधिबीज को 4 ग्राम/किग्रा ट्राइकोडर्मा विरिडी या 10 ग्राम/किग्रा स्यूडोमोनास फ़्लोरेसेंस से उपचारित करें। फिर 400 ग्राम एज़ोस्पिरिलम लगाएँ जिसे चिपकाने के लिए माँड का इस्तेमाल हो। और बुवाई से पहले 20 मिनट छाया में सुखाएँ
- सिंचाईफसल उगने के बाद हफ़्ते के अंतर पर सिंचाई करें
- उर्वरकखुली परागित किस्म के लिए: आधार खुराक में 25 टन/हेक्टेयर गोबर खाद के साथ 20 किग्रा N, 50 किग्रा P और 30 किग्रा K प्रति हेक्टेयर, और बुवाई के 30 दिन बाद 20 किग्रा N/हेक्टेयर और। 30 और 45 दिन पर 1% यूरिया तथा 1% म्यूरेट ऑफ़ पोटाश का छिड़काव करें (तमिलनाडु मार्गदर्शिका)
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- भिंडी की सबसे बड़ी बीमारी पीला शिरा मोज़ेक विषाणु (YVMV) से बचाव।
- बिना काँटों की नरम फलियाँ, जो देर तक नरम रहती हैं और ग्रेडिंग में अच्छी बैठती हैं।
- ऊँचा, शाखाओं वाला पौधा, जो बरसात में खूब उपज देता है।
- खुले परागण की किस्म है, इसलिए बीज खुद रखा जा सकता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- YVMV से बचाव एनेशन पत्ती-मुड़न विषाणु पर लागू नहीं होता। जहाँ पत्ती-मुड़न भी हो, वहाँ अर्का अभय चुनें।
- ऊँचे पौधे को ठीक दूरी चाहिए, और हल्की ज़मीन पर हवा में गिर सकता है।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- कर्नाटक
- महाराष्ट्र
- आंध्र प्रदेश
- तमिलनाडु
- ओडिशा
तुड़ाई ऐसी, कि फलियाँ नरम रहें
अर्का अनामिका बिना काँटों वाली, गहरी हरी और ज़्यादातर किस्मों से देर तक नरम रहने वाली फलियों के लिए उगाई जाती है, और बरसात में यह असली फ़ायदा है। पर पौधे पर छोड़ी गई कोई भी किस्म नरम नहीं रहती। गरम मौसम के एक-दो दिन में भिंडी रेशेदार हो जाती है। और रेशेदार फली साफ़ टूटने की जगह लकड़ी जैसी चटकती है।
इसलिए फ़सल शुरू होने पर हर दूसरे दिन, सुबह तुड़ाई कीजिए, और पौधे की सबसे बड़ी फली की जगह उसी लंबाई पर तोड़िए जो आपका ख़रीदार चाहता है। खींचने की जगह चाकू या कैंची इस्तेमाल कीजिए, जिससे डंठल न फटे। हर फली तोड़िए, वे भी जो ज़्यादा बढ़ गई हैं — इससे पौधा फूलता रहता है, क्योंकि पौधे पर छूटी ज़्यादा पकी फली अगला फल देर से लगाती है। बिना काँटों वाली होने से यह किस्म काँटेदार किस्म के मुक़ाबले हाथों पर भी आसान है, और रोज़ तुड़ाई में यह बात मायने रखती है।
क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?
यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।
दूसरी किस्मों से तुलना
भिंडी (ओकरा) की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | पकने की अवधि | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Arka Abhay | वे खेत जहाँ पीला शिरा मोज़ेक के साथ पत्ती-मुड़न भी लगती है | पहली तुड़ाई लगभग 50–55 दिन में | 15–18 टन/हेक्टेयर | कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु |
| Arka Anamikaयही पेज | बरसात की भिंडी, बिना काँटों वाली और देर तक नरम फलियाँ | पहली तुड़ाई लगभग 55 दिन में | 12–18 टन/हेक्टेयर | कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा |
| Hisar Unnat (HRB-108) | गर्म, सूखे उत्तर-पश्चिम की गर्मी वाली फ़सल | पहली तुड़ाई लगभग 50 दिन में | 12–15 टन/हेक्टेयर | हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश |
| Kashi Kranti (VRO-22) | पूर्वी और मध्य मैदानों के लिए जल्दी आने वाली, चमकदार सीधी फलियाँ | पहली तुड़ाई लगभग 45–50 दिन में | 15–18 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल |
| Kashi Pragati (VRO-6) | ICAR-IIVR की ऊँची, जल्दी वाली, विषाणु से बची रहने वाली भिंडी, हर पौधे पर 20–25 गहरी हरी फलियाँ | पहली तुड़ाई 44–46 दिन में | औसत 16 टन/हेक्टेयर, संभावित 18 टन/हेक्टेयर | राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली, ओडिशा, आंध्र प्रदेश |
| Parbhani Kranti | महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों के लिए बरसात की परखी हुई भिंडी | पहली तुड़ाई लगभग 55 दिन में | 9–12 टन/हेक्टेयर | महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना |
| Pusa A-4 | उत्तरी मैदानों में लंबी नरम फलियाँ, और छिड़काव का बोझ कम | पहली तुड़ाई लगभग 45 दिन में | 13–16 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली |
| Pusa Sawani | जानी-पहचानी फली, पर सिर्फ़ वहाँ जहाँ सफ़ेद मक्खी पक्की तरह काबू में हो | पहली तुड़ाई लगभग 50 दिन में | 10–15 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और भिंडी (ओकरा) का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके भिंडी (ओकरा) के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर भिंडी (ओकरा) किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरभिंडी (ओकरा) की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में भिंडी (ओकरा) की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में भिंडी (ओकरा) का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
भिंडी (ओकरा) के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बिना काँटों वाली फली क्यों मायने रखती है?
जिन भिंडी की फलियों पर बारीक रोएँ होते हैं, वे त्वचा में खुजली करती हैं, इसलिए तुड़ाई धीमी पड़ती है और मज़दूर मुश्किल से और महँगे मिलते हैं। अर्का अनामिका जैसी बिना काँटों वाली किस्म जल्दी तुड़ती है, शिकायत कम होती है, और फलियाँ टोकरे में भी बेहतर संभलती हैं।
इतनी ऊँची किस्म को कितनी दूरी पर लगाएँ?
छोटी किस्म से ज़्यादा जगह दीजिए — पौधा ऊँचा और शाखाओं वाला है, और भीड़ में लगाने से फलियाँ घटती हैं और हल्की मिट्टी पर हवा में गिरने का ख़तरा बढ़ता है। खरीफ़ फ़सल के लिए अपने केवीके की दूरी मानिए, और खेत रेतीला-हवादार हो तो जड़ के पास मिट्टी चढ़ा दीजिए।
अर्का अनामिका या पूसा सावनी?
लगभग हर हालत में अर्का अनामिका। पूसा सावनी YVMV-रोधी के तौर पर जारी हुई थी, पर वह बचाव भिंडी के ज़्यादातर इलाक़ों में टूट चुका है, इसलिए अब वह भारी सफ़ेद मक्खी नियंत्रण पर टिकी है। अर्का अनामिका का बचाव अब भी काम करता है और फलियाँ बिना काँटों की भी हैं।
अर्का अनामिका कब बोएँ, और सिंचाई कितनी बार करें?
जून–अगस्त या फ़रवरी, और जमाव के बाद हफ़्ते-हफ़्ते सिंचाई। बरसात की बुवाई में देखिए कि पानी तने के पास खड़ा न रहकर निकल जाए, क्योंकि भिंडी की जड़ें पानी भरी क्यारी बिल्कुल नहीं सहतीं।
अर्का अनामिका कितनी उपज देती है, और पहली तुड़ाई कब होती है?
12–18 टन/हेक्टेयर, और पहली तुड़ाई लगभग 55 दिन पर। यह काशी क्रांति (45–50 दिन) से कुछ दिन बाद है। इस इंतज़ार के बदले मिलती है वह लंबी, कोमल, बिना काँटे वाली फली जो तोड़ने वालों और ख़रीदारों, दोनों को भाती है।
स्रोत: Crop Production Guide (Horticulture), TNAU and Department of Horticulture, Tamil Nadu: bhendi seed rate for varieties and hybrids, spacing and thinning, season, seed treatment, irrigation and fertiliser. संपादकीय नीति.
