मुख्य सामग्री पर जाएँ
Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
करी पत्तासभी सीज़नबहुवर्षीय चुनी हुई किस्म (नर्सरी से पूछें कि पौध कैसे बनाई गई)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Suvasini (DWD-2)

सुवासिनी, Suwasini और Suhasini इस UAS-धारवाड़ किस्म के एक ही नाम की अलग-अलग वर्तनी हैं, जो अलग-अलग स्रोतों में दिखती हैं। विश्वविद्यालय की दो करी पत्ता किस्मों में यही ज़्यादा सुझाई जाती है, क्योंकि यह ठंड का मौसम अच्छी तरह सह लेती है।

सीज़नसभी सीज़न
फल कब सेबहुवर्षीय पौधा; जमने के बाद लगातार पत्ते तोड़े जाते हैं
अपेक्षित उपजकित्तूर (कर्नाटक) में खाद, गोबर और वर्मीवॉश के साथ साल में 8.00 किग्रा ताज़े पत्ते प्रति पौधा; इनके बिना 2.92 किग्रा
उपयुक्त मिट्टीअच्छी निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट मिट्टी; पानी भरना बिल्कुल नहीं सहती

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
बहुवर्षीय चुनी हुई किस्म (नर्सरी से पूछें कि पौध कैसे बनाई गई)
सीज़न
सभी सीज़न
फल कब से
बहुवर्षीय पौधा; जमने के बाद लगातार पत्ते तोड़े जाते हैं
अपेक्षित उपज
कित्तूर (कर्नाटक) में खाद, गोबर और वर्मीवॉश के साथ साल में 8.00 किग्रा ताज़े पत्ते प्रति पौधा; इनके बिना 2.92 किग्रा
उपयुक्त मिट्टी
अच्छी निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट मिट्टी; पानी भरना बिल्कुल नहीं सहती
रोग-प्रतिरोध
रोग-प्रतिरोध की अलग से जानकारी नहीं; अपनी जोड़ीदार DWD-1 के मुकाबले ठंड बेहतर सह लेती है
जारी
धारवाड़ का कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (UAS) — पश्चिमी घाट के पौधों से चुनी गई किस्म

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

सुवासिनी, जिसे DWD-2, Suwasini या Suhasini भी लिखा जाता है, धारवाड़ के कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (UAS) की जारी की हुई करी पत्ता (Murraya koenigii) की दूसरी किस्म है, जो पश्चिमी घाट से इकट्ठे पौधों से बनी। भारत में करी पत्ता पर IIHR की समीक्षा इसे 'DWD-2 (Suwasini)' लिखती है, व्यावसायिक खेती के लिए जारी दो 'आनुवंशिक रूप से अलग' किस्मों में से एक। स्रोत कहते हैं कि DWD-1 के मुकाबले इसका मुख्य फ़ायदा यह है कि ठंडा मौसम इसे धीमा नहीं करता, और यह आम तौर पर ज़्यादा देती है। हमें जो एक परीक्षण मिला, वह कर्नाटक के कित्तूर रानी चन्नम्मा उद्यानिकी महाविद्यालय का है (हेगड़े और अन्य, Acta Horticulturae)। 2004 में लगाए पौधों ने सुझाई गई खाद, गोबर की खाद और वर्मीवॉश छिड़काव के साथ साल में 8.00 किग्रा ताज़े पत्ते प्रति पौधा दिए। इनमें से कुछ भी न देने पर 2.92 किग्रा। ताज़े पत्ते में तेल 0.42% से 0.44% रहा। एक व्यापारिक वेबसाइट DWD-2 के लिए 4.09% तेल बताती है, बिना इकाई के, जो इन नापों से मेल नहीं खाता, इसलिए हम उसे इस्तेमाल नहीं करते। पौधे कैसे बनाए जाते हैं, इस पर स्रोत एक राय नहीं हैं, इसलिए नर्सरी से पूछें। सुवासिनी मुख्य रूप से कर्नाटक में उगाई जाती है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

सुवासिनी (DWD-2) तब चुनें जब आप धारवाड़ की नाम वाली जारी किस्म चाहते हों और आपकी सर्दी हमेशा हल्की न रहती हो। स्रोत कहते हैं कि यह सर्दी से अप्रभावित रहती है और आम तौर पर DWD-1 से ज़्यादा देती है। DWD-1 तभी चुनें जब आपकी सर्दी गर्म हो और आपको वह तेज़ खुशबू चाहिए जो कुछ स्रोत उसके लिए बताते हैं। सुवासिनी पर हमें जो एक परीक्षण मिला, कर्नाटक के कित्तूर में, वह दिखाता है कि खाद का क्या असर होता है। बिना खाद और बिना छिड़काव के 2.92 किग्रा ताज़े पत्ते प्रति पौधा मिले। और सुझाई गई खाद, गोबर की खाद और वर्मीवॉश के साथ 8.00 किग्रा। पौधों से पहले खाद और गोबर का बजट बनाएँ।

बुवाई और खेती

  • दूरीTNAU: पौधों के बीच 1.2 से 1.5 मी, हर गड्ढे में एक पौधा (इंडिया एग्रोनेट 90 से 120 सेमी बताती है)
  • बुवाई विधि30 x 30 x 30 सेमी के गड्ढे रोपाई से 1 से 2 महीने पहले खोदें; TNAU हर गड्ढे के बीच में 1 साल का एक पौधा लगाता है
  • सिंचाईरोपाई के तुरंत बाद पानी दें, फिर दिन 3 पर, उसके बाद हफ़्ते में एक बार (TNAU)
  • उर्वरकआख़िरी जुताई से पहले 20 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी गोबर की खाद, फिर हर तुड़ाई के बाद 20 किग्रा प्रति पौधा, मिट्टी में मिलाकर (TNAU)
  • कटाईपहली तुड़ाई रोपाई के 10 से 12 महीने बाद। 1 मी पर ऊपर की कली तोड़ें और हर झाड़ी में 5 से 6 शाखाएँ रखें (TNAU)

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी निकासी वाली लाल बलुई दोमट मिट्टी (TNAU)

जलवायु

तापमान
Optimum 26-37°C (TNAU)
जलवायु
स्रोत DWD-2 को सर्दी से अप्रभावित बताते हैं। इंडिया एग्रोनेट के अनुसार आम करी पत्ता में जहाँ न्यूनतम तापमान 13°C से नीचे जाता है, वहाँ कल्लों की बढ़वार थोड़ी प्रभावित होती है।

कीट और रोग संबंधी बातें

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • ठंडा मौसम इसे उस तरह धीमा नहीं करता जैसे DWD-1 को करता है, इसलिए सर्दी में भी तुड़ाई चलती रहती है।
  • धारवाड़ की जारी किस्मों में यही एक है जिसका हमें छपा खेत-परीक्षण मिला, कर्नाटक के कित्तूर में।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • नाम सुवासिनी, Suwasini और Suhasini तीनों तरह से लिखा मिलता है। पैसे देने से पहले नर्सरी से पक्का करवाएँ कि पौधा UAS धारवाड़ की DWD-2 ही है।
  • कित्तूर की उपज खाद और देखभाल वाले परीक्षण की छोटी झाड़ियों की है। गोबर और खाद के बिना 8.00 किग्रा प्रति पौधा न मानें।

उपयुक्त क्षेत्र

धारवाड़ के कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (UAS) ने DWD-1 के साथ जारी की। आम व्यावसायिक रोपाई के लिए, जिसमें ठंडी सर्दी वाले इलाके भी हैं, दोनों में यही ज़्यादा सुझाई जाती है।

  • कर्नाटक

कित्तूर परीक्षण क्या दिखाता है, और क्या नहीं

सुवासिनी पर हमें जो एक ही खेत-परीक्षण मिला, वह कर्नाटक के कित्तूर रानी चन्नम्मा उद्यानिकी महाविद्यालय का है (हेगड़े, सिद्दप्पा और हनमशेट्टी, Acta Horticulturae)। 2004 में लगे पौधों का अध्ययन 2006-07 में हुआ, यानी वे दो से तीन साल के थे। 50% वर्मीवॉश छिड़काव से साल में 5.79 किग्रा ताज़े पत्ते प्रति पौधा मिले, उसके बिना 5.05 किग्रा। सबसे अच्छे मेल, यानी सुझाई गई खाद, गोबर की खाद और वर्मीवॉश, ने 8.00 किग्रा दिया। जिन पौधों को न खाद मिली न छिड़काव, उन्होंने 2.92 किग्रा दिया।

इससे दो बातें निकलती हैं। हमारे घटाव से अकेले छिड़काव ने 0.74 किग्रा प्रति पौधा जोड़ा, जबकि खाद और गोबर साथ ने फसल को 2.92 किग्रा से 8.00 किग्रा कर दिया, यानी लगभग 2.7 गुना। और ये देखभाल वाले परीक्षण की छोटी झाड़ियाँ हैं, इसलिए पुराने बाग़ के लिए कोई वादा नहीं। सार में दूरी नहीं दी गई, इसलिए 8.00 किग्रा को हेक्टेयर के टन में न बदलें। पैसा पहले गोबर और खाद में लगाएँ, और अपनी तुड़ाई तौलें।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।

दूसरी किस्मों से तुलना

करी पत्ता की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकउपजराज्य
DWD-1कर्नाटक के गर्म करी पत्ता इलाके, जहाँ सर्दी हल्की रहती है और आप UAS धारवाड़ से DWD-1 के नाम से पौध ले सकते हैंइस किस्म का अपना आँकड़ा नहीं छपा; खुशबू अच्छी, पर सर्दी में बढ़वार घट जाती हैकर्नाटक
Senkaampu (Senkambu)तमिलनाडु के वे किसान जो इलाके की भरोसेमंद, तेज़ खुशबू वाली किस्म चाहते हैं और पौध लेने से पहले मातृ झाड़ी देख सकते हैंइस किस्म का अपना आँकड़ा नहीं छपा; तमिलनाडु में खुशबू के लिए जानी जाती हैतमिलनाडु
Suvasini (DWD-2)यही पेजकर्नाटक जैसे मौसम में कहीं भी व्यावसायिक पत्ता-बाग, जिनमें ठंडी सर्दी वाली जगहें भी हैं, जहाँ आप धारवाड़ की वह किस्म चाहते हों जो ठंड में भी बढ़ती रहेकित्तूर (कर्नाटक) में खाद, गोबर और वर्मीवॉश के साथ साल में 8.00 किग्रा ताज़े पत्ते प्रति पौधा; इनके बिना 2.92 किग्राकर्नाटक

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और करी पत्ता का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

करी पत्ता के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सुवासिनी, Suwasini और Suhasini एक ही हैं?

लगभग पक्का हाँ। ये एक ही कन्नड़ नाम की अलग-अलग वर्तनी हैं, जो एक ही UAS-धारवाड़ DWD-2 किस्म के लिए अलग-अलग स्रोतों में दिखती हैं। अगर नाम को लेकर शक हो, तो नर्सरी से कहें कि वह खास तौर पर DWD-2 किस्म ही होने की पुष्टि करे।

सुवासिनी का एक पौधा साल में कितने पत्ते देता है?

कर्नाटक के कित्तूर परीक्षण (हेगड़े और अन्य, Acta Horticulturae) में बिना छिड़काव के साल में 5.05 किग्रा ताज़े पत्ते प्रति पौधा मिले और 50% वर्मीवॉश छिड़काव के साथ 5.79 किग्रा। सुझाई गई खाद, गोबर की खाद और वर्मीवॉश साथ देने पर 8.00 किग्रा मिले, और बिना खाद और छिड़काव के 2.92 किग्रा। पौधे 2004 में लगे थे और परीक्षण 2006-07 में चला, यानी झाड़ियाँ छोटी थीं। पेपर की दूरी सार (एब्सट्रैक्ट) में नहीं है, इसलिए हम इसे हेक्टेयर के आँकड़े में नहीं बदलते।

क्या सुवासिनी पर वर्मीवॉश का छिड़काव अपना खर्च निकाल देता है?

परीक्षण में अकेले छिड़काव से बढ़त छोटी रही: साल में 5.79 किग्रा के मुकाबले 5.05 किग्रा प्रति पौधा, यानी हमारे घटाव से 0.74 किग्रा। ताज़े पत्ते में तेल लगभग नहीं बदला (0.44% के मुकाबले 0.42%)। बड़ी छलांग खाद और गोबर की खाद साथ देने से आई (8.00 किग्रा के मुकाबले 2.92 किग्रा)। पहले गोबर और खाद पर खर्च करें, फिर कुछ कतारों में छिड़काव आज़माएँ और तुड़ाई तौलकर ही पूरे ब्लॉक में छिड़कें।

सुवासिनी के लिए कितनी दूरी रखूँ?

TNAU पौधों के बीच 1.2 से 1.5 मी की दूरी सुझाता है। पौधे 30 x 30 x 30 सेमी के गड्ढों में, जो रोपाई से 1 से 2 महीने पहले खोदे जाएँ। और आख़िरी जुताई से पहले 20 टन सड़ी गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर। इंडिया एग्रोनेट 90 से 120 सेमी बताती है। इनमें से कोई आँकड़ा सिर्फ़ सुवासिनी का नहीं है। कम दूरी का मतलब खिलाने और छाँटने के लिए ज़्यादा झाड़ियाँ, इसलिए हाथ से तुड़ाई करते हों और मज़दूर कम हों तो चौड़ी दूरी चुनें।

सुवासिनी, Suwasini और Suhasini तीनों नाम क्यों दिखते हैं?

ये धारवाड़ की जारी किस्म DWD-2 की अलग-अलग वर्तनी हैं। IIHR की समीक्षा 'DWD-2 (Suwasini)' लिखती है। केरल से जुड़ा एक स्रोत Suwasini को केरल कृषि विश्वविद्यालय की किस्म बताता है। पर इसका समर्थन हमें कहीं नहीं मिला। इसलिए पैसे देने से पहले नर्सरी से पूछ लें कि पौधा UAS धारवाड़ की DWD-2 ही है या नहीं।

हर तुड़ाई के बाद सुवासिनी की झाड़ी को पानी और खाद कैसे दूँ?

TNAU के अनुसार रोपाई के तुरंत बाद पानी दें, फिर 3 दिन बाद, उसके बाद हफ़्ते में एक बार। हर तुड़ाई के बाद वह हर पौधे को 20 किग्रा गोबर की खाद, मिट्टी में मिलाकर, देने को कहता है। TNAU पत्ती धब्बा के लिए कार्बेन्डाज़िम (1 ग्राम प्रति लीटर पानी) भी बताता है और करी पत्ता पर गंधक के छिड़काव से बचने को कहता है।

स्रोत: Diversity and Distribution of Curry Leaf in India — Journal of Horticultural Sciences (IIHR), Curry leaf Improvement in India — ResearchGate, TNAU Agritech Portal — Curry leaf, India Agronet — Curry leaf. संपादकीय नीति.