JG 11
अगेती चना किस्म (लगभग 95–100 दिन) जिसमें फ्यूज़ेरियम उकठे के प्रति मज़बूत मूल प्रतिरोध है — जिस ज़मीन में उकठे का इतिहास हो, वहाँ यही सबसे बड़ा उपज-हत्यारा होता है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- चना
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 95–100 दिन
- अपेक्षित उपज
- 18–20 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- चिकनी / काली मिट्टी
- जारी
- 1999 में जारी, इक्रीसैट, पीकेवी अकोला व जेएनकेवीवी जबलपुर द्वारा संयुक्त रूप से विकसित; आधिकारिक तौर पर भारत के दक्षिणी क्षेत्र (ओडिशा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) के लिए सिफ़ारिश की गई
इस किस्म के बारे में
जेजी 11 मोटे दाने वाली देसी चना किस्म है, जो 1999 में इक्रीसैट, पंजाबराव कृषि विद्यापीठ (पीकेवी) अकोला व जेएनकेवीवी जबलपुर द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई। यह अगेती किस्म है, लगभग 95–100 दिन की, दाना मोटा है, लगभग 22 ग्राम प्रति 100 दाना। इसकी आधिकारिक जारी सिफ़ारिश भारत के दक्षिणी क्षेत्र (ओडिशा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) के लिए है, पर मोटे दाने व कम अवधि के कारण मध्य भारत में भी इसे किसानों ने व्यापक रूप से अपनाया है — इस रिकॉर्ड की states सूची में चार आधिकारिक दक्षिणी क्षेत्र राज्य और मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र दोनों शामिल हैं, जहाँ फ्रंट-लाइन प्रदर्शन, प्रसार अध्ययन व इक्रीसैट की अपनी "गैर-पारंपरिक क्षेत्र" अपनाव-लहर की रिपोर्ट वास्तविक खेती की पुष्टि करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
95–100 दिन
अपेक्षित उपज
18–20 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- मोटा, आकर्षक दाना (आमतौर पर लगभग 22 ग्राम/100 दाना) जो सामान्य स्थानीय देसी चने से बेहतर बाज़ार भाव दिलाता है
- अगेती अवधि इसे रबी की तंग समय-सीमा में फ़िट होने देती है और अगली फ़सल के लिए खेत जल्दी खाली कर देती है
ध्यान रखने योग्य बातें
- जेजी 11 मज़बूत फ्यूज़ेरियम उकठा-प्रतिरोध के साथ जारी हुई थी, पर एक बहु-रेस जाँच अध्ययन में मूल जेजी 11 किस्म को कुछ नई उकठा रेस/आइसोलेट के प्रति ‘संवेदनशील’ पाया गया — दो दशकों से ज़्यादा के रोगजनक विकास ने उस प्रतिरोध का कुछ हिस्सा कमज़ोर कर दिया है, यही वजह है कि प्रजनकों ने केसीडी 11 जैसी उकठा-प्रतिरोध बहाल करने वाली किस्मों के लिए जेजी 11 को आधार बनाया
- हाल के भारी उकठा-इतिहास वाली ज़मीन पर, अकेले प्रतिरोध पर भरोसा करने की बजाय जेजी 11 के साथ बीज उपचार व फ़सल-चक्र भी अपनाएँ
- यह states सूची आधिकारिक दक्षिणी क्षेत्र सिफ़ारिश (ओडिशा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) को मध्य प्रदेश (बुंदेलखंड फ्रंट-लाइन प्रदर्शन, इंदौर से बीज-व्यापार) व महाराष्ट्र (इक्रीसैट की अपनी रिपोर्ट, जो आंध्र प्रदेश व महाराष्ट्र को साथ मिलाकर "गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में शांत चना क्रांति" बताती है) में दर्ज खेती-अपनाव के साथ मिलाती है — दक्षिणी क्षेत्र के राज्यों को औपचारिक सिफ़ारिश और बाक़ी को दर्ज खेती वाले क्षेत्र मानें, जो आधिकारिक रूप से अधिसूचित नहीं हैं।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- आंध्र प्रदेश
- कर्नाटक
- ओडिशा
- तमिलनाडु
- मध्य प्रदेश
- महाराष्ट्र
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या जेजी 11 आज भी फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी है?
हर उकठा रेस के विरुद्ध नहीं। यह 1999 में मज़बूत प्रतिरोध के साथ जारी हुई थी, पर एक बाद की बहु-रेस जाँच में मूल किस्म कुछ नई रेस के प्रति संवेदनशील मिली, यही वजह है कि अब इसे प्रतिरक्षित मानने के बजाय आगे के उकठा-प्रतिरोध कार्य के लिए प्रजनन जनक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
क्या जेजी 11 केवल दक्षिणी क्षेत्र के लिए है, या यह मध्य भारत में भी अच्छी उगती है?
इसकी आधिकारिक जारी सिफ़ारिश भारत के दक्षिणी क्षेत्र — ओडिशा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु — के लिए है। पर मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र के किसानों ने भी इसे व्यापक रूप से अपनाया है, इसके मोटे दाने व कम अवधि के कारण — इक्रीसैट ने ख़ुद इस फैलाव को "शांत चना क्रांति" के रूप में दर्ज किया है, जो आधिकारिक तौर पर जारी किए गए क्षेत्र से काफ़ी आगे तक पहुँची। इस पेज पर आधिकारिक क्षेत्र व यह दर्ज अपनाव-राज्य दोनों साथ सूचीबद्ध हैं, क्योंकि किसी राज्य में औपचारिक सिफ़ारिश न होने पर भी कोई किस्म वहाँ उगाने लायक़ हो सकती है।
स्रोत: Identification of multi-race Fusarium wilt resistance in chickpea using rapid hydroponic phenotyping — Phytopathologia Mediterranea. संपादकीय नीति.
