Pusa 372
मोटे दाने वाली देसी क़िस्म, जो सामान्य स्थानीय चने से प्रति क्विंटल बेहतर भाव दिलाती है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- चना
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 130–140 दिन
- अपेक्षित उपज
- 20–22 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 1993 में आईसीएआर-आईएआरआई द्वारा जारी; मध्य क्षेत्र, पूर्वोत्तर मैदानी क्षेत्र व उत्तर-पश्चिम मैदानी क्षेत्र के लिए सिफ़ारिश की गई; पछेती-बुवाई परीक्षणों में लंबे समय से राष्ट्रीय चेक किस्म के रूप में उपयोग
इस किस्म के बारे में
पूसा 372 व्यापक रूप से अनुकूलित देसी चना किस्म है, जिसे 1993 में आईसीएआर-आईएआरआई ने जारी किया; यह मध्य क्षेत्र, पूर्वोत्तर मैदानी क्षेत्र व उत्तर-पश्चिम मैदानी क्षेत्र में सिफ़ारिश की जाती है और लंबे समय से पछेती-बुवाई परीक्षणों में राष्ट्रीय चेक किस्म के रूप में उपयोग होती रही है — जो इसकी व्यापक स्थापना को दर्शाता है। इसे शुरू में सूखा-सहनशीलता के लिए महत्व दिया गया था, पर चने की आणविक प्रजनन पर एक शैक्षणिक समीक्षा बताती है कि खेत की परिस्थितियों में हाल के वर्षों में इसका सूखा-प्रदर्शन घटा है, यही वजह है कि आईसीएआर ने बाद में मार्कर-सहायता प्राप्त बैककॉसिंग से देशी किस्म आईसीसी 4958 का ‘क्यूटीएल-हॉटस्पॉट’ सूखा-सहनशीलता क्षेत्र पूसा 372 की अपनी पृष्ठभूमि में डाला, जिससे सुधरी किस्म पूसा 10216 बनी।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
130–140 दिन
अपेक्षित उपज
20–22 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- व्यापक क्षेत्रीय अनुकूलनशीलता — एक साथ तीन अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में सिफ़ारिश की गई कुछ ही देसी किस्मों में से एक
- पछेती-बुवाई परिस्थितियों के लिए उपयुक्त, जिससे मुख्य बुवाई समय छूटने पर भी कुछ लचीलापन मिलता है
ध्यान रखने योग्य बातें
- एक बहु-रेस फ्यूज़ेरियम उकठा जाँच अध्ययन में पूसा 372 को कुछ जाँची गई रेस के प्रति ‘संवेदनशील’ पाया गया — इसे इस रिकॉर्ड की मौजूदा ‘उकठे की मध्यम सहनशीलता’ रेटिंग के विपरीत नहीं, बल्कि उसके साथ पढ़ना बेहतर है, क्योंकि रोग के प्रति समग्र मध्यम सहनशीलता कुछ नई रेस के प्रति संवेदनशीलता के साथ भी सुसंगत हो सकती है
- दशकों के खेत-अनुभव में इसकी मूल सूखा-सहनशीलता कमज़ोर पड़ी बताई जाती है, यही वजह है कि सूखा-प्रवण इलाक़ों के लिए इसके उत्तराधिकारी के रूप में एमएबीसी-सुधरी पूसा 10216 किस्म अब मौजूद है
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- मध्य प्रदेश
- राजस्थान
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पूसा 372 अभी भी सूखा-प्रवण ज़मीन के लिए अच्छा विकल्प है?
यह अभी भी ठीक-ठाक प्रदर्शन करती है, पर दशकों के खेत-उपयोग में इसकी सूखा-सहनशीलता कुछ कमज़ोर पड़ी है। आईसीएआर-आईएआरआई ने पूसा 372 की अपनी पृष्ठभूमि में मज़बूत सूखा-सहनशीलता क्षेत्र डालकर सुधरी उत्तराधिकारी किस्म पूसा 10216 विकसित की है — अपने क्षेत्र के केवीके से पूछें कि क्या यह नई किस्म वहाँ उपलब्ध है।
पूसा 372 को परीक्षणों में ‘चेक’ किस्म के रूप में क्यों उपयोग किया जाता है?
क्योंकि यह तीन दशकों से तीन कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उगाई जा रही है और इसका प्रदर्शन अच्छी तरह दर्ज व स्थिर है, राष्ट्रीय परीक्षण इसे उस ज्ञात आधार-रेखा के रूप में उपयोग करते हैं जिसके मुक़ाबले नई पछेती-बुवाई चना किस्मों को परखा जाता है।
स्रोत: Molecular Breeding and Drought Tolerance in Chickpea — PMC, Identification of multi-race Fusarium wilt resistance in chickpea using rapid hydroponic phenotyping — Phytopathologia Mediterranea. संपादकीय नीति.
