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चनारबीखुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

JGK-1 (kabuli)

Kak-2 जैसी ही प्रीमियम, बहुत बड़े दाने वाली निर्यात रेखा का मोटा-दाना काबुली प्रकार, देसी से बेहतर मिट्टी और सख़्त प्रबंधन माँगता। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नरबी
पकने की अवधि105–120 दिन
अपेक्षित उपजमध्यम–उच्च
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
चना
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
105–120 दिन
अपेक्षित उपज
मध्यम–उच्च
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
जारी 2002 · JNKVV (जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय), जबलपुर — मध्य क्षेत्र (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाक़ा) के लिए

इस किस्म के बारे में

JGK-1 (जवाहर चना-1), 2002 में JNKVV (जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय), जबलपुर द्वारा जारी, एक बड़े दाने वाला, कम अवधि का काबुली चना है जो मध्य क्षेत्र — मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाक़े — के लिए अनुशंसित है, उकठा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी और 110–115 दिन में 15–18 क्विंटल/हेक्टेयर उपज देने वाला।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि105–120 दिन
    उपज क्षमतामध्यम–उच्च
    रोग-प्रतिरोधमध्यम; काबुली आमतौर पर देसी से अधिक रोग-संवेदनशील
    मिट्टीदोमट
    सीज़नरबी

उपज व अवधि

पकने की अवधि

105–120 दिन

अपेक्षित उपज

मध्यम–उच्च

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • मध्यम; काबुली आमतौर पर देसी से अधिक रोग-संवेदनशील

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रखने योग्य बातें

  • स्रोतित अनुशंसा-क्षेत्र (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, बुंदेलखंड-उत्तर प्रदेश) इस रिकॉर्ड के मौजूदा states फ़ील्ड (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक) से केवल आंशिक रूप से मेल खाता है: JNKVV की जारी सामग्री में कर्नाटक का नाम नहीं है, जबकि गुजरात और उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाक़ा है — चिह्नित किया गया, संपादित नहीं।
  • स्रोतित 110–115 दिन की अवधि और 15–18 क्विंटल/हेक्टेयर उपज दोनों इस रिकॉर्ड के मौजूदा 105–120 दिन और "मध्यम–उच्च" फ़ील्ड के क़रीब बैठते हैं — उचित पुष्टि, बदलाव की आवश्यकता नहीं।
  • JGK-1 को बाद में एक प्रजनन जनक के रूप में भी उपयोग किया गया (Phule G 0517 के साथ क्रॉस कर काबुली किस्म माधव बनाई गई) — यह काबुली प्रजनन में इसके महत्व का संकेत है, हालाँकि उस संतति किस्म के लिए मिले दाना-वज़न व अन्य आँकड़े माधव के हैं, JGK-1 के नहीं, और इस रिकॉर्ड में शामिल नहीं किए गए।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

"JGK-1" नाम का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है जवाहर ग्राम काबुली-1, जिसे JNKVV, जबलपुर ने जारी किया।

JGK-1 कब और कहाँ जारी हुई?

2002 में JNKVV, जबलपुर द्वारा मध्य क्षेत्र (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, बुंदेलखंड-उत्तर प्रदेश) के लिए जारी।

इस फसल पेज की दूसरी काबुली किस्म काक-2 से JGK-1 की तुलना कैसी है?

दोनों निर्यात/प्रीमियम रेखा के मोटे-दाना काबुली प्रकार हैं, पर JGK-1 मध्य क्षेत्र के लिए भारतीय (JNKVV) किस्म है जबकि काक-2 (ICCV 92311) ICRISAT की किस्म है जो सबसे अधिक आंध्र प्रदेश में अपनाई गई — दोनों की प्रजनन उत्पत्ति व लक्षित राज्य अलग हैं।

JGK-1 कितनी उपज और कितनी अवधि में देती है?

JNKVV की जारी सामग्री के अनुसार 110–115 दिन में 15–18 क्विंटल/हेक्टेयर।

क्या JGK-1 रोग-प्रतिरोधी है?

स्रोतित सामग्री इसे उकठा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी बताती है, जो इस रिकॉर्ड की मौजूदा "मध्यम" diseaseResistance रेटिंग से मेल खाता है।