NRCHB 101
भाकृअनुप-डीआरएमआर भरतपुर से जारी — भारत की पहली जारी सरसों हाइब्रिड, नर-बंध्यता तकनीक पर आधारित, और अब भी वह उपज सीमा जिससे बाद की हाइब्रिड किस्मों को मापा जाता है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- सरसों
- प्रकार
- हाइब्रिड
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 135–140 दिन
- अपेक्षित उपज
- 25–28 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- लगभग 2008–2009 में अधिसूचित · ICAR-डीआरएमआर (अब ICAR-IIRMR), भरतपुर · ज़ोन III व ज़ोन V, देर से बुवाई व सिंचित स्थिति
इस किस्म के बारे में
एनआरसीएचबी 101 को ICAR-डीआरएमआर (अब ICAR-IIRMR), भरतपुर ने संस्थान की अपनी मोरिकांडिया साइटोप्लाज़्मिक नर-बंध्यता तकनीक पर आधारित हाइब्रिड के रूप में विकसित किया — वही तकनीक जिसने भारत की पहली जारी सरसों हाइब्रिड को संभव बनाया। इसे लगभग 2008–2009 में ज़ोन III (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड व राजस्थान के कुछ हिस्से) व ज़ोन V (बिहार, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम व छत्तीसगढ़) में देर से बुवाई व सिंचित खेती के लिए अधिसूचित किया गया। राजस्थान भर के AICRP फ्रंटलाइन प्रदर्शनों में इसने औसतन लगभग 2,122 किलो/हेक्टेयर उपज दी है — जिन किस्मों की जगह इसने ली, उनसे लगभग 19–20% ज़्यादा।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- कटाईराजस्थान भर के AICRP फ्रंटलाइन प्रदर्शनों में NRCHB 101 ने औसतन लगभग 2,122 किलो/हेक्टेयर उपज दी है — किसानों की पहले की किस्मों से लगभग 19–20% ज़्यादा
उपज व अवधि
पकने की अवधि
135–140 दिन
अपेक्षित उपज
25–28 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- भारत की पहली जारी सरसों हाइब्रिड — वह संदर्भ बिंदु जिससे बाद की हाइब्रिड सरसों प्रजनन परियोजनाओं को मापा जाता है
- संस्थान की अपनी मोरिकांडिया CGMS तकनीक पर आधारित, जो भारतीय सरसों में भरोसेमंद हाइब्रिड बीज उत्पादन के लिए ख़ास तौर पर विकसित की गई
- राजस्थान भर के AICRP फ्रंटलाइन प्रदर्शनों में किसानों की मौजूदा किस्मों से 19–20% ज़्यादा उपज दर्ज
ध्यान रखने योग्य बातें
- ख़ासतौर पर ज़ोन III व ज़ोन V में देर से बुवाई व सिंचित स्थिति के लिए सुझाई गई; इस बुवाई-खिड़की व इन क्षेत्रों से बाहर इसका प्रदर्शन उतना स्थापित नहीं
- हाइब्रिड होने के कारण हर मौसम नया बीज ख़रीदना पड़ता है, पिछली फ़सल से बचाया हुआ बीज नहीं चलता
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- राजस्थान
- हरियाणा
- उत्तर प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एनआरसीएचबी 101 सरसों क्या है?
भारत की पहली जारी सरसों हाइब्रिड, जिसे ICAR-डीआरएमआर (अब ICAR-IIRMR), भरतपुर ने संस्थान की अपनी मोरिकांडिया नर-बंध्यता तकनीक से विकसित किया।
एनआरसीएचबी 101 कब जारी हुई?
ज़ोन III व ज़ोन V में देर से बुवाई व सिंचित खेती के लिए लगभग 2008–2009 में अधिसूचित।
एनआरसीएचबी 101 की उपज कितनी है?
राजस्थान भर के AICRP फ्रंटलाइन प्रदर्शनों में औसतन लगभग 2,122 किलो/हेक्टेयर उपज, जिन किस्मों की जगह ली उनसे लगभग 19–20% ज़्यादा।
एनआरसीएचबी 101 के लिए कौन-से क्षेत्र उपयुक्त हैं?
ज़ोन III (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान के कुछ हिस्से) व ज़ोन V (बिहार, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़), देर से बुवाई व सिंचित स्थिति में।
स्रोत: ICAR-DRMR Bharatpur — Rapeseed-Mustard Varieties Developed. संपादकीय नीति.
