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धानखरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

IR 64

कई राज्यों में उगाई जाने वाली उच्च-उपज, व्यापक रूप से अनुकूलित किस्म; लंबा रिकॉर्ड, पर कुछ क्षेत्रों में वर्तमान ब्लास्ट नस्लों की जाँच ज़रूरी। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि115–120 दिन
अपेक्षित उपज55–60 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

फसल
धान
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
115–120 दिन
अपेक्षित उपज
55–60 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
चिकनी / काली मिट्टी
जारी
आईआरआरआई (अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान), फ़िलीपींस — 1985 में जारी; इसके तुरंत बाद भारत व कई अन्य देशों में अपनाई गई

इस किस्म के बारे में

आईआर 64 एक धान किस्म है, जिसे आईआरआरआई (अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान), फ़िलीपींस ने IR5657-33-2-1 × IR2061-465-1-5-5 के संकरण से विकसित किया, 1985 में जारी। इसकी पूर्ण वंशावली 19 पारंपरिक धान किस्मों तक जाती है। उच्च उपज को अच्छी खाने व पकाने की गुणवत्ता के साथ मिलाने के लिए मूल्यवान, यह जारी होने के बाद तेज़ी से भारत, भूटान, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम व कई अन्य देशों में फैली, दो दशकों के भीतर 1 करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई जाने लगी — जिसने इसे "मेगा वैरायटी" की मान्यता दिलाई।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि115–120 दिन
    उपज क्षमता55–60 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधजीवाणु झुलसा और भूरे फुदके के प्रति प्रतिरोधी; ब्लास्ट-प्रतिरोध क्षेत्र के हिसाब से बदलता है
    मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

115–120 दिन

अपेक्षित उपज

55–60 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रखने योग्य बातें

  • आईआर 64 एक फ़िलीपींस-प्रजनित किस्म है, जो भारत में अपनाई गई, न कि किसी भारतीय संस्थान की रिलीज़ — इस रिकॉर्ड की मौजूदा नोट फ़ील्ड ("कई राज्यों में उगाई जाने वाली उच्च-उपज, व्यापक रूप से अनुकूलित किस्म") इसके अनुरूप है, हालाँकि अंतरराष्ट्रीय प्रजनन उत्पत्ति इस रिकॉर्ड में पहले न शामिल नया विवरण है।
  • इस चरण में किसी प्राथमिक स्रोत से भारत-विशिष्ट उपज, अवधि या राज्य-अनुशंसा संख्याएँ नहीं मिलीं — इस रिकॉर्ड की मौजूदा "55–60 क्विंटल/हेक्टेयर" yieldPotential, "115–120 दिन" duration व तीन-राज्य फ़ील्ड को कार्यशील संदर्भ के रूप में छोड़ा गया है, अपुष्ट पर खंडित नहीं।
  • किस्म का वैश्विक "मेगा वैरायटी" दर्जा (रिलीज़ के दो दशकों के भीतर 1 करोड़+ हेक्टेयर) यह समझाने वाला नया संदर्भ है कि आईआर 64 अपनी मूल रिलीज़ के दशकों बाद भी इतनी व्यापक रूप से क्यों उगाई जाती है — यह इस रिकॉर्ड के मौजूदा नोट से संबंधित है कि इसे "कुछ क्षेत्रों में वर्तमान ब्लास्ट नस्लों की जाँच ज़रूरी" है, इसकी उम्र को देखते हुए, इसका खंडन नहीं करता।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • तमिलनाडु
  • कर्नाटक
  • आंध्र प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आईआर 64 कहाँ विकसित हुई?

फ़िलीपींस में आईआरआरआई (अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान) में, IR5657-33-2-1 × IR2061-465-1-5-5 के संकरण से, 1985 में जारी — यह किसी भारतीय संस्थान का प्रजनन नहीं, हालाँकि इसे जारी होने के तुरंत बाद भारत में अपनाया गया।

आईआर 64 को "मेगा वैरायटी" क्यों कहा जाता है?

क्योंकि यह रिलीज़ के बाद इतनी तेज़ी से फैली कि दो दशकों के भीतर विश्व भर में 1 करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई जाने लगी — एक धान किस्म के लिए असामान्य रूप से व्यापक व तेज़ अपनाव।

आईआर 64 की वंशावली कितनी पुरानी है?

इसकी पूर्ण वंशावली 19 पारंपरिक धान किस्मों तक जाती है, जो एक ही उच्च-प्रदर्शन रेखा में संचित दशकों के प्रजनन कार्य को दर्शाती है।

लंबे रिकॉर्ड के बावजूद आईआर 64 को अभी भी ब्लास्ट-नस्ल जाँच की ज़रूरत क्यों है?

धान ब्लास्ट कवक समय के साथ नई नस्लें विकसित करता है, और 1985 में जारी किस्म उस समय ज्ञात ब्लास्ट नस्लों के विरुद्ध प्रजनित थी — इस रिकॉर्ड की मौजूदा नोट फ़्लैग करती है कि कुछ क्षेत्रों में वर्तमान-पीढ़ी की ब्लास्ट नस्लें आईआर 64 के मूल प्रतिरोध से पूरी तरह ढकी नहीं हो सकतीं।

भारत के अलावा कौन से देश आईआर 64 उगाते हैं?

यह भूटान, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम व एशिया व अफ़्रीका के कई अन्य देशों में भी जारी हुई व व्यापक रूप से उगाई गई।