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धानखरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

Sahbhagi Dhan

बारानी ऊँची ज़मीन और अनिश्चित मानसून वाले क्षेत्रों के लिए विकसित छोटी अवधि की, सूखा-सहनशील किस्म। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि100–110 दिन
अपेक्षित उपज40 क्विंटल/हेक्टेयर तक (बारानी)
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
धान
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
100–110 दिन
अपेक्षित उपज
40 क्विंटल/हेक्टेयर तक (बारानी)
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
आईआरआरआई (अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान), अपलैंड राइस रिसर्च कंसोर्टियम के तहत — 2009 में पहचानी गई, 2010 में भारत में जारी; बांग्लादेश (बीआरआरआई धान 56) व नेपाल (सूखा धान 3) में भी जारी

इस किस्म के बारे में

सह्भागी धान (प्रजनन रेखा IR74371-70-1-1) एक सूखा-सहनशील धान किस्म है, जिसे आईआरआरआई में 1997 से प्रजनक ब्रिजित कोर्टोइस ने अपलैंड राइस रिसर्च कंसोर्टियम (URRC) के तहत, IR55419-04 × 'वे रारेम' के संकरण से विकसित किया। इसे 2009 में पहचाना गया और 2010 में भारत में खेती हेतु जारी किया गया। गंभीर सूखे की स्थिति में भी यह 1–2 टन/हेक्टेयर दाना दे सकती है, जहाँ पारंपरिक उच्च-उपज किस्में कुछ भी नहीं देतीं — वही मूल प्रजनन रेखा बांग्लादेश में 'बीआरआरआई धान 56' व नेपाल में 'सूखा धान 3' के रूप में भी जारी हुई।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि100–110 दिन
    उपज क्षमता40 क्विंटल/हेक्टेयर तक (बारानी)
    रोग-प्रतिरोधझुलसा (ब्लास्ट) के प्रति प्रतिरोधी; मुख्य रूप से सूखा-सहनशीलता के लिए विकसित
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

100–110 दिन

अपेक्षित उपज

40 क्विंटल/हेक्टेयर तक (बारानी)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रखने योग्य बातें

  • "गंभीर सूखे में 1–2 टन/हेक्टेयर" संख्या विशेष रूप से तनाव-स्थितियों में प्रदर्शन बताती है, किस्म की पूर्ण-क्षमता उपज नहीं — यह इस रिकॉर्ड की मौजूदा "40 क्विंटल/हेक्टेयर तक (बारानी)" yieldPotential फ़ील्ड से विरोधाभासी नहीं है, जो सामान्य बारानी स्थितियों को दर्शाती है, गंभीर सूखे को नहीं।
  • इस चरण में किसी प्राथमिक स्रोत से भारत-विशिष्ट राज्य-अनुशंसा या सटीक अवधि संख्याएँ नहीं मिलीं — इस रिकॉर्ड की मौजूदा "100–110 दिन" duration व तीन-राज्य (ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़) फ़ील्ड को कार्यशील संदर्भ के रूप में छोड़ा गया है, अपुष्ट पर खंडित नहीं।
  • बांग्लादेश (बीआरआरआई धान 56) व नेपाल (सूखा धान 3) में सहोदर रिलीज़ इस रिकॉर्ड में पहले न शामिल नया संदर्भ हैं, जो दर्शाता है कि यह एक प्रजनन रेखा दक्षिण एशिया की सूखा-प्रवण धान पट्टियों में कितनी दूर तक फैली।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • ओडिशा
  • झारखंड
  • छत्तीसगढ़

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सह्भागी धान को किसने विकसित किया और यह भारत में कब जारी हुई?

आईआरआरआई प्रजनक ब्रिजित कोर्टोइस ने 1997 से अपलैंड राइस रिसर्च कंसोर्टियम के तहत इसे विकसित किया; इसे 2009 में पहचाना गया और 2010 में भारत में खेती हेतु जारी किया गया।

गंभीर सूखे में सह्भागी धान कितना अच्छा प्रदर्शन करती है?

गंभीर सूखे की स्थिति में भी यह 1–2 टन/हेक्टेयर दाना दे सकती है, जहाँ पारंपरिक उच्च-उपज किस्में कुछ भी नहीं देतीं — यह एक तनाव-स्थिति संख्या है, इसकी पूर्ण बारानी उपज क्षमता नहीं।

क्या सह्भागी धान भारत के बाहर भी उगाई जाती है?

हाँ — वही मूल प्रजनन रेखा बांग्लादेश में 'बीआरआरआई धान 56' व नेपाल में 'सूखा धान 3' के रूप में भी जारी हुई, जो दक्षिण एशिया के सूखा-प्रवण धान क्षेत्रों तक पहुँची।

सह्भागी धान की जनक वंशावली क्या है?

यह IR55419-04 × 'वे रारेम' के संकरण से आती है, जो 1997 में आईआरआरआई में प्रजनन रेखा पदनाम IR74371-70-1-1 के तहत बनाया गया।

सह्भागी धान विशेष रूप से बारानी ऊँची ज़मीन के लिए उपयुक्त क्यों है?

इसे अपलैंड राइस रिसर्च कंसोर्टियम के तहत विशेष रूप से सूखा-सहनशीलता के लिए प्रजनित किया गया, जो सुनिश्चित-सिंचाई वाली निचली भूमि की बजाय अनिश्चित मानसून वाले क्षेत्रों को लक्षित करता है — यह इस रिकॉर्ड की मौजूदा नोट फ़ील्ड फ़्रेमिंग से मेल खाता है।