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राजमाखरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

Amber

उत्तर भारतीय पहाड़ों व मैदानों में उगाई जाने वाली मोटे, हल्के-रंग के बीज वाली किस्म, पकाने की गुणवत्ता व लंबे समय से बाज़ार-पहचान के लिए मूल्यवान। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि100–115 दिन
अपेक्षित उपज10–13 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
राजमा
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
100–115 दिन
अपेक्षित उपज
10–13 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
एक व्यापक रूप से पहचानी जाने वाली उत्तर-भारतीय राजमा किस्म; इस चरण में कोई विशिष्ट प्रजनन संस्थान या जारी-वर्ष पुष्ट नहीं हो सका — यह एक औपचारिक रूप से जारी किस्म की बजाय एक लंबे समय से स्थापित देसी/बाज़ार प्रकार हो सकती है

इस किस्म के बारे में

अंबर एक मोटे, हल्के-रंग के बीज वाली राजमा किस्म है, जो भारत की अनुशंसित उच्च-उपज राजमा किस्मों में सूचीबद्ध है, HUR-15, HUR-137, वीएल राजमा 63/125 व अन्य के साथ। यह जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व पड़ोसी राज्यों तक फैली उत्तर भारतीय पहाड़ी व मैदानी पट्टी में उगाई जाती है, पकाने की गुणवत्ता व लंबी बाज़ार-पहचान के लिए मूल्यवान।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि100–115 दिन
    उपज क्षमता10–13 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधकोई विशेष बना-बनाया प्रतिरोध नहीं
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

100–115 दिन

अपेक्षित उपज

10–13 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • कोई विशेष बना-बनाया प्रतिरोध नहीं

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रखने योग्य बातें

  • इस चरण में किसी स्रोत ने अंबर के लिए कोई विशिष्ट प्रजनन संस्थान या जारी-वर्ष पुष्ट नहीं किया, इस परियोजना की अधिकांश अन्य राजमा सहोदर किस्मों के विपरीत — यह लगातार केवल अनुशंसित किस्मों की सूचियों में एक नामित प्रविष्टि के रूप में दिखाई देती है, जो संकेत देता है कि यह एक औपचारिक रूप से प्रजनित व जारी की गई किस्म की बजाय एक लंबे समय से स्थापित देसी या बाज़ार प्रकार हो सकती है।
  • स्रोत सामग्री व्यापक रूप से प्रमुख राजमा-उगाने वाले राज्यों को सामूहिक रूप से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल व कर्नाटक बताती है — इस रिकॉर्ड का मौजूदा दो-राज्य फ़ील्ड (हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर) उस व्यापक तस्वीर के भीतर बैठता है, बिना अंबर के लिए नाम से विशेष रूप से पुष्ट या खंडित हुए।
  • इस चरण में कोई विरोधाभासी उपज या अवधि संख्याएँ नहीं मिलीं — इस रिकॉर्ड की मौजूदा "10–13 क्विंटल/हेक्टेयर" yieldPotential व "100–115 दिन" duration फ़ील्ड को कार्यशील संदर्भ के रूप में छोड़ा गया है, अपुष्ट पर खंडित नहीं।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अंबर राजमा को किसने विकसित किया?

इस चरण में कोई विशिष्ट प्रजनन संस्थान या जारी-वर्ष पुष्ट नहीं हो सका — इस डेटासेट की अधिकांश अन्य राजमा किस्मों के विपरीत, अंबर लगातार केवल अनुशंसित-किस्म सूचियों में एक नामित प्रविष्टि के रूप में दिखाई देती है, जो संकेत देता है कि यह एक लंबे समय से स्थापित देसी या बाज़ार प्रकार हो सकती है।

अंबर राजमा का बीज कैसा दिखता है?

मोटा व हल्के रंग का — एक दृष्टिगत रूप से विशिष्ट बीज प्रकार, विशेष रूप से पकाने की गुणवत्ता के लिए मूल्यवान।

अंबर राजमा कहाँ उगाई जाती है?

उत्तर भारतीय पहाड़ी व मैदानी पट्टी में, इस रिकॉर्ड के मौजूदा राज्यों हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर सहित — यह एक व्यापक राजमा-उगाने वाले क्षेत्र का हिस्सा है, जिसमें उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश भी शामिल हैं।

कोई बना-बनाया रोग-प्रतिरोध न होने के बावजूद अंबर राजमा अभी भी लोकप्रिय क्यों है?

इसकी लंबे समय से बाज़ार-पहचान व पकाने की गुणवत्ता ने आधुनिक रोग-प्रतिरोध प्रजनन के बिना भी माँग को मज़बूत बनाए रखा है — यह इस रिकॉर्ड की मौजूदा नोट फ़्रेमिंग से मेल खाता है।

अंबर की HUR-15 व वीएल राजमा किस्मों से तुलना कैसी है?

अंबर अनुशंसित उच्च-उपज राजमा किस्मों की सूचियों में उनके साथ दिखाई देती है, पर उनके विपरीत, इस चरण में इसका कोई पुष्ट प्रजनन संस्थान नहीं मिला — यह एक आधुनिक प्रजनित रिलीज़ की बजाय एक पुराने, बाज़ार-स्थापित प्रकार के रूप में पढ़ी जाती है।