HUR-137
जीबी पंत विश्वविद्यालय की बाद की किस्म, अच्छी तरह प्रबंधित तराई खेतों में HUR-15 से ज़्यादा उपज, मोटे, गहरे लाल बीज के साथ। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- राजमा
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 100–110 दिन
- अपेक्षित उपज
- 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- लोकप्रिय नाम "मालवीय राजमश 137" बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान, वाराणसी, उत्तर प्रदेश की ओर इशारा करता है — इसकी सहोदर HUR-15 जैसा ही पहचान-तनाव; सटीक जारी-वर्ष इस चरण में पुष्ट नहीं हो सका
इस किस्म के बारे में
HUR-137 को पुष्ट द्वितीयक स्रोतों में "मालवीय राजमश 137" के लोकप्रिय नाम से जाना जाता है, अपनी सहोदर HUR-15 (मालवीय राजमा 15) जैसी ही "मालवीय" नामकरण परंपरा — जो बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय से जुड़ी है। HUR-15 की तरह, यह एक संभावित बीएचयू प्रजनन उत्पत्ति की ओर इशारा करता है, जो इस रिकॉर्ड की मौजूदा नोट में बताई गई गोविंद बल्लभ पंत विश्वविद्यालय वाली विशेषता से अलग है। यह एक मोटे, गहरे-लाल बीज वाली किस्म है, जो उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अनुशंसित है, जिसे कहीं और अच्छी तरह प्रबंधित तराई खेतों में HUR-15 से अधिक उपज देने वाली बताया गया है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
100–110 दिन
अपेक्षित उपज
12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- सामान्य संवेदनशीलता
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
ध्यान रखने योग्य बातें
- HUR-15 के लिए फ़्लैग किया गया वही संस्थान-पहचान तनाव यहाँ भी लागू होता है: इस रिकॉर्ड की मौजूदा नोट जीबी पंत विश्वविद्यालय का नाम लेती है, पर लोकप्रिय नाम "मालवीय राजमश 137" बीएचयू के नामसाके मदन मोहन मालवीय की ओर इशारा करता है — इस चरण में किसी भी संस्थान से कोई सीधे प्राप्त प्राथमिक स्रोत इस सवाल को हल नहीं कर सका।
- इस रिकॉर्ड का मौजूदा दो-राज्य फ़ील्ड (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश) पहले से दोनों संभावित संस्थान-स्थानों को कवर करता है — HUR-15 के केवल-उत्तराखंड फ़ील्ड के विपरीत, इसलिए इस रिकॉर्ड की states कवरेज पहचान-अनिश्चितता से किसी भी तरह कम प्रभावित होती है।
- इस चरण में कोई विरोधाभासी उपज या अवधि संख्याएँ नहीं मिलीं — इस रिकॉर्ड की मौजूदा "12–15 क्विंटल/हेक्टेयर" yieldPotential व "100–110 दिन" duration फ़ील्ड को कार्यशील संदर्भ के रूप में छोड़ा गया है, अपुष्ट पर खंडित नहीं।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तराखंड
- उत्तर प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या HUR-137 जीबी पंत विश्वविद्यालय में विकसित हुई या बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में?
यह इस चरण में वास्तव में अनसुलझा है, अपनी सहोदर HUR-15 की तरह — इस रिकॉर्ड की मौजूदा नोट जीबी पंत विश्वविद्यालय का नाम लेती है, पर लोकप्रिय नाम "मालवीय राजमश 137" बीएचयू के संस्थापक मदन मोहन मालवीय की ओर इशारा करता है।
HUR-137 की HUR-15 से तुलना कैसी है?
HUR-137 को कहीं और बाद की रिलीज़ बताया गया है, अच्छी तरह प्रबंधित तराई खेतों में HUR-15 से अधिक उपज देने वाली, मोटे, गहरे-लाल बीज के साथ — दोनों "मालवीय" लोकप्रिय-नाम पैटर्न साझा करते हैं, जो एक साझा प्रजनन कार्यक्रम का संकेत देता है।
HUR-137 का बीज कैसा दिखता है?
मोटा व गहरा लाल, इस रिकॉर्ड के मौजूदा विवरण से मेल खाता है — एक दृष्टिगत रूप से विशिष्ट, बाज़ार-पहचान योग्य बीज प्रकार।
HUR-137 कितनी उपज देती है?
इस रिकॉर्ड की मौजूदा फ़ील्ड 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर देती है — इस चरण में इसकी पुष्टि या खंडन के लिए कोई स्वतंत्र रूप से स्रोत से लिया गया आँकड़ा नहीं मिला।
HUR-137 किन राज्यों में उगाई जाती है?
इस रिकॉर्ड की मौजूदा फ़ील्ड उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश सूचीबद्ध करती है — एक दो-राज्य हेज जो जीबी पंत/बीएचयू पहचान-सवाल की परवाह किए बिना दोनों संभावित संस्थान-स्थानों को पहले से कवर करता है।
