Durgapura Meetha
गरम, शुष्क दशाओं के लिए एक राजस्थान (दुर्गापुरा) चयन — गोल से अंडाकार फल मीठे लाल गूदे के साथ, सूखे उत्तर-पश्चिम भर व नदी-तट रोपण में उगाया जाता जहाँ एक मज़बूत खुली-परागित प्रकार चाहिए।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- तरबूज़
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- ज़ायद / गर्मी
- पकने की अवधि
- पहली कटाई ~90 दिन
- अपेक्षित उपज
- 25–35 टन/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई / हल्की मिट्टी
इस किस्म के बारे में
दुर्गापुरा मीठा दुर्गापुरा, राजस्थान में उत्तर-पश्चिम के गरम, शुष्क इलाक़ों के लिए चुनी गई एक खुली-परागित तरबूज़ है। फल गोल से अंडाकार, मीठे लाल गूदे के साथ, और पौधा कई हाइब्रिडों से सूखी तपिश व ख़राब बलुई मिट्टी बेहतर सहता, जो इसे नदी-तट (दियारा) रोपण व बारानी खेतों के लिए एक आम चुनाव बनाता जहाँ बचाने-योग्य बीज वाली एक सस्ती, मज़बूत खुली-परागित किस्म चाहिए। यह लगभग 90 दिन में पकती।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
पहली कटाई ~90 दिन
अपेक्षित उपज
25–35 टन/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- सूखी तपिश में मज़बूत; सामान्य कद्दूवर्गीय रोग निगरानी
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- सूखी तपिश व ख़राब बलुई मिट्टी सहनशील — शुष्क व नदी-तट खेती को सूट करता
- मीठा लाल गूदा; मज़बूत, भरोसेमंद खुली-परागित प्रकार
- बीज बचाया जा सकता; एक हाइब्रिड से सस्ता
ध्यान रखने योग्य बातें
- बड़े व्यावसायिक हाइब्रिडों से कम उपज क्षमता व कम छिलका-कड़ापन
- कोई विशेष रोग प्रतिरोध नहीं — उकठा व मिल्ड्यू संभालें व कद्दूवर्गीय से फ़सल-चक्र बदलें
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- राजस्थान
- हरियाणा
- उत्तर प्रदेश
- गुजरात
- मध्य प्रदेश
