Pusa Bedana
IARI की ट्रिप्लॉइड बीज-रहित तरबूज़। फल गोल से अंडाकार, गूदा गुलाबी-लाल और बीज-रहित। ऊँचे दाम के शहरी बाज़ार के लिए उगाई जाती है। फल बाँधने के लिए पराग देने वाली एक आम (डिप्लॉइड) किस्म साथ लगानी पड़ती है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- तरबूज़
- प्रकार
- ट्रिप्लॉइड बीज-रहित (साथ में परागण वाली किस्म चाहिए)
- सीज़न
- ज़ायद / गर्मी
- पकने की अवधि
- पहली तुड़ाई लगभग 95–100 दिन में
- अपेक्षित उपज
- 25–35 टन/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई / हल्की मिट्टी
- रोग-प्रतिरोध
- कोई खास रोग-प्रतिरोध का दावा नहीं
- जारी
- ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने जारी की
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
पूसा बेदाना ICAR-IARI, नई दिल्ली की ट्रिप्लॉइड (बीज-रहित) तरबूज़ है, जिसे ऊँचे दाम के शहरी ताज़े बाज़ार के लिए बनाया गया, जहाँ बीज-रहित फल का दाम ज़्यादा मिलता है। गूदा गुलाबी-लाल है और उसमें कड़े बीज नहीं हैं। ट्रिप्लॉइड पौधा अपना जीवित पराग नहीं बनाता। इसलिए पराग के स्रोत के रूप में बीच-बीच में एक आम डिप्लॉइड किस्म लगानी ज़रूरी है, लगभग चार कतार में एक कतार, या तीन पौधे में एक पौधा। वरना लगभग कोई फल नहीं बँधेगा। यह लगभग 95–100 दिन में पकती है। इसका बीज महँगा है और हर साल नया खरीदना पड़ता है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
प्रीमियम शहरी ख़रीदारों को बेचते हैं जो बिना बीज वाले फल के ज़्यादा पैसे देते हैं, तो पूसा बेदाना चुनिए। साथ में आपको परागणकर्ता की योजना भी सँभालनी होगी। एक सामान्य डिप्लॉइड किस्म लगभग चार में एक क़तार या तीन में एक पौधे के अनुपात में बीच में लगाना। वरना लगभग कोई फल नहीं बँधेगा। गूदा गुलाबी-लाल और सख़्त बीजों से मुक्त है, लगभग 95–100 दिन में तैयार होता है, और उपज 25–35 टन/हेक्टेयर है। पेच: बीज महँगा और अंकुरण में नख़रे वाला है, इसलिए अक्सर पौध बनाकर लगाया जाता है, कोई ख़ास रोग-रोधकता नहीं है, और हर साल नया बीज ख़रीदना पड़ता है। कम बीज-लागत पर ज़्यादा उपज के लिए किरण लीजिए। पास की सस्ती बिक्री के लिए शुगर बेबी लीजिए।
बुवाई और खेती
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- बीज-रहित गूदा, जो शहरी ताज़े बाज़ार में असली ऊँचा दाम दिलाता है
- गुलाबी-लाल, मीठा गूदा; खरीदारों को पसंद आता है
ध्यान रखने योग्य बातें
- बीच-बीच में डिप्लॉइड परागण किस्म लगानी ज़रूरी है (लगभग 4 कतार में 1 कतार), वरना फल नहीं बँधेंगे। यह योजना और देखभाल की असली शर्त है
- ट्रिप्लॉइड बीज महँगा है और जमने में नखरेबाज़ है। अक्सर इसकी पौध तैयार करके रोपी जाती है
- कोई खास रोग-प्रतिरोध नहीं। हाइब्रिड बीज हर साल नया खरीदना पड़ता है
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- दिल्ली
- पंजाब
- हरियाणा
- उत्तर प्रदेश
- महाराष्ट्र
परागणकर्ता योजना: चार में एक क़तार, या तीन में एक पौधा
पूसा बेदाना ख़ुद परागण नहीं कर सकता। उसके पास लगा सामान्य डिप्लॉइड तरबूज़ पराग देता है। लगभग चार में एक क़तार, या तीन में एक पौधा, वही परागणकर्ता होना चाहिए।
बोने से पहले नक़्शा तय कीजिए। परागणकर्ता की क़तारें या पौधे काग़ज़ पर निशान लगाकर रखिए। उन्हें इस तरह बोइए कि वे पूसा बेदाना के साथ ही फूलें, क्योंकि देर से आया पराग काम नहीं आता।
आमदनी सिर्फ़ बिना बीज वाली क़तारों से गिनिए। आपकी चौथाई क़तारें, या एक-तिहाई पौधे, परागणकर्ता हैं, इसलिए खेत में बिना बीज का हिस्सा दिखने से छोटा है।
रोपाई सामग्री कहाँ से आती है
यह हाइब्रिड है, इसलिए अपनी फ़सल से रखा बीज अगली बार वैसा नहीं उगता। पौधों की ऊँचाई, पकने का समय और उपज — सब ऊपर-नीचे हो जाती है। हर सीज़न नया प्रमाणित बीज ख़रीदिए और बोरे का टैग कटाई तक सँभालकर रखिए।
दूसरी किस्मों से तुलना
तरबूज़ की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | पकने की अवधि | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Arka Jyoti | सामान्य बाज़ार और मध्यम से दूर की ढुलाई के लिए 6–8 किलो के गोल, लाल गूदे वाले फल देने वाली, बरसों से परखी हुई F1 संकर किस्म | पहली तुड़ाई लगभग 95 दिन में | 35–45 टन/हेक्टेयर | कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना |
| Arka Manik | ऐसे खेतों के लिए रोग-रोधी, खुले परागण वाली, सख़्त छिलके की तरबूज़ किस्म जहाँ कद्दूवर्गीय रोगों का दबाव ज़्यादा है और ढुलाई लंबी है | पहली तुड़ाई लगभग 95–100 दिन में | 45–60 टन/हेक्टेयर | कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, तेलंगाना |
| Arka Muthu | बौनी, छोटी बेल वाली तरबूज़ किस्म, जिसके 2.5–3 किलो के एक आदमी वाले फल हैं, पास-पास रोपाई, उठी क्यारी की ड्रिप, छोटे खेत और संरक्षित खेती के लिए | पहली तुड़ाई लगभग 80–90 दिन में | घनी रोपाई में 35–45 टन/हेक्टेयर | कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र |
| Durgapura Meetha | गर्म, सूखे उत्तर-पश्चिम और नदी-तल (दियारा) की रोपाई के लिए मज़बूत, सस्ती, खुले परागण वाली तरबूज़ किस्म | पहली तुड़ाई लगभग 90 दिन में | 25–35 टन/हेक्टेयर | राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश |
| Kiran | दूर के शहरी बाज़ारों को सप्लाई करने वाले बड़े खेतों के लिए ऊँची उपज वाली F1 संकर किस्म, जिसका फल 10–12 किलो का बड़ा अंडाकार और छिलका सख़्त धारीदार है | पहली तुड़ाई लगभग 90–95 दिन में | 45–55 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, गुजरात |
| Pusa Bedanaयही पेज | प्रीमियम शहरी ताज़ा बाज़ार के लिए ट्रिप्लॉइड बिना बीज वाला तरबूज़, जो परागण वाली डिप्लॉइड किस्म के साथ उगाया जाता है | पहली तुड़ाई लगभग 95–100 दिन में | 25–35 टन/हेक्टेयर | दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र |
| Sugar Baby | सबसे ज़्यादा उगाई जाने वाली खुले परागण की तरबूज़ किस्म है। यह छोटी और मीठी है, सस्ते बीज के साथ। यह छोटे किसानों और नदी-तल के प्लॉट के लिए जो पास की मंडियों में बेचते हैं | पहली तुड़ाई लगभग 85–95 दिन में | 20–30 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और तरबूज़ का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके तरबूज़ के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर तरबूज़ किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरतरबूज़ की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में तरबूज़ की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में तरबूज़ का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
तरबूज़ के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर मैं पूसा बेदाना बिना परागणकर्ता के लगाऊँ तो क्या होगा?
लगभग कोई फल नहीं बँधेगा। ट्रिप्लॉइड पौधा अपना कोई चालू पराग नहीं बनाता। इसलिए इसे पराग के स्रोत के रूप में बीच में लगी सामान्य डिप्लॉइड किस्म चाहिए। यह लगभग चार में एक क़तार या तीन में एक पौधा। बीज ख़रीदने और बुवाई की तारीख़ तय करने से पहले इसकी योजना बनाइए, और ज़मीन बचाने के लिए परागणकर्ता को मत हटाइए।
मेरे खेत का कितना हिस्सा परागणकर्ता में जाएगा?
चार में एक क़तार पर चौथाई क़तारें परागणकर्ता की होती हैं। तीन में एक पौधे पर एक-तिहाई पौधे। यानी आपकी क़तारों का सिर्फ़ लगभग तीन-चौथाई, या पौधों का दो-तिहाई, बिना बीज वाला पूसा बेदाना है। आमदनी का हिसाब उसी हिस्से पर लगाइए, पूरे खेत पर नहीं।
पूसा बेदाना की पौध क्यों बनाई जाती है?
पेज कहता है कि ट्रिप्लॉइड बीज महँगा है और अंकुरण में नख़रे वाला है। ट्रे या गमलों में पौध बनाने से हर बीज पर नज़र रखी जा सकती है और सिर्फ़ अच्छी तरह उगी पौध लगाई जा सकती है। इससे आपका महँगा बीज बचता है। उतना ही ख़रीदिए जितना आपकी परागणकर्ता योजना को चाहिए।
क्या किरण की तुलना में बिना बीज वाला फ़ायदे का है?
पूसा बेदाना की उपज 25–35 टन/हेक्टेयर है और किरण की 45–55, और आप बीज पर ज़्यादा ख़र्च करते हैं तथा परागणकर्ता को ज़मीन देते हैं। इसलिए पूसा बेदाना तभी फ़ायदा देता है जब आपके शहरी बाज़ार में बिना बीज का प्रीमियम इन सबको पूरा करने लायक़ बड़ा हो। लगाने से पहले ख़रीदार से बिना बीज वाले और साधारण तरबूज़ का प्रति किलो भाव पूछिए।
क्या पूसा बेदाना का बीज बचा सकते हैं?
नहीं। बीज हर साल नया ख़रीदा जाता है, और बिना बीज वाले फल में बचाने लायक़ बीज होता ही नहीं। यह बीज ख़ास क्रॉस से आता है और महँगा है। भरोसेमंद विक्रेता से लीजिए, पैकेट लेबल सँभालकर रखिए और अंकुरण जाँच की तारीख़ पूछिए।
