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तरबूज़ज़ायद / गर्मीखुली-परागितअपडेट किया गया 6 सितंबर 2026

Sugar Baby

भारत में सबसे व्यापक रूप से उगाया जाने वाला खुली-परागित तरबूज़ — छोटा, गोल, बहुत गहरा हरा, पतले-छिलके वाला 3–5 किग्रा फल, गहरे लाल, मीठे, कुरकुरे गूदे के साथ। अगेता व भरोसेमंद, पर पतला छिलका चोटिल होता व दूर नहीं जाता, इसलिए यह नज़दीकी बाज़ारों को सूट करता।

सीज़नज़ायद / गर्मी
पकने की अवधिपहली कटाई ~85–95 दिन
अपेक्षित उपज20–30 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीबलुई / हल्की मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
ज़ायद / गर्मी
पकने की अवधि
पहली कटाई ~85–95 दिन
अपेक्षित उपज
20–30 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
बलुई / हल्की मिट्टी

इस किस्म के बारे में

शुगर बेबी एक पुराना, खुली-परागित "आइसबॉक्स" तरबूज़ है और भारत में अब तक सबसे व्यापक रूप से उगाया जाने वाला खुली-परागित प्रकार। फल छोटा व गोल (3–5 किग्रा), बहुत गहरे हरे, पतले छिलके व गहरे लाल, मीठे, कुरकुरे गूदे के साथ। यह अगेता है — पहली कटाई लगभग 85–95 दिन में — और दशाओं की एक व्यापक रेंज भर भरोसेमंद, यही वजह है कि यह छोटे किसानों व नदी-तट फ़सल के लिए डिफ़ॉल्ट बना हुआ है। पतला छिलका इसकी मुख्य सीमा है: फल आसानी से चोटिल होता व लंबी-दूरी ढुलाई नहीं झेलता, इसलिए इसे नज़दीकी व क्षेत्रीय बाज़ारों में बेचना सबसे अच्छा।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधिपहली कटाई ~85–95 दिन
    उपज क्षमता20–30 टन/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधकोई विशेष प्रतिरोध नहीं; सामान्य उकठा व मिल्ड्यू निगरानी
    मिट्टीबलुई / हल्की मिट्टी
    सीज़नज़ायद / गर्मी

उपज व अवधि

पकने की अवधि

पहली कटाई ~85–95 दिन

अपेक्षित उपज

20–30 टन/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • दशाओं की एक व्यापक रेंज भर अगेता व भरोसेमंद
  • एक छोटे, एकल-परिवार फल आकार में गहरा लाल, मीठा, कुरकुरा गूदा
  • खुली-परागित, इसलिए बीज बचाया जा सकता
  • हाइब्रिड के मुक़ाबले सस्ता बीज

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पतला छिलका ढुलाई में चोटिल व फटता — सिर्फ़ नज़दीकी बाज़ारों को
  • कोई रोग प्रतिरोध नहीं — फ्यूज़ेरियम उकठा व मिल्ड्यू संभालने होते, और यह उसी ज़मीन पर कद्दूवर्गीय के बाद नहीं आना चाहिए

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • पश्चिम बंगाल
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र