वार्ट रोग (आलू)
कंद पर, ख़ासकर आँखों के पास, खुरदरे, फूलगोभी-जैसे वार्ट उगते — एक मृदा-जनित संगरोध फफूँद जिसके बीजाणु मिट्टी में दशकों बच सकते।
- रोगजनक
- Synchytrium endobioticum (मृदा फफूँद)
- फैलाव
- संक्रमित मिट्टी, कंद, औज़ार व खाद
- अनुकूल
- ठंडी, नम मिट्टी; संक्रमित रोपण सामग्री
- मुख्य जोखिम
- बिक्री-अयोग्य वार्ट कंद; दशकों तक मृदा-संक्रमण
परिचय
आलू का वार्ट रोग फफूँद Synchytrium endobioticum से होता, जो कंद पर, ख़ासकर आँखों के पास, खुरदरे, फूलगोभी-जैसे वार्ट (गाँठें) उगाती — कभी-कभी कंद जितने बड़े। मिट्टी-सतह के पास तने के आधार व स्टोलनों पर भी ऐसी वार्ट गाँठें दिख सकतीं। गाँठें पहले मलाई-सफ़ेद होतीं फिर पुरानी होने पर भूरी-काली होकर सड़ जातीं, और प्रभावित कंद बिक्री या खाने लायक नहीं रहते।
फफूँद मिट्टी में अत्यंत लंबे समय तक टिकने वाले सुप्त बीजाणुओं के रूप में रहती जो 20-40 साल तक संक्रामक रह सकते, और संक्रमित बीज-कंदों, औज़ार/जूते/खाद पर चिपकी दूषित मिट्टी, व संक्रमित मिट्टी ले जाते सिंचाई पानी से फैलती। इसी कारण वार्ट भारत में एक साधारण खेत-समस्या नहीं बल्कि अधिसूचित, संगरोध रोग माना जाता — खेत में पुष्टि होते ही नियंत्रण नियामक स्तर पर होता, और किसान के लिए सबसे भरोसेमंद उपाय वार्ट-प्रतिरोधी किस्म लगाना व संक्रमित खेत से मिट्टी, कंद या औज़ार कभी बाहर न ले जाना है।
कैसे पहचानें
- कंद पर, ख़ासकर आँखों के पास, खुरदरे, फूलगोभी-जैसे वार्ट (गाँठें) — कभी-कभी कंद जितने बड़े।
- मिट्टी-सतह के पास तने के आधार, स्टोलनों व कभी पत्ती-कक्षों पर भी ऐसी वार्ट गाँठें दिख सकतीं।
- गाँठें पहले मलाई-सफ़ेद होतीं फिर पुरानी होने पर भूरी-काली होकर सड़ जातीं; पौधा ऊपर से अक्सर कम ही लक्षण दिखाता।
- प्रभावित कंद बिक्री या खाने लायक नहीं रहते; भारी संक्रमित खेत अपनी ज़्यादातर बिक्री-योग्य फसल गँवा सकता।
कारण व कब
- फफूँद Synchytrium endobioticum से होता, जो मिट्टी में अत्यंत लंबे समय तक टिकने वाले सुप्त बीजाणुओं के रूप में रहती।
- संक्रमित बीज-कंदों, औज़ार/जूते/खाद पर चिपकी मिट्टी, व संक्रमित मिट्टी ले जाते सिंचाई पानी से फैलती।
- ठंडी, नम मिट्टी दशाओं से अनुकूल।
- भारत में यह अधिसूचित (संगरोध) रोग है — खेत में पुष्टि होते ही मिट्टी 20-40 साल तक संक्रामक रह सकती, इसलिए इसे केवल खेत-समस्या नहीं बल्कि नियामक समस्या माना जाता।
सांस्कृतिक व जैविक नियंत्रण
- यदि आप किसी ज्ञात-प्रभावित क्षेत्र में या पास हैं तो वार्ट-प्रतिरोधी/प्रतिरक्षित किस्म लगाएँ — कई जारी भारतीय किस्मों में यह गुण है; मौजूदा विकल्प अपने KVK या राज्य उद्यान विभाग से जाँचें।
- वार्ट-प्रभावित क्षेत्र से बीज-कंद, मिट्टी या खाद कभी साफ़ खेत में न लाएँ।
- यदि आपके खेत में वार्ट की पुष्टि हो, तो बिना अच्छी तरह साफ़ किए वहाँ से मिट्टी, कंद, कृषि-औज़ार या वाहन किसी अन्य खेत में न ले जाएँ।
- संदिग्ध वार्ट लक्षण अपने स्थानीय कृषि विभाग को बताएँ — नियंत्रण केवल फ़ार्म स्तर पर नहीं, क्षेत्र स्तर पर होता।
रासायनिक / बीज-उपचार
- मिट्टी संक्रमित होने के बाद वार्ट रोग का कोई व्यावहारिक रासायनिक इलाज नहीं — फफूँदनाशी सुप्त बीजाणु मिट्टी से नहीं हटाते।
- प्रबंधन प्रतिरोधी किस्मों व संक्रमित मिट्टी/कंद के सख़्त संगरोध पर टिका, छिड़काव पर नहीं।
- नियामक अधिकारी पुष्टि-संक्रमित खेत में आलू से लंबे समय (कई साल) फसल-चक्र की सलाह दे सकते, साथ ही जहाँ आलू लगाना ज़रूरी हो वहाँ प्रतिरोधी किस्में।
- यदि आपका खेत सकारात्मक पुष्टि हो तो अपने राज्य कृषि विभाग के विशेष नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन करें — यह स्वयं तय करने वाला छिड़काव निर्णय नहीं।
दोबारा न हो, इसके लिए
- हमेशा प्रमाणित, वार्ट-मुक्त स्रोत से बीज-कंद लें, किसी ज्ञात-प्रभावित क्षेत्र से कभी नहीं।
- वार्ट-इतिहास वाले किसी क्षेत्र में या पास नियमित रूप से प्रतिरोधी/प्रतिरक्षित किस्में लगाएँ।
- संक्रमित खेत की मिट्टी, औज़ार व वाहन हमेशा साफ़ खेतों से दूर रखें।
सबसे ज़्यादा जोखिम वाली फसलें
हमारी फसल गाइडों में जहाँ यह समस्या बताई गई है — पूरी पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ के लिए कोई फसल खोलें।
विचार करने योग्य किस्में
नामी बीज किस्में जिनकी इस समस्या के प्रति प्रतिरोधकता या संवेदनशीलता उनके अपने किस्म पेज पर बताई गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेरे आलू कंद पर आँखों के पास खुरदरी, फूलगोभी-जैसी गाँठें हैं — यह क्या है?
यह संभवतः वार्ट रोग (Synchytrium endobioticum) है, एक मृदा-जनित संगरोध फफूँद। प्रभावित कंद बिक्री लायक नहीं रहते, और खेत संक्रमित होने पर फफूँद के बीजाणु मिट्टी में दशकों बच सकते। भारत में यह अधिसूचित रोग है, इसलिए संदिग्ध लक्षण अपने स्थानीय कृषि विभाग को बताएँ, इसे साधारण खेत-समस्या मानकर न छोड़ें।
क्या मैं मिट्टी में छिड़काव या उपचार कर वार्ट रोग हटा सकता हूँ?
नहीं — संक्रमित मिट्टी से वार्ट रोग हटाने वाला कोई व्यावहारिक रासायनिक उपचार नहीं; सुप्त बीजाणु 20-40 साल तक संक्रामक रह सकते। असली नियंत्रण वार्ट-प्रतिरोधी किस्म लगाना और संक्रमित खेत से मिट्टी, कंद या औज़ार साफ़ खेत में सख़्ती से न ले जाना है।
कौन-सी आलू किस्में वार्ट रोग प्रतिरोधी हैं?
कई जारी भारतीय किस्मों में वार्ट रोग के प्रति प्रतिरोध या प्रतिरक्षा है — कुफरी ज्योति, कुफरी पुखराज व कुफरी बहार हमारे किस्म पेजों पर प्रतिरक्षित बताई गई हैं। ख़ासकर अगर आप किसी ज्ञात वार्ट-प्रभावित क्षेत्र में या पास खेती करते हैं, तो अपने क्षेत्र के लिए मौजूदा अनुशंसित प्रतिरोधी किस्में स्थानीय KVK से पक्की करें।
लक्षण और नियंत्रण उपाय ICAR, KVK और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ पर आधारित हैं; नाम लिया गया हर रसायन पंजीकृत उपयोग है। हमेशा उत्पाद का लेबल पढ़ें और अपनी फसल व क्षेत्र के लिए मात्रा पक्की करें। संपादकीय नीति.
