Kufri Bahar
सीपीआरआई शिमला से जारी — खाने और प्रसंस्करण दोनों के लिए उपयुक्त दोहरे-उद्देश्य वाली किस्म, कुफरी ज्योति के बाद उत्तरी मैदानों में सबसे ज़्यादा उगाई जाने वाली आलू किस्मों में से एक।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- आलू
- प्रकार
- रोपण सामग्री
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 90–100 दिन
- अपेक्षित उपज
- 300–350 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 1980 में जारी · ICAR-CPRI, शिमला · संकरण कुफरी रेड × गिनेके
इस किस्म के बारे में
कुफरी बहार को 1980 में ICAR-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI), शिमला ने कुफरी रेड × गिनेके के संकरण से जारी किया। यह अर्ध-सशक्त, इनपुट-अनुक्रियाशील मध्य-मौसम किस्म है जो गंगा के मैदानी क्षेत्र में सबसे ज़्यादा उगाई जाने वाली आलू किस्मों में से एक बन गई — इसके दोहरे-उद्देश्य वाले कंद खाने व प्रसंस्करण दोनों के लिए समान रूप से उपयुक्त हैं, और भंडारण में अच्छी टिकाऊ क्षमता के लिए भी जानी जाती है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
90–100 दिन
अपेक्षित उपज
300–350 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- दोहरे-उद्देश्य वाले कंद — खाने व प्रसंस्करण दोनों के लिए अच्छे, अकेले-उद्देश्य वाली किस्मों के उलट
- अर्ध-सशक्त, इनपुट-अनुक्रियाशील पौधा जो अच्छे प्रबंधन का बदला ठोस उपज से देता है
- भंडारण में अच्छी टिकाऊ क्षमता व धीमी बीज-क्षरण दर
ध्यान रखने योग्य बातें
- झुलसा से कोई अंतर्निहित सुरक्षा नहीं — अगेती व पछेती दोनों झुलसा के प्रति संवेदनशील, योजनाबद्ध छिड़काव ज़रूरी
- इनपुट-अनुक्रियाशील होने का मतलब है कि प्रबंधन में कमी होने पर उपज कुफरी ज्योति जैसी कम-इनपुट किस्म से ज़्यादा गिरती है
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- पंजाब
- बिहार
- पश्चिम बंगाल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कुफरी बहार को "दोहरे-उद्देश्य" वाला आलू क्या बनाता है?
इसके कंद खाने के ताज़े बाज़ार व प्रसंस्करण दोनों के लिए समान रूप से अच्छे काम करते हैं, उन किस्मों के उलट जो सिर्फ़ एक उपयोग के लिए बनी हैं — यही लचीलापन, साथ ही अच्छी भंडारण-टिकाऊ क्षमता, इसे गंगा के मैदानी क्षेत्र में व्यापक रूप से फैलने का कारण बनी।
स्रोत: KUFRI BAHAR variety profile — PotatoPro. संपादकीय नीति.
