BSMR 736
1996 में महाराष्ट्र के बदनापुर से विकसित और जारी की गई लंबी अवधि की अरहर किस्म। इसकी मुख्य विशेषता फ्यूज़ेरियम उकठा और बंध्य मोज़ेक रोग दोनों के प्रति प्रतिरोध है। महाराष्ट्र में इसका स्थापित अनुकूलन है और यह अभी भी अरहर अनुसंधान व बीज उत्पादन में उपयोग हो रही है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- अरहर (तूर)
- प्रकार
- अरहर की किस्म
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- लगभग 180–185 दिन
- बीज दर
- अकेली फसल के लिए लगभग 15 किलो/हेक्टेयर; महाराष्ट्र की प्रलेखित कपास-अंतरवर्ती प्रणाली में लगभग 5 किलो/हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- उपयुक्त उत्पादन परिस्थितियों में लगभग 12–18 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज
- उपयुक्त मिट्टी
- मध्यम से गहरी, अच्छी जल निकासी वाली काली मिट्टी तथा लंबी अवधि की अरहर के लिए उपयुक्त अन्य अच्छी जल निकासी वाली मिट्टियाँ
- जारी
- 1996 में महाराष्ट्र में मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान केंद्र, बदनापुर द्वारा जारी; वर्तमान में VNMKV, परभणी के अंतर्गत
इस किस्म के बारे में
बीएसएमआर 736 एक लंबी अवधि वाली, अनिश्चित वृद्धि वाली अरहर किस्म है, जिसे मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (अब VNMKV, परभणी) के कृषि अनुसंधान केंद्र, बदनापुर में विकसित किया गया। इसे 1996 में महाराष्ट्र में जारी किया गया। यह किस्म ICP 7217-4-1 × No. 148 के क्रॉस से विकसित हुई और अर्ध-फैलावदार पौधे, हरे तने व शाखाओं, पीले फूलों, पकने पर हल्की काली धारियों वाले हरे फलियों तथा लाल-भूरे दानों वाली बताई गई है। इसे महाराष्ट्र की अरहर उत्पादन परिस्थितियों के लिए विकसित किया गया और इसकी प्रमुख विशेषता फ्यूज़ेरियम उकठा तथा बंध्य मोज़ेक रोग दोनों के प्रति संयुक्त प्रतिरोध है। आधिकारिक किस्म रिकॉर्ड में इसकी औसत उपज लगभग 12–18 क्विंटल/हेक्टेयर और पकने की अवधि लगभग 180–185 दिन बताई गई है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयपर्याप्त मानसूनी वर्षा मिलने के बाद जून के मध्य में समय पर बुवाई करें; महाराष्ट्र के क्षेत्रीय परीक्षण में 15 जून की बुवाई बाद की तारीखों की तुलना में अधिक उपज वाली रही
- बीज दरअकेली फसल के लिए लगभग 15 किलो/हेक्टेयर; महाराष्ट्र की प्रलेखित कपास-अंतरवर्ती प्रणाली में लगभग 5 किलो/हेक्टेयर
- दूरीप्रलेखित मध्यम/लंबी अवधि की उत्पादन प्रणाली में लगभग 90 सेमी कतार दूरी और 20 सेमी पौध दूरी
- बुवाई विधिकतार में बुवाई या डिबलिंग उपयुक्त है। बीएसएमआर 736 को अकेली फसल तथा कपास-अरहर जैसी अंतरवर्ती प्रणालियों में उगाया जाता है।
- सिंचाईमुख्य रूप से वर्षा-आधारित खरीफ उत्पादन के लिए उपयुक्त। लंबे समय तक जलभराव से बचें। जहाँ सिंचाई उपलब्ध हो, वहाँ लंबे सूखे दौर में विशेषकर फूल आने और फलियाँ बनने के समय पूरक सिंचाई से उपज को सहारा मिल सकता है।
- उर्वरकस्थानीय मिट्टी परीक्षण और अरहर के लिए वर्तमान अनुशंसित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाएँ; प्राथमिक स्रोतों में इस किस्म के लिए अलग से प्रमाणित NPK खुराक नहीं मिली।
- कटाईआधिकारिक किस्म रिकॉर्ड के अनुसार सामान्यतः लगभग 180–185 दिन लगते हैं। जब अधिकांश फलियाँ पककर भूरी हो जाएँ और दाने पूरी तरह विकसित हो जाएँ तब कटाई करें; भंडारण से पहले दानों को अच्छी तरह सुखाएँ।
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- महाराष्ट्र के अरहर क्षेत्र की मध्यम से गहरी, अच्छी जल निकासी वाली काली मिट्टी विशेष रूप से उपयुक्त है। फसल को लंबे समय तक खड़े पानी में नहीं रखना चाहिए।
- सिंचाई
- अच्छी जल निकासी महत्वपूर्ण है। मध्यम और गहरी काली मिट्टी फसल के लिए उपयुक्त हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक जलभराव से बचना चाहिए।
जलवायु
- जलवायु
- महाराष्ट्र तथा व्यापक प्रायद्वीपीय अरहर पट्टी के अर्ध-शुष्क और वर्षा-आधारित खरीफ वातावरण के लिए अनुकूल किस्म। इसकी लंबी अवधि के कारण समय पर स्थापना और पर्याप्त फसल अवधि महत्वपूर्ण है।
उपज व अवधि
पकने की अवधि
लगभग 180–185 दिन
अपेक्षित उपज
उपयुक्त उत्पादन परिस्थितियों में लगभग 12–18 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- फ्यूज़ेरियम उकठा — प्रतिरोधी; यह बीएसएमआर 736 की प्रमुख प्रमाणित विशेषताओं में से एक है।
- बंध्य मोज़ेक रोग — अरहर के जर्मप्लाज्म और किस्म संबंधी साहित्य के अनुसार अत्यधिक प्रतिरोधी।
- फली छेदक सहित अन्य अरहर कीट महत्वपूर्ण उत्पादन जोखिम बने रहते हैं; रोग प्रतिरोध के बावजूद फसल की नियमित निगरानी आवश्यक है।
प्रबंधन सुझाव
- जहाँ फ्यूज़ेरियम उकठा और बंध्य मोज़ेक दोनों महत्वपूर्ण रोग जोखिम हों और लंबी अवधि की अरहर फसल प्रणाली में फिट बैठती हो, वहाँ बीएसएमआर 736 उपयोगी हो सकती है।
- अज्ञात स्रोत के खेत-बचत बीज पर निर्भर रहने के बजाय अधिकृत स्रोत से स्वस्थ, प्रमाणित या गुणवत्ता-आश्वस्त बीज लें।
- पर्याप्त मानसूनी वर्षा के बाद समय पर बुवाई करें; इस लंबी अवधि की किस्म में देर से बुवाई करने पर उपज क्षमता घट सकती है।
- फूल और फलियाँ बनने के समय फली छेदक तथा अन्य कीटों की नियमित निगरानी करें और स्थानीय एकीकृत कीट प्रबंधन की नवीनतम सलाह अपनाएँ।
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- फ्यूज़ेरियम उकठा और बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति मजबूत प्रतिरोध को एक साथ जोड़ती है।
- महाराष्ट्र, विशेषकर मराठवाड़ा के अरहर उत्पादन क्षेत्र में स्थापित अनुकूलन और लंबे समय से उपयोग।
- यह केवल ऐतिहासिक किस्म बनकर समाप्त नहीं हुई है; वर्तमान संस्थागत बीज उत्पादन और कृषि अनुशंसाओं में अभी भी इसका उल्लेख मिलता है।
- अकेली अरहर फसल और प्रलेखित अंतरवर्ती प्रणालियों दोनों के लिए उपयुक्त।
ध्यान रखने योग्य बातें
- बीएसएमआर 736 लंबी अवधि की किस्म है, इसलिए जहाँ उपलब्ध फसल अवधि कम हो या जल्दी कटाई आवश्यक हो वहाँ यह कम उपयुक्त हो सकती है।
- प्रकाशित उपज आँकड़े वातावरण और प्रबंधन के अनुसार बदलते हैं। दाल विकास निदेशालय के आधिकारिक रिकॉर्ड में औसत उपज लगभग 12–18 क्विंटल/हेक्टेयर दी गई है; इसे गारंटीकृत खेत उपज न मानें।
- इसका सबसे मजबूत प्रलेखित अनुकूलन महाराष्ट्र में है। स्थापित क्षेत्र से बाहर स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय या KVK की अनुशंसा को प्राथमिकता दें।
- यह अभी भी संस्थागत बीज प्रणाली में मौजूद है और ब्रीडर-सीड सूची में दर्ज है, लेकिन मुझे पूरे भारत में वर्तमान खुदरा पैकेट की विश्वसनीय पुष्टि नहीं मिली। इसलिए इसे हर जगह आसानी से बाजार में उपलब्ध बताना उचित नहीं होगा।
- कुछ पुराने साहित्य में पकने की अवधि लगभग 175–180 दिन दी गई है, जबकि दाल विकास निदेशालय के रिकॉर्ड में 180–185 दिन हैं। यहाँ विरोधी आँकड़ों को चुपचाप मिलाने के बजाय प्राथमिक आधिकारिक रिकॉर्ड वाला आँकड़ा इस्तेमाल किया गया है।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- महाराष्ट्र
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बीएसएमआर 736 अरहर क्या है?
बीएसएमआर 736 महाराष्ट्र के बदनापुर में विकसित और 1996 में जारी की गई लंबी अवधि की अनिश्चित वृद्धि वाली अरहर किस्म है। इसकी प्रमुख पहचान फ्यूज़ेरियम उकठा और बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति प्रतिरोध है।
क्या बीएसएमआर 736 फ्यूज़ेरियम उकठा प्रतिरोधी है?
हाँ। बीएसएमआर 736 को फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति प्रतिरोधी बताया गया है और इसे उन अरहर उत्पादन क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया जहाँ उकठा महत्वपूर्ण रोग है।
क्या बीएसएमआर 736 बंध्य मोज़ेक रोग प्रतिरोधी है?
हाँ। अरहर संबंधी साहित्य में बीएसएमआर 736 को बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी बताया गया है।
बीएसएमआर 736 को पकने में कितने दिन लगते हैं?
दाल विकास निदेशालय के किस्म रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 180–185 दिन, हालांकि वातावरण और बुवाई की परिस्थितियों के अनुसार अवधि बदल सकती है।
बीएसएमआर 736 की उपज कितनी होती है?
दाल विकास निदेशालय के रिकॉर्ड में औसत उपज लगभग 12–18 क्विंटल/हेक्टेयर दी गई है। वास्तविक खेत उपज वर्षा, मिट्टी, रोग दबाव, बुवाई की तारीख और प्रबंधन पर निर्भर करती है।
बीएसएमआर 736 कहाँ उपयुक्त है?
इसे महाराष्ट्र के लिए जारी किया गया था और महाराष्ट्र के अरहर क्षेत्र, विशेषकर मराठवाड़ा में इसका स्थापित उपयोग है। वर्तमान कृषि साहित्य कर्नाटक और अन्य प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के अरहर परीक्षणों में भी इसके उपयोग को दर्ज करता है।
बीएसएमआर 736 की बीज दर क्या है?
महाराष्ट्र की अरहर उत्पादन तालिका में अकेली फसल के लिए लगभग 15 किलो/हेक्टेयर और कपास के साथ अंतरवर्ती फसल में लगभग 5 किलो/हेक्टेयर बीज दर दी गई है।
बीएसएमआर 736 की बुवाई कब करनी चाहिए?
सामान्य मानसून आगमन के आसपास बुवाई करें; महाराष्ट्र में जून का मध्य समय पर बुवाई के लिए अच्छा लक्ष्य है। बदनापुर के 2024 के क्षेत्रीय अध्ययन में 15 जून की बुवाई बाद की तारीखों से अधिक उपज वाली रही।
स्रोत: Directorate of Pulses Development — Pigeonpea variety information, VNMKV Parbhani — Official Released Varieties, VNMKV Parbhani — Research Stations and Seed Production, ICRISAT — Pigeonpea Genomics Initiative, IIPR Pulses Seed Hub — Seed Availability, NABARD — Pigeonpea seed rate and spacing in Maharashtra, 2024 Journal of Experimental Agriculture International — BSMR 736 sowing-date study, ICAR-NBSSLUP — Maharashtra contingency planning with BSMR 736. संपादकीय नीति.
