Maruti (ICP 8863)
1986 में कर्नाटक में मारुति नाम से जारी ICRISAT की ऐतिहासिक अरहर किस्म। इसकी मुख्य ताकत फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति बहुत मजबूत प्रतिरोध है। यह विशेष रूप से उत्तर कर्नाटक में महत्वपूर्ण बनी और किसान-से-किसान प्रसार के माध्यम से आसपास के अरहर क्षेत्रों में पहुँची, लेकिन यह बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- अरहर (तूर)
- प्रकार
- अरहर की किस्म
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 150–180 दिन; व्यावसायिक सूचियों में आम तौर पर लगभग 150–160 दिन
- बीज दर
- महाराष्ट्र राज्य बीज निगम (महाबीज) की वर्तमान किस्म सूची में 12 किलो/हेक्टेयर; स्थानीय अकेली या अंतरवर्ती फसल की सिफारिश अलग हो सकती है
- अपेक्षित उपज
- उपयुक्त प्रबंधन में लगभग 15–16 क्विंटल/हेक्टेयर उपज क्षमता; पुराने आधिकारिक आँकड़ों में लगभग 10–12 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज, जबकि ICRISAT/ICAR सामग्री में लगभग 1.5–1.6 टन/हेक्टेयर उपज क्षमता बताई गई है
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी जल निकासी वाली काली मिट्टी तथा अरहर के लिए उपयुक्त अन्य अच्छी जल निकासी वाली मिट्टियाँ
- जारी
- गंभीर फ्यूज़ेरियम उकठा दबाव में ICP 7626 (P-15-3-3) से ICRISAT चयन द्वारा विकसित; 1986 में कर्नाटक में मारुति नाम से खेती के लिए जारी
इस किस्म के बारे में
मारुति, जिसे ICP 8863 के नाम से भी जाना जाता है, मध्यम अवधि की अरहर किस्म है जिसे ICRISAT ने ICP 7626 (P-15-3-3) से चयन द्वारा विकसित किया। ICP 7626 उत्तर प्रदेश की एक स्थानीय सामग्री थी। मूल सामग्री को ICRISAT, पटनचेरू में गंभीर फ्यूज़ेरियम उकठा दबाव में परखा गया और उकठा-रोधी पौधों का उकठा-प्रभावित प्लॉटों में बार-बार चयन किया गया। ICP 8863 का 1978/79 से 1989/90 के बीच भारत के 13 स्थानों पर परीक्षण हुआ और इसे 1986 में कर्नाटक में मारुति नाम से खेती के लिए जारी किया गया। पटनचेरू में इसे 50% फूल आने में लगभग 111–120 दिन और पकने में 150–180 दिन लगते हैं। पौधा अर्ध-फैलावदार, अनिश्चित वृद्धि वाला और मध्यम कद का होता है तथा इसकी ऊँचाई लगभग 150–180 सेमी होती है। दाने अंडाकार होते हैं और नारंगी से गहरे भूरे रंग के होते हैं; 100 दानों का भार लगभग 9.5 ग्राम है। ICRISAT ने फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति बहुत मजबूत प्रतिरोध दर्ज किया और बताया कि यह सूखे व नम दोनों मौसमों में अच्छा प्रदर्शन करती है तथा अकेली और अंतरवर्ती दोनों फसल प्रणालियों के लिए उपयुक्त है। बाद के रोग-अध्ययनों में ICP 8863 को बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति संवेदनशील पाया गया, इसलिए इसके उकठा प्रतिरोध को सभी प्रमुख अरहर रोगों के प्रति व्यापक प्रतिरोध नहीं माना जाना चाहिए।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयमानसून के आगमन और स्थानीय अरहर अनुशंसा के अनुसार खरीफ की शुरुआत में जून–जुलाई
- बीज दरमहाराष्ट्र राज्य बीज निगम (महाबीज) की वर्तमान किस्म सूची में 12 किलो/हेक्टेयर; स्थानीय अकेली या अंतरवर्ती फसल की सिफारिश अलग हो सकती है
- दूरीICP 8863 के साथ लगभग 90 सेमी कतार दूरी और करीब 20 सेमी पौध दूरी का उत्पादन विन्यास दर्ज है; मिट्टी, वर्षा और अकेली/अंतरवर्ती फसल प्रणाली के अनुसार दूरी समायोजित करें
- बुवाई विधिसमान पौध घनत्व और निराई-गुड़ाई की सुविधा के लिए कतार में बुवाई बेहतर है। ICP 8863 अकेली और अंतरवर्ती दोनों फसल प्रणालियों के लिए उपयुक्त है।
- सिंचाईमुख्य रूप से खरीफ उत्पादन, जिसमें वर्षा-आधारित खेती भी शामिल है, के लिए उपयुक्त। लंबे समय तक जलभराव से बचें और जहाँ सिंचाई उपलब्ध हो वहाँ लंबे सूखे दौर में, विशेषकर फूल आने और फलियाँ भरने के समय, पूरक सिंचाई दें।
- उर्वरकमिट्टी परीक्षण और स्थानीय अरहर अनुशंसा के आधार पर पोषक तत्व दें; इस किस्म के लिए अलग से प्रमाणित उर्वरक खुराक न मानें। अधिक नाइट्रोजन से बचें क्योंकि अरहर दलहनी फसल है।
- कटाईICRISAT पटनचेरू परिस्थितियों में लगभग 150–180 दिन की परिपक्वता बताता है, जबकि वर्तमान व्यावसायिक सूचियों में आम तौर पर लगभग 150–160 दिन दिए जाते हैं। जब अधिकांश फलियाँ पककर भूरी हो जाएँ और दाने पूरी तरह विकसित हो जाएँ तब कटाई करें; भंडारण से पहले दाने अच्छी तरह सुखाएँ।
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- प्रायद्वीपीय अरहर क्षेत्र की सामान्य काली मिट्टी सहित अच्छी जल निकासी वाली मिट्टियाँ। अच्छी जल निकासी महत्वपूर्ण है।
- सिंचाई
- अच्छी जल निकासी वाली भूमि बेहतर है। लंबे समय तक खड़े पानी से बचना चाहिए। मुख्य मिट्टी संबंधी जोखिम किसी एक मिट्टी प्रकार के बजाय लंबे समय तक जलभराव है।
जलवायु
- जलवायु
- प्रायद्वीपीय भारत के खरीफ अरहर क्षेत्र के लिए अनुकूलित किस्म। ICRISAT ने सूखे और नम दोनों मौसमों में अच्छा प्रदर्शन दर्ज किया है। इसकी सबसे मजबूत प्रमाणित रोग-संबंधी विशेषता फ्यूज़ेरियम उकठा प्रतिरोध है, जबकि बंध्य मोज़ेक इसकी प्रमुख कमजोरी बनी हुई है।
उपज व अवधि
पकने की अवधि
150–180 दिन; व्यावसायिक सूचियों में आम तौर पर लगभग 150–160 दिन
अपेक्षित उपज
उपयुक्त प्रबंधन में लगभग 15–16 क्विंटल/हेक्टेयर उपज क्षमता; पुराने आधिकारिक आँकड़ों में लगभग 10–12 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज, जबकि ICRISAT/ICAR सामग्री में लगभग 1.5–1.6 टन/हेक्टेयर उपज क्षमता बताई गई है
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- फ्यूज़ेरियम उकठा — अत्यधिक प्रतिरोधी। ICRISAT के 13 स्थानों वाले उकठा-प्रभावित परीक्षणों में ICP 8863 में औसत उकठा घटना 0–26% रही, जबकि संवेदनशील चेक ICP 2376 में यह 45–100% थी।
- बंध्य मोज़ेक रोग — अत्यधिक संवेदनशील। ICP 8863 का SMD अनुसंधान में संवेदनशील जीनोटाइप/चेक के रूप में उपयोग किया जाता है; इसे SMD-रोधी किस्म न बताएं।
- फली छेदक और अन्य अरहर कीट महत्वपूर्ण उत्पादन जोखिम बने रहते हैं; मजबूत उकठा प्रतिरोध का मतलब नियमित फसल निगरानी की आवश्यकता खत्म होना नहीं है।
प्रबंधन सुझाव
- जहाँ फ्यूज़ेरियम उकठा का दबाव ज्ञात रूप से अधिक हो, वहाँ मारुति उपयोगी है क्योंकि इसकी सबसे मजबूत प्रमाणित विशेषता उकठा प्रतिरोध है।
- बंध्य मोज़ेक से सुरक्षा के लिए मारुति पर भरोसा न करें। जहाँ इस रोग का इतिहास हो वहाँ विशेष रूप से नियमित निगरानी करें।
- फूल और फलियाँ बनने की अवस्था में फली छेदक और अन्य कीटों की निगरानी करें तथा स्थानीय एकीकृत कीट प्रबंधन की नवीनतम सलाह अपनाएँ।
- प्रमाणित या गुणवत्तापूर्ण बीज का उपयोग करें और जहाँ स्थानीय सलाह हो वहाँ विशेषकर उकठा व SMD प्रभावित खेतों में खेत स्वच्छता तथा फसल चक्र अपनाएँ।
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- कई वर्षों और अनेक उकठा-प्रभावित स्थानों के परीक्षणों में बहुत मजबूत और अच्छी तरह प्रमाणित फ्यूज़ेरियम उकठा प्रतिरोध।
- विशेष रूप से कर्नाटक के लिए जारी की गई और बाद में उत्तर कर्नाटक तथा आसपास के अरहर क्षेत्रों में किसानों द्वारा व्यापक रूप से अपनाई गई।
- अकेली फसल और अंतरवर्ती दोनों प्रणालियों के लिए उपयुक्त।
- ICRISAT के किस्म विवरण के अनुसार सूखे और नम दोनों मौसमों में अच्छा प्रदर्शन।
- मध्यम आकार के नारंगी से गहरे भूरे दाने और अर्ध-फैलावदार अनिश्चित वृद्धि प्रायद्वीपीय अरहर उत्पादन प्रणालियों के अनुकूल हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- फ्यूज़ेरियम उकठा प्रतिरोध को व्यापक रोग प्रतिरोध न समझें। मारुति बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
- आधिकारिक रिलीज़ कर्नाटक के लिए थी। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में किसान अपनाने के प्रमाण हैं, लेकिन अन्य क्षेत्रों में स्थानीय राज्य अनुशंसा को प्राथमिकता दें।
- पकने की अवधि स्रोत और वातावरण के अनुसार बदलती है: ICRISAT 150–180 दिन बताता है, जबकि वर्तमान महाबीज और व्यावसायिक सूचियों में आम तौर पर लगभग 150–160 दिन दिए गए हैं।
- उपज के आँकड़े वातावरण और आँकड़े की परिभाषा के अनुसार काफी बदलते हैं। ICRISAT/ICAR सामग्री लगभग 1.5–1.6 टन/हेक्टेयर उपज क्षमता का समर्थन करती है, जबकि पुराने आधिकारिक आँकड़े लगभग 10–12 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज बताते हैं। इन्हें गारंटीकृत खेत उपज के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।
- महाबीज की वर्तमान सूची ICP-8863 को बंध्य मोज़ेक प्रतिरोधी बताती है, लेकिन यह कई रोग-परीक्षण अध्ययनों से विरोधाभासी है जिनमें ICP 8863 को संवेदनशील या अत्यधिक संवेदनशील पाया गया। रोग प्रतिरोध फ़ील्ड में शोध प्रमाण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- मारुति 1986 की पुरानी किस्म है। कुछ क्षेत्रों में नई स्थानीय अनुशंसित किस्में अधिक उपज या फ्यूज़ेरियम उकठा व बंध्य मोज़ेक दोनों का संयुक्त प्रतिरोध दे सकती हैं।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- कर्नाटक
- महाराष्ट्र
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मारुति (ICP 8863) अरहर क्या है?
मारुति ICRISAT चयन से विकसित मध्यम अवधि की अरहर किस्म है, जिसे 1986 में कर्नाटक में जारी किया गया था। इसकी सबसे बड़ी पहचान फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति बहुत मजबूत प्रतिरोध है।
क्या मारुति अरहर फ्यूज़ेरियम उकठा प्रतिरोधी है?
हाँ। मारुति में फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति बहुत उच्च स्तर का प्रतिरोध है। ICRISAT के बहु-स्थान परीक्षणों में संवेदनशील चेक ICP 2376 की तुलना में उकठा बहुत कम पाया गया।
क्या मारुति बंध्य मोज़ेक रोग प्रतिरोधी है?
नहीं। मारुति (ICP 8863) बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है और SMD अनुसंधान में संवेदनशील जीनोटाइप/चेक के रूप में उपयोग की जाती है।
मारुति अरहर को पकने में कितने दिन लगते हैं?
ICRISAT पटनचेरू परिस्थितियों में लगभग 150–180 दिन की परिपक्वता बताता है, जबकि वर्तमान व्यावसायिक सूचियाँ आम तौर पर लगभग 150–160 दिन बताती हैं।
मारुति अरहर की उपज क्षमता कितनी है?
ICRISAT/ICAR सामग्री उपयुक्त परिस्थितियों में लगभग 1.5–1.6 टन/हेक्टेयर उपज क्षमता का समर्थन करती है। पुराने आधिकारिक आँकड़े लगभग 10–12 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज बताते हैं, इसलिए वास्तविक खेत उपज वातावरण और प्रबंधन के अनुसार काफी कम हो सकती है।
मारुति अरहर कहाँ उपयुक्त है?
इसे आधिकारिक रूप से कर्नाटक के लिए जारी किया गया था और यह विशेष रूप से उत्तर कर्नाटक में महत्वपूर्ण बनी। महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी किसान अपनाने के प्रमाण हैं, हालांकि ये मूल आधिकारिक रिलीज़ क्षेत्र नहीं थे।
क्या मारुति को अंतरवर्ती फसल के रूप में उगाया जा सकता है?
हाँ। ICRISAT के किस्म विवरण में ICP 8863 को अकेली और अंतरवर्ती दोनों फसल प्रणालियों के लिए उपयुक्त बताया गया है।
मारुति अरहर की बीज दर क्या है?
महाराष्ट्र राज्य बीज निगम की वर्तमान सूची में 12 किलो/हेक्टेयर दिया गया है। वास्तविक बीज दर स्थानीय अकेली या अंतरवर्ती फसल की अनुशंसा और बुवाई व्यवस्था के अनुसार रखें।
स्रोत: ICRISAT — Pigeonpea Variety ICP 8863, Plant Material Description No. 44, ICRISAT — Pigeonpea Variety ICP 8863, ICRISAT Genebank — ICP 8863 Passport Summary, ICRISAT — Adoption of Maruti (ICP 8863): A Case Study, ICRISAT — Pigeonpea Sterility Mosaic Disease research, Frontiers in Microbiology — Sterility Mosaic Disease screening, ICAR-CRIDA — Important Agricultural Crops / Variety Information, Maharashtra State Seeds Corporation (Mahabeej) — Tur varieties, Shree Seeds Corporation — Maruti Tur (ICP8863). संपादकीय नीति.
