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अरहर (तूर)खरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

UPAS 120

पंतनगर में जर्मप्लाज्म लाइन P-4758 में मिले स्वतःस्फूर्त उत्परिवर्ती से विकसित जल्दी पकने वाली अरहर किस्म। इसकी मुख्य ताकत जल्दी पकना है, जिससे यह उन क्षेत्रों में उपयोगी रहती है जहाँ अरहर को गेहूँ आधारित फसल चक्र में फिट करना होता है। यह अभी संस्थागत बीज सूची में मौजूद है, हालांकि खरीद से पहले स्थानीय उपलब्ध स्टॉक की पुष्टि करनी चाहिए।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि125–150 दिन
अपेक्षित उपजऔसत लगभग 11–15 क्विंटल/हेक्टेयर; उपयुक्त परिस्थितियों में 1.38–1.8 टन/हेक्टेयर भी रिपोर्ट किया गया है
उपयुक्त मिट्टीअच्छी जल निकासी वाली मिट्टियाँ; लंबे समय तक जलभराव से बचें

ज़रूरी तथ्य

फसल
अरहर (तूर)
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
125–150 दिन
बीज दर
कम अवधि वाली अरहर के लिए स्थानीय अनुशंसित बीज दर अपनाएँ; समीक्षा किए गए प्राथमिक स्रोतों में इस किस्म के लिए एक समान विशिष्ट बीज दर नहीं मिली
अपेक्षित उपज
औसत लगभग 11–15 क्विंटल/हेक्टेयर; उपयुक्त परिस्थितियों में 1.38–1.8 टन/हेक्टेयर भी रिपोर्ट किया गया है
उपयुक्त मिट्टी
अच्छी जल निकासी वाली मिट्टियाँ; लंबे समय तक जलभराव से बचें
जारी
1974 में पंतनगर में विकसित; 1976 में आधिकारिक रूप से जारी/अधिसूचित। जर्मप्लाज्म लाइन P-4758 में मिले स्वतःस्फूर्त उत्परिवर्ती से चयनित

इस किस्म के बारे में

यूपीएएस 120 पंतनगर में जर्मप्लाज्म लाइन P-4758 में मिले स्वतःस्फूर्त उत्परिवर्ती से विकसित जल्दी पकने वाली अरहर किस्म है। प्रजनन साहित्य इसके विकास का वर्ष 1974 बताता है, जबकि सरकारी किस्म अभिलेख 1976 को रिलीज़/अधिसूचना वर्ष बताते हैं। इसकी जल्दी पकने की विशेषता गेहूँ आधारित फसल चक्र में अरहर को फिट करने के लिए महत्वपूर्ण रही। सरकारी और कृषि स्रोत इसकी पकने की अवधि लगभग 125–150 दिन बताते हैं, जबकि जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय अपनी अनुशंसित परिस्थितियों में लगभग 125–130 दिन बताता है। यूपीएएस 120 अनिश्चित वृद्धि वाली, अर्ध-फैलावदार किस्म है और इसके दाने भूरे होते हैं। इसकी मुख्य कृषि विशेषता जल्दी पकना है, न कि फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति आनुवंशिक प्रतिरोध। इसे फली छेदक के प्रति सहनशील भी बताया गया है। यह किस्म उत्तर-पश्चिमी अरहर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अभी भी प्रासंगिक है और वर्तमान संस्थागत बीज सूचियों में मौजूद होने के कारण इसे पूरी तरह अप्रचलित नहीं माना जाना चाहिए।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि125–150 दिन
    उपज क्षमताऔसत लगभग 11–15 क्विंटल/हेक्टेयर; उपयुक्त परिस्थितियों में 1.38–1.8 टन/हेक्टेयर भी रिपोर्ट किया गया है
    रोग-प्रतिरोधउकठा-रोधी नहीं; जल्दी पकने से देर से बढ़ने वाले कुछ उकठा दबाव से बचने में मदद मिलती है। फली छेदक के प्रति सहनशील
    मिट्टीअच्छी जल निकासी वाली मिट्टियाँ; लंबे समय तक जलभराव से बचें
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयखरीफ मानसून की शुरुआत के साथ जून–जुलाई; जहाँ अरहर के बाद समय पर गेहूँ लेना हो वहाँ समय पर बुवाई विशेष रूप से महत्वपूर्ण है
  • बीज दरकम अवधि वाली अरहर के लिए स्थानीय अनुशंसित बीज दर अपनाएँ; समीक्षा किए गए प्राथमिक स्रोतों में इस किस्म के लिए एक समान विशिष्ट बीज दर नहीं मिली
  • दूरीकम अवधि वाली अरहर के लिए स्थानीय अनुशंसित दूरी अपनाएँ; शुरुआती किस्मों में सामान्यतः लगभग 60 सेमी कतार दूरी और 15–20 सेमी पौध दूरी रखी जाती है, लेकिन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समायोजन करें
  • बुवाई विधिसमान पौध स्थापना और निराई-गुड़ाई की सुविधा के लिए कतार में बुवाई बेहतर है। यह उन फसल प्रणालियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जहाँ अगली फसल से पहले अरहर की जल्दी कटाई जरूरी हो।
  • सिंचाईमुख्य रूप से खरीफ फसल के रूप में उगाई जाती है। लंबे समय तक जलभराव से बचें और जहाँ सिंचाई उपलब्ध हो वहाँ लंबे सूखे दौर में, विशेषकर फूल आने और फलियाँ भरने के समय, पूरक सिंचाई दें।
  • उर्वरककिस्म-विशिष्ट उर्वरक खुराक के बजाय मिट्टी परीक्षण और स्थानीय अरहर अनुशंसा के आधार पर पोषक तत्व दें।
  • कटाईआमतौर पर लगभग 125–150 दिन में पकती है; अनुकूल अनुशंसित परिस्थितियों में इससे कम अवधि भी रिपोर्ट की गई है। जब अधिकांश फलियाँ पककर भूरी हो जाएँ और दाने पूरी तरह विकसित हो जाएँ तब कटाई करें।

मिट्टी व जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी बेहतर रहती है। अरहर सामान्यतः अच्छी जल निकासी वाली काली और अन्य उपयुक्त मिट्टियों में अच्छी रहती है, लेकिन लंबे समय तक खड़े पानी से बचना चाहिए।
सिंचाई
अच्छी जल निकासी महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक पानी खड़े रहने वाले खेतों से बचें क्योंकि अत्यधिक नमी उत्पादन संबंधी गंभीर समस्याएँ पैदा कर सकती है।

जलवायु

जलवायु
उत्तर-पश्चिमी और उत्तरी अरहर क्षेत्र में खरीफ उत्पादन के लिए उपयुक्त, जहाँ जल्दी पकने की विशेषता गेहूँ आधारित फसल चक्र में इसे फिट करने में मदद करती है। इसका मुख्य अनुकूलन लाभ जल्दी पकना है।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

125–150 दिन

अपेक्षित उपज

औसत लगभग 11–15 क्विंटल/हेक्टेयर; उपयुक्त परिस्थितियों में 1.38–1.8 टन/हेक्टेयर भी रिपोर्ट किया गया है

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

प्रबंधन सुझाव

  • जहाँ जल्दी पकने की जरूरत मुख्य उद्देश्य हो, विशेषकर जहाँ अरहर के बाद समय पर गेहूँ बोना हो, वहाँ यूपीएएस 120 का चयन करें।
  • यूपीएएस 120 को उकठा-रोधी किस्म मानकर निर्भर न रहें। कुछ उकठा परिस्थितियों में इसका लाभ जल्दी पकने से होने वाला रोग-बचाव है।
  • फली छेदक और अन्य कीटों की निगरानी करें, भले ही यूपीएएस 120 को फली छेदक के प्रति सहनशील बताया गया हो।
  • स्थानीय रूप से अनुशंसित पोषण, सिंचाई और पौध-सुरक्षा प्रबंधन अपनाएँ; पुरानी किस्म के विवरण को आधुनिक पूर्ण उत्पादन पैकेज न मानें।

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • जल्दी पकने से अरहर को गेहूँ आधारित फसल चक्र में आसानी से शामिल किया जा सकता है और खेत जल्दी खाली हो जाता है।
  • आधिकारिक स्रोत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के महत्वपूर्ण हिस्सों में इसकी अनुशंसा/अपनाने का प्रमाण देते हैं।
  • फली छेदक के प्रति सहनशीलता इसका एक अतिरिक्त प्रमाणित लाभ है।
  • यह अभी भी संस्थागत बीज सूचियों में मौजूद है, इसलिए केवल पुरानी किस्म होने के कारण इसे अप्रचलित नहीं माना जाना चाहिए।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • यूपीएएस 120 को फ्यूज़ेरियम उकठा-रोधी किस्म न बताएं। इसका लाभ मजबूत आनुवंशिक प्रतिरोध के बजाय जल्दी पकने से कुछ देर-मौसम उकठा दबाव से बचना है।
  • पकने की अवधि वातावरण और उत्पादन प्रणाली के अनुसार काफी बदलती है; मूल रिकॉर्ड के 135–140 दिन की संकरी सीमा की तुलना में लगभग 125–150 दिन अधिक प्रमाणित है।
  • उपज के आँकड़े स्रोत और परीक्षण परिस्थितियों के अनुसार बदलते हैं। सरकारी रिकॉर्ड लगभग 11–15 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज बताते हैं, जबकि शोध स्रोत उपयुक्त परिस्थितियों में इससे अधिक उपज क्षमता बताते हैं; वास्तविक खेत उपज वातावरण और प्रबंधन पर निर्भर करेगी।
  • यह पुरानी किस्म है, इसलिए केवल ऐतिहासिक लोकप्रियता के आधार पर चुनने के बजाय किसानों को नई स्थानीय रूप से अनुशंसित जल्दी पकने वाली अरहर किस्मों से इसकी तुलना करनी चाहिए।
  • वर्तमान संस्थागत बीज सूचियाँ इसकी उपलब्धता का प्रमाण देती हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि हर डीलर या हर राज्य में प्रमाणित बीज लगातार स्टॉक में उपलब्ध है।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • राजस्थान
  • उत्तराखंड

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यूपीएएस 120 अरहर क्या है?

यूपीएएस 120 पंतनगर में जर्मप्लाज्म लाइन P-4758 में मिले स्वतःस्फूर्त उत्परिवर्ती से विकसित जल्दी पकने वाली अरहर किस्म है। इसका विकास 1974 में हुआ और इसे 1976 में आधिकारिक रूप से जारी/अधिसूचित किया गया।

यूपीएएस 120 को पकने में कितने दिन लगते हैं?

वातावरण और उत्पादन परिस्थितियों के अनुसार लगभग 125–150 दिन। जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय अपनी अनुशंसित परिस्थितियों में लगभग 125–130 दिन बताता है।

क्या यूपीएएस 120 फ्यूज़ेरियम उकठा-रोधी है?

नहीं। इसे आनुवंशिक रूप से उकठा-रोधी किस्म के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए। इसकी जल्दी पकने की अवधि बाद में बढ़ने वाले कुछ उकठा दबाव से बचने में मदद कर सकती है।

क्या यूपीएएस 120 फली छेदक के प्रति सहनशील है?

हाँ। कृषि अनुशंसाओं में यूपीएएस 120 को फली छेदक के प्रति सहनशील बताया गया है, हालांकि खेत की नियमित निगरानी फिर भी जरूरी है।

यूपीएएस 120 अरहर की उपज कितनी होती है?

सरकारी रिकॉर्ड लगभग 11–15 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज बताते हैं। अन्य शोध स्रोत उपयुक्त परिस्थितियों में लगभग 1.38–1.8 टन/हेक्टेयर बताते हैं, जिससे स्पष्ट है कि उपज वातावरण और प्रबंधन पर काफी निर्भर करती है।

यूपीएएस 120 कहाँ उपयुक्त है?

इसके लिए उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में अनुशंसा या खेती अपनाए जाने का दस्तावेजी प्रमाण है, खासकर जहाँ जल्दी पकने वाली अरहर स्थानीय फसल प्रणाली में अच्छी तरह फिट होती है।

क्या यूपीएएस 120 को गेहूँ आधारित फसल चक्र में शामिल किया जा सकता है?

हाँ। जल्दी पकना इसकी प्रमुख ऐतिहासिक विशेषताओं में से एक है, क्योंकि इससे अगली गेहूँ की फसल के लिए खेत अपेक्षाकृत जल्दी खाली किया जा सकता है।

क्या यूपीएएस 120 का बीज अभी भी उपलब्ध है?

वर्तमान संस्थागत उपलब्धता का प्रमाण मौजूद है: उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन अपनी अरहर बीज सूची में यूपीएएस-120 को शामिल करता है। हालांकि इससे हर स्थानीय विक्रेता के पास उस समय स्टॉक होने की गारंटी नहीं मिलती।

स्रोत: ICAR Directorate of Pulses Development — Pulses in India / recommended pigeonpea varieties, GB Pant University AICRP Pigeonpea — variety development and recommendation information, Saxena et al. — Origin of early maturing pigeonpea germplasm and its impact on adaptation and cropping systems, Indian Journal of Genetics and Plant Breeding — Genetic relatedness of pigeonpea varieties released over 58 years, ICAR-IIPR — Pigeonpea nutritional/genotype information including UPAS 120, Kerala Agricultural University — Red gram variety recommendations, ICAR-NCIPM — Pests of Pigeonpea, Uttarakhand Seeds & Tarai Development Corporation — Pulses Seeds, ICAR-IIPR — UPAS 120 used as seed in recent research. संपादकीय नीति.