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अरहर (तूर)खरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

ICPL 87 (Pragati)

1986 में प्रगति के नाम से जारी की गई जल्दी पकने वाली, निर्धारित वृद्धि वाली अरहर किस्म — जल्दी कटाई, उकठा सहनशीलता और बहु-कटाई या दोहरी-फसल प्रणालियों के लिए उपयोगी।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि110–130 दिन
अपेक्षित उपजरिपोर्ट किए गए भारतीय किस्म परीक्षणों में लगभग 11–19 क्विंटल/हेक्टेयर; प्रायद्वीपीय क्षेत्र में पाँच वर्षों के परीक्षणों का भारित औसत 1.14 टन/हेक्टेयर रहा
उपयुक्त मिट्टीअच्छी जल निकासी वाली हल्की से मध्यम मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

फसल
अरहर (तूर)
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
110–130 दिन
बीज दर
महाराष्ट्र में जल्दी पकने वाली अकेली फसल के रूप में लगभग 20–25 किलो/हेक्टेयर; अंतरफसल में फसल की व्यवस्था के अनुसार इससे कम बीज दर अपनाई जाती है
अपेक्षित उपज
रिपोर्ट किए गए भारतीय किस्म परीक्षणों में लगभग 11–19 क्विंटल/हेक्टेयर; प्रायद्वीपीय क्षेत्र में पाँच वर्षों के परीक्षणों का भारित औसत 1.14 टन/हेक्टेयर रहा
उपयुक्त मिट्टी
अच्छी जल निकासी वाली हल्की से मध्यम मिट्टी
जारी
भारत में 1986 में प्रायद्वीपीय क्षेत्र के लिए प्रगति के नाम से जारी; इक्रीसैट द्वारा ICPX 73052 (T21 × JA 277) से विकसित

इस किस्म के बारे में

आईसीपीएल 87 को भारत में 1986 में प्रगति के नाम से जारी किया गया था। इसे इक्रीसैट ने ICPX 73052 (T21 × JA 277) के क्रॉस से वंशावली चयन द्वारा विकसित किया। यह कम ऊँचाई वाली, निर्धारित वृद्धि वाली और अर्ध-फैली हुई अरहर किस्म है, जिसमें फलियाँ पौधे की ऊपरी छतरी के पास गुच्छों में लगती हैं। इक्रीसैट केंद्र पर इसमें लगभग 70–75 दिन में फूल आए और यह करीब 110–130 दिन में पक गई। प्रायद्वीपीय भारत में अखिल भारतीय समन्वित दलहन सुधार परियोजना के पाँच वर्षों के परीक्षणों में इसकी भारित औसत बीज उपज 1.14 टन/हेक्टेयर रही, जो यूपीएएस 120 नियंत्रण से लगभग 10% अधिक थी। इसकी प्रमुख विशेषताएँ कम अवधि, फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति सहनशीलता, फली छेदक के नुकसान के बाद रिकवरी और अनुकूल नमी में रैटून या बहु-कटाई की क्षमता हैं।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि110–130 दिन
    उपज क्षमतारिपोर्ट किए गए भारतीय किस्म परीक्षणों में लगभग 11–19 क्विंटल/हेक्टेयर; प्रायद्वीपीय क्षेत्र में पाँच वर्षों के परीक्षणों का भारित औसत 1.14 टन/हेक्टेयर रहा
    रोग-प्रतिरोधफ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति सहनशील; फली छेदक के नुकसान के बाद अच्छी रिकवरी कर सकती है, लेकिन इसे बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति प्रतिरोधी नहीं मानना चाहिए
    मिट्टीअच्छी जल निकासी वाली हल्की से मध्यम मिट्टी
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयमानसून शुरू होने के साथ, मुख्य प्रायद्वीपीय क्षेत्र में सामान्यतः जून में; देर से बुवाई करने पर उपज और बहु-कटाई की क्षमता घट सकती है
  • बीज दरमहाराष्ट्र में जल्दी पकने वाली अकेली फसल के रूप में लगभग 20–25 किलो/हेक्टेयर; अंतरफसल में फसल की व्यवस्था के अनुसार इससे कम बीज दर अपनाई जाती है
  • दूरीमहाराष्ट्र में जल्दी पकने वाली अकेली फसल के लिए लगभग 45 × 10 सेमी; स्थानीय अकेली फसल या अंतरफसल प्रणाली के अनुसार दूरी समायोजित करें
  • बुवाई विधिसमान पौध संख्या और आसान अंतर-खेत कार्यों के लिए कतार में बुवाई बेहतर है; इसकी निर्धारित और कम ऊँचाई वाली वृद्धि अपेक्षाकृत सघन रोपण की अनुमति देती है
  • सिंचाईमुख्य रूप से वर्षा ऋतु की खेती के लिए उपयुक्त। सूखे अंतराल में मिट्टी की नमी कम होने पर, विशेषकर फूल आने और फली भरने के समय, पूरक सिंचाई दें; लंबे समय तक जलभराव से बचें।
  • उर्वरकप्राथमिक किस्म दस्तावेज़ों में ICPL-87 के लिए अलग से विश्वसनीय उर्वरक खुराक नहीं मिली। मिट्टी परीक्षण के आधार पर राज्य की अरहर के लिए अनुशंसित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाएँ, किसी सामान्य खुराक को इस किस्म की विशेष खुराक न मानें।
  • कटाईउपयुक्त परिस्थितियों में लगभग 110–130 दिन में पकती है। इसकी कम अवधि मध्यम और लंबी अवधि वाली अरहर की तुलना में जल्दी कटाई देती है और फसल प्रणाली में अगली फसल के लिए जगह बना सकती है। अनुकूल नमी में रैटून या बहु-कटाई भी संभव है।

मिट्टी व जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी जल निकासी वाली हल्की से मध्यम मिट्टी। ICPL 87 का परीक्षण एल्फिसोल और वर्टिसोल जैसी मिट्टियों में हुआ है, लेकिन लंबे समय तक खड़ा पानी नहीं रहना चाहिए।
सिंचाई
अच्छी जल निकासी जरूरी है। जल्दी पकने वाली अरहर अलग-अलग मिट्टी की परिस्थितियों में उग सकती है, लेकिन लंबे समय का जलभराव जड़ों की कार्यक्षमता और फसल प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।

जलवायु

जलवायु
गर्म वर्षा-ऋतु वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त, जहाँ कम अवधि की अरहर देर मौसम के कुछ सूखे से बच सकती है। समय पर बुवाई महत्वपूर्ण है क्योंकि देर से बुवाई करने पर उपज और बहु-कटाई की क्षमता घट सकती है।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

110–130 दिन

अपेक्षित उपज

रिपोर्ट किए गए भारतीय किस्म परीक्षणों में लगभग 11–19 क्विंटल/हेक्टेयर; प्रायद्वीपीय क्षेत्र में पाँच वर्षों के परीक्षणों का भारित औसत 1.14 टन/हेक्टेयर रहा

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

प्रबंधन सुझाव

  • बुवाई से पहले साफ़ और गुणवत्तापूर्ण बीज का उपयोग करें तथा अरहर के लिए स्थानीय रूप से अनुशंसित बीज-उपचार अपनाएँ।
  • फूल आने और फली बनने के दौरान फली छेदक तथा अन्य कीटों पर नज़र रखें; उकठा सहनशीलता को व्यापक कीट-प्रतिरोध न मानें।
  • जहाँ पहले उकठा की समस्या रही हो, वहाँ इसकी उकठा-सहनशीलता लाभ देती है, लेकिन फसल चक्र और खेत की स्वच्छता फिर भी उपयोगी रोग-प्रबंधन उपाय हैं।
  • मानसून के साथ समय पर बुवाई करें क्योंकि देर से बुवाई करने पर उपज और बहु-कटाई की क्षमता घट सकती है।

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • कम अवधि — लगभग 110–130 दिन — जिससे लंबी अवधि वाली अरहर की तुलना में जल्दी कटाई होती है
  • निर्धारित और कम ऊँचाई वाली वृद्धि, जो अपेक्षाकृत सघन रोपण के लिए उपयुक्त है
  • फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति सहनशीलता, जो उकठा-प्रभावित खेतों में बड़ा लाभ है
  • प्रायद्वीपीय क्षेत्र में पाँच वर्षों के भारित औसत परीक्षण में यूपीएएस 120 से लगभग 10% अधिक प्रदर्शन
  • बहु-कटाई प्रणाली के लिए उपयुक्त और अनुकूल नमी में रैटून फसल देने की क्षमता
  • महाराष्ट्र और कर्नाटक में ऐतिहासिक रूप से अपनाई गई और जहाँ कम अवधि की अरहर फसल चक्र में फिट बैठती है वहाँ उपयोगी

ध्यान रखने योग्य बातें

  • यह 1986 में जारी की गई पुरानी किस्म है; नई अरहर किस्मों में कुछ क्षेत्रों के लिए बेहतर रोग-प्रबंधन गुण या स्थानीय अनुकूलता हो सकती है।
  • ICPL 87 को बंध्य मोज़ेक प्रतिरोधी न मानें — प्राथमिक इक्रीसैट विवरण फ्यूज़ेरियम उकठा सहनशीलता स्थापित करता है, बंध्य मोज़ेक प्रतिरोध नहीं।
  • परीक्षण प्रणाली के अनुसार उपज के आँकड़ों में काफी अंतर मिलता है। सामान्य खेत के लिए 11–19 क्विंटल/हेक्टेयर की रिपोर्टेड सीमा बताना बेहतर है, न कि सघन या बहु-कटाई प्रयोगों की ऊँची उपज को सामान्य व्यावसायिक उपज बताना।
  • कम अवधि तभी लाभ है जब स्थानीय वर्षा, मिट्टी की नमी और फसल चक्र जल्दी पकने वाली अरहर के अनुकूल हों; हर अरहर उत्पादक क्षेत्र के लिए यह अपने आप सबसे अच्छी किस्म नहीं है।
  • सबसे मजबूत दस्तावेज़ी अपनाने के प्रमाण प्रायद्वीपीय भारत, विशेषकर महाराष्ट्र और कर्नाटक, से मिलते हैं; पूरे भारतीय अरहर क्षेत्र के लिए समान दावे नहीं करने चाहिए।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक
  • गुजरात

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ICPL 87 (प्रगति) क्या है?

ICPL 87 इक्रीसैट द्वारा विकसित कम अवधि वाली, निर्धारित वृद्धि वाली अरहर किस्म है, जिसे भारत में 1986 में प्रगति के नाम से जारी किया गया। यह फ्यूज़ेरियम उकठा सहनशीलता, जल्दी पकने और बहु-कटाई प्रणालियों के लिए जानी जाती है।

ICPL 87 को पकने में कितने दिन लगते हैं?

उपयुक्त परिस्थितियों में लगभग 110–130 दिन।

ICPL 87 अरहर की उपज कितनी होती है?

ऐतिहासिक भारतीय किस्म परीक्षणों में लगभग 11–19 क्विंटल/हेक्टेयर की उपज रिपोर्ट हुई है। प्रायद्वीपीय क्षेत्र के पाँच वर्षों के परीक्षणों में इक्रीसैट ने 1.14 टन/हेक्टेयर का भारित औसत दर्ज किया, जो यूपीएएस 120 से लगभग 10% अधिक था।

क्या ICPL 87 उकठा रोग के प्रति प्रतिरोधी है?

इक्रीसैट ICPL 87 को फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति सहनशील बताता है। इसे अरहर के हर प्रमुख रोग के प्रति प्रतिरोधी नहीं बताया जाना चाहिए।

क्या ICPL 87 बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति प्रतिरोधी है?

इसे बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति प्रतिरोधी न बताएं। प्राथमिक इक्रीसैट किस्म विवरण ICPL 87 में फ्यूज़ेरियम उकठा सहनशीलता स्थापित करता है, लेकिन बंध्य मोज़ेक प्रतिरोध स्थापित नहीं करता।

ICPL 87 की बुवाई कब करनी चाहिए?

मुख्य प्रायद्वीपीय क्षेत्र में सामान्यतः मानसून शुरू होने के साथ, यानी जून में बुवाई की जाती है। समय पर बुवाई जरूरी है क्योंकि देर से बुवाई करने पर उपज घट सकती है।

ICPL 87 की बीज दर कितनी है?

महाराष्ट्र में जल्दी पकने वाली अकेली फसल के लिए लगभग 20–25 किलो/हेक्टेयर। अंतरफसल में रोपण व्यवस्था के अनुसार इससे कम बीज दर अपनाई जाती है।

ICPL 87 के लिए कौन-से राज्य उपयुक्त हैं?

इसकी सबसे मजबूत दस्तावेज़ी अनुकूलता और अपनाने का क्षेत्र प्रायद्वीपीय भारत, विशेषकर महाराष्ट्र और कर्नाटक, है; ऐतिहासिक स्रोत गुजरात में भी इसके उपयोग की रिपोर्ट देते हैं।

स्रोत: ICRISAT — Pigeonpea Variety ICPL 87, Plant Material Description No. 42, ICRISAT — Pigeonpea Variety ICPL 87, Plant Material Description PDF, Crop Science — Registration of ICPL 87 Pigeonpea, NABARD — Seed-rate and spacing recommendations for pigeonpea in Maharashtra, ICRISAT Asia Region Annual Report — adoption and seed sales of ICPL 87 in Maharashtra, Current commercial listing — ICPL-87 pigeonpea seed. संपादकीय नीति.