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अरहर (तूर)खरीफ़मध्यम अवधि की अरहर किस्मअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

ICPL 87119 (Asha)

इक्रीसैट की मध्यम अवधि वाली आशा किस्म, जो फ्यूज़ेरियम उकठा और बंध्य मोज़ेक रोग के संयुक्त प्रतिरोध तथा मध्य व दक्षिण भारत में लगातार खेती के लिए जानी जाती है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधिलगभग 160–200 दिन
अपेक्षित उपज18–25 क्विंटल/हेक्टेयर, क्षेत्र व प्रबंधन के अनुसार
उपयुक्त मिट्टीअच्छी जल निकासी वाली मध्यम से गहरी मिट्टी; लंबे समय तक जलभराव से बचें

ज़रूरी तथ्य

फसल
अरहर (तूर)
प्रकार
मध्यम अवधि की अरहर किस्म
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
लगभग 160–200 दिन
बीज दर
एकल फसल में लगभग 8–10 किलो/हेक्टेयर; उपयुक्त अंतरवर्तीय खेती में फसल संयोजन व बुवाई व्यवस्था के अनुसार कम बीज दर अपनाई जा सकती है
अपेक्षित उपज
18–25 क्विंटल/हेक्टेयर, क्षेत्र व प्रबंधन के अनुसार
उपयुक्त मिट्टी
अच्छी जल निकासी वाली मध्यम से गहरी मिट्टी; लंबे समय तक जलभराव से बचें
जारी
1993 में मध्य व दक्षिण क्षेत्रों के लिए जारी · इक्रीसैट द्वारा विकसित

इस किस्म के बारे में

आईसीपीएल 87119, जिसे आम तौर पर आशा कहा जाता है, इक्रीसैट द्वारा विकसित की गई और 1993 में भारत के मध्य व दक्षिण क्षेत्रों के लिए जारी की गई। इसे C11 और एक प्रजनन लाइन से जुड़े क्रॉस से विकसित किया गया था और यह मध्यम अवधि की असीमित वृद्धि वाली किस्म में फ्यूज़ेरियम उकठा व बंध्य मोज़ेक रोग के प्रतिरोध को एक साथ जोड़ने के कारण महत्वपूर्ण बनी। इक्रीसैट के परीक्षणों में मध्य क्षेत्र में लगभग 1.51 टन/हेक्टेयर और दक्षिण क्षेत्र में 1.54 टन/हेक्टेयर उपज दर्ज हुई। यह किस्म भारतीय उत्पादन व प्रजनन कार्यक्रमों में उपयोग होती रही है और महाराष्ट्र राज्य बीज निगम की सूची में भी उपलब्ध है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारमध्यम अवधि की अरहर किस्म
    अवधिलगभग 160–200 दिन
    उपज क्षमता18–25 क्विंटल/हेक्टेयर, क्षेत्र व प्रबंधन के अनुसार
    रोग-प्रतिरोधफ्यूज़ेरियम उकठा और बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति प्रतिरोधी
    मिट्टीअच्छी जल निकासी वाली मध्यम से गहरी मिट्टी; लंबे समय तक जलभराव से बचें
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयआमतौर पर मानसून की शुरुआत के साथ, खरीफ अरहर क्षेत्रों में जून से जुलाई के दौरान बोई जाती है; सही बुवाई तिथि स्थानीय वर्षा व क्षेत्रीय सिफारिश के अनुसार तय करें
  • बीज दरएकल फसल में लगभग 8–10 किलो/हेक्टेयर; उपयुक्त अंतरवर्तीय खेती में फसल संयोजन व बुवाई व्यवस्था के अनुसार कम बीज दर अपनाई जा सकती है
  • दूरीबुवाई व्यवस्था के अनुसार दूरी बदलती है; मध्यम से लंबी अवधि वाली अरहर में कई उत्पादन प्रणालियों में लगभग 90–120 सेमी कतार दूरी और 20–30 सेमी पौधा दूरी इस्तेमाल की जाती है
  • बुवाई विधिकतार में बुवाई या डिबलिंग उपयुक्त रहती है ताकि लंबी अवधि वाली शाखायुक्त पौधों को पर्याप्त जगह मिले; उपयुक्त अंतरवर्तीय खेती में भी इसका उपयोग किया जा सकता है
  • सिंचाईमुख्य रूप से वर्षा आधारित खरीफ फसल के रूप में उगाई जाती है। सिंचाई उपलब्ध होने पर किसी निश्चित किस्म-विशेष कार्यक्रम की बजाय वर्षा, मिट्टी की नमी और फसल अवस्था के अनुसार सिंचाई करें।
  • उर्वरकस्थानीय रूप से अनुशंसित अरहर पोषक तत्व प्रबंधन अपनाएँ; सामान्य उर्वरक सिफारिश को इस किस्म की विशेष आवश्यकता न मानें। जहाँ स्थानीय सलाह हो, वहाँ राइजोबियम/उपयुक्त जैव उर्वरक का उपयोग किया जा सकता है।
  • कटाईक्षेत्र, बुवाई तिथि और मौसम के अनुसार सामान्यतः लगभग 160–200 दिन में पकती है। जब अधिकांश फलियाँ परिपक्व होकर भूरी हो जाएँ तब कटाई करें और मड़ाई से पहले कटी फसल को अच्छी तरह सुखाएँ।

मिट्टी व जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
मध्यम से गहरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में अच्छी तरह बढ़ती है। अच्छी जल निकासी जरूरी है क्योंकि लंबे समय तक जलभराव जड़ों के विकास को प्रभावित कर सकता है।
सिंचाई
खासकर फसल की शुरुआती स्थापना और भारी वर्षा के समय लंबे समय तक खेत में पानी खड़ा न रहने दें।

जलवायु

जलवायु
यह खरीफ की मध्यम अवधि वाली अरहर है, जो मध्य व दक्षिण भारत के उत्पादन क्षेत्रों के लिए अनुकूलित है। इसकी पकने की अवधि बुवाई तिथि, तापमान, वर्षा और स्थानीय वातावरण के अनुसार काफी बदल सकती है।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

लगभग 160–200 दिन

अपेक्षित उपज

18–25 क्विंटल/हेक्टेयर, क्षेत्र व प्रबंधन के अनुसार

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

प्रबंधन सुझाव

  • विश्वसनीय स्रोत से स्वस्थ व गुणवत्तापूर्ण बीज लें और बुवाई से पहले स्थानीय बीज-उपचार सिफारिशों का पालन करें।
  • खेत में अच्छी जल निकासी रखें और भारी मानसूनी वर्षा के दौरान लंबे समय तक जलभराव से बचें।
  • बंध्य मोज़ेक व उकठा के प्रति महत्वपूर्ण प्रतिरोध होने के बावजूद फली छेदक, फली मक्खी और अन्य स्थानीय अरहर कीटों पर नज़र रखें।
  • जहाँ खेत में पहले बंध्य मोज़ेक या फ्यूज़ेरियम उकठा का इतिहास रहा हो, वहाँ इसका रोग प्रतिरोध महत्वपूर्ण लाभ हो सकता है, लेकिन खेत की निगरानी जारी रखें।

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • फ्यूज़ेरियम उकठा और बंध्य मोज़ेक रोग — अरहर के दो प्रमुख रोगों — के प्रति प्रतिरोध को एक साथ रखती है।
  • भारत में लंबे समय से खेती और शोध अनुभव वाली इक्रीसैट की स्थापित किस्म।
  • मध्य व दक्षिण क्षेत्र की अरहर उत्पादन परिस्थितियों के लिए अनुकूल और अभी भी महाराष्ट्र राज्य बीज निगम की सूची में मौजूद।
  • मोटा, गहरे भूरे रंग का दाना और असीमित वृद्धि वाली शाखायुक्त पौधे की बनावट इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • यह मध्यम से लंबी अवधि वाली अरहर किस्म है; कुछ परिस्थितियों में पकने की अवधि 180–200 दिन तक पहुँच सकती है, इसलिए जहाँ जल्दी कटाई जरूरी हो वहाँ यह उपयुक्त नहीं हो सकती।
  • उपज वातावरण और प्रबंधन के अनुसार काफी बदलती है। ऐतिहासिक मध्य व दक्षिण क्षेत्र परीक्षणों में लगभग 1.51–1.54 टन/हेक्टेयर उपज दर्ज हुई, जबकि वर्तमान राज्य बीज सूची में इससे अधिक संभावित उपज दी गई है।
  • इसका सबसे बड़ा varietal लाभ रोग प्रतिरोध है; जरूरी नहीं कि यह नई अरहर किस्मों में सबसे कम अवधि या सबसे अधिक उपज वाली हो।
  • किस्म चुनते समय स्थानीय जिले की वर्तमान सिफारिश देखें, खासकर जहाँ उकठा व बंध्य मोज़ेक प्रतिरोध वाली नई किस्में उपलब्ध हों।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • गुजरात
  • कर्नाटक
  • आंध्र प्रदेश
  • तेलंगाना
  • ओडिशा
  • तमिलनाडु

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ICPL 87119 (आशा) क्या है?

ICPL 87119, जिसे आम तौर पर आशा कहा जाता है, इक्रीसैट द्वारा विकसित मध्यम अवधि की अरहर किस्म है, जिसे 1993 में भारत के मध्य व दक्षिण क्षेत्रों के लिए जारी किया गया था।

आशा अरहर को पकने में कितने दिन लगते हैं?

बुवाई तिथि, क्षेत्र और बढ़वार की परिस्थितियों के अनुसार लगभग 160–200 दिन।

ICPL 87119 की उपज क्षमता कितनी है?

वर्तमान राज्य बीज सूची में लगभग 18–25 क्विंटल/हेक्टेयर बताया गया है, जबकि ऐतिहासिक इक्रीसैट परीक्षणों में मध्य व दक्षिण क्षेत्रों में लगभग 1.51–1.54 टन/हेक्टेयर उपज दर्ज हुई।

क्या आशा फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रति प्रतिरोधी है?

हाँ। ICPL 87119 को फ्यूज़ेरियम उकठा के प्रतिरोध के साथ विकसित किया गया था, जो इसकी प्रमुख विशेषताओं में से एक है।

क्या आशा बंध्य मोज़ेक रोग के प्रति प्रतिरोधी है?

हाँ। बंध्य मोज़ेक रोग का प्रतिरोध भी ICPL 87119 की प्रमुख विशेषताओं में से एक है।

ICPL 87119 कहाँ उपयुक्त है?

इसे मध्य व दक्षिण क्षेत्रों के लिए जारी किया गया था और मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा व तमिलनाडु सहित कई राज्यों में इसका उपयोग हुआ है, लेकिन स्थानीय सिफारिश को प्राथमिकता देनी चाहिए।

स्रोत: ICRISAT — Pigeonpea Variety ICPL 87119, Plant Material Description No. 43 (1993), ICRISAT — Crop Improvement flyer, identifying Asha (ICPL 87119) as the first wilt and sterility mosaic resistant pigeonpea variety, Maharashtra State Seeds Corporation (Mahabeej) — current variety listing for ICPL-87119 (Asha), Directorate of Pulses Development — pigeonpea variety/release information, ANGRAU — Asha (ICPL 87119) variety information. संपादकीय नीति.