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जौरबीखुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

DWRB 182

आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर, करनाल की एक दो-क़तार माल्ट जौ क़िस्म, समय पर बोई सिंचित हालात के लिए विकसित। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नरबी
पकने की अवधि120–125 दिन
अपेक्षित उपज45–50 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
जौ
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
120–125 दिन
अपेक्षित उपज
45–50 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर, करनाल द्वारा उत्तर-पश्चिम मैदानी क्षेत्र (एनडब्ल्यूपीज़ेड) की सिंचित, समय पर बोई परिस्थितियों के लिए जारी — इस चरण में जाँचे गए स्रोतों में सटीक अधिसूचना-वर्ष नहीं मिला

इस किस्म के बारे में

डीडब्ल्यूआरबी 182 आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर (भारतीय गेहूं व जौ अनुसंधान संस्थान), करनाल द्वारा जारी एक दो-क़तार माल्ट जौ क़िस्म है, जो उत्तर-पश्चिम मैदानी क्षेत्र (एनडब्ल्यूपीज़ेड) की सिंचित, समय पर बोई परिस्थितियों के लिए विकसित है। इस चरण में सीधे फ़ेच किया गया आईआईडब्ल्यूबीआर का अपना बार्ली इम्प्रूवमेंट पेज इसे संस्थान की हालिया उच्च-उपज दो-क़तार माल्ट क़िस्मों में गिनता है, जो इसी क्षेत्र के लिए विकसित की गई हैं। आईआईडब्ल्यूबीआर की क्रमांकित डीडब्ल्यूआरबी शृंखला की अन्य माल्ट-जौ क़िस्मों की तरह, इसे केवल दाना उपज के लिए नहीं, बल्कि माल्टस्टर के प्रोटीन व ग्रेडिंग मानक के अनुसार उगाया जाता है। इस चरण में जाँचे गए स्रोतों में सटीक जारी-वर्ष व वंशावली नहीं मिली।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि120–125 दिन
    उपज क्षमता45–50 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधपीले रतुआ के प्रति प्रतिरोधी
    मिट्टीदोमट
    सीज़नरबी

उपज व अवधि

पकने की अवधि

120–125 दिन

अपेक्षित उपज

45–50 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • ख़ासतौर पर उत्तर-पश्चिम मैदानी क्षेत्र की सिंचित, समय पर बोई व्यवस्था के लिए विकसित, जो इस एनडब्ल्यूपीज़ेड शृंखला में आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर के लक्षित माल्ट-गुणवत्ता स्तर से मेल खाती है
  • भारत के ब्रूइंग व माल्ट उद्योग के लिए आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर, करनाल की चलती दो-क़तार माल्ट जौ क़िस्मों की शृंखला का हिस्सा, डीडब्ल्यूआरबी 160 ("करण माल्टसोना") व डीडब्ल्यूआरबी 219 जैसी नामित बहन-क़िस्मों के साथ

ध्यान रखने योग्य बातें

  • डीडब्ल्यूआरबी 182 का सटीक जारी/अधिसूचना-वर्ष व वंशावली इस चरण में फ़ेच किए गए किसी भी स्रोत में नहीं मिली — आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर का अपना बार्ली इम्प्रूवमेंट पेज इसकी पहचान व क्षेत्र की पुष्टि करता है, पर ये विवरण नहीं देता
  • आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर की क्रमांकित डीडब्ल्यूआरबी शृंखला की अन्य माल्ट-जौ क़िस्मों में डीडब्ल्यूआरबी 160 ("करण माल्टसोना", 2019 में जारी, लगभग 53.7 क्विंटल/हेक्टेयर, 92% मोटा दाना) व डीडब्ल्यूआरबी 219 (2024 में जारी, लगभग 54.49 क्विंटल/हेक्टेयर, 132-दिन अवधि, 11.4% प्रोटीन) शामिल हैं, दोनों सीधे फ़ेच की गई ट्रिब्यून कवरेज से — यह जानकारी केवल यह संदर्भ देने के लिए है कि डीडब्ल्यूआरबी 182 संस्थान के माल्ट-जौ कार्यक्रम में कहाँ बैठती है, डीडब्ल्यूआरबी 182 के बारे में सीधा दावा नहीं

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • पंजाब
  • हरियाणा
  • उत्तर प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या डीडब्ल्यूआरबी 182 बारानी खेती के लिए उपयुक्त है?

नहीं — यह उत्तर-पश्चिम मैदानी क्षेत्र की सिंचित, समय पर बोई परिस्थितियों के लिए विकसित है; इस चरण में जाँचे गए स्रोत इसे केवल सिंचित माल्ट क़िस्म के रूप में बताते हैं।

क्या डीडब्ल्यूआरबी 182 माल्ट जौ है या फ़ीड/खाद्य जौ क़िस्म?

माल्ट जौ — आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर का अपना बार्ली इम्प्रूवमेंट पेज इसे संस्थान की दो-क़तार माल्ट क़िस्मों में गिनता है, जिसे केवल दाना उपज के लिए नहीं बल्कि माल्टस्टर के प्रोटीन/ग्रेडिंग मानक के अनुसार उगाया जाता है।

डीडब्ल्यूआरबी 182 किन राज्यों के लिए अनुशंसित है?

यह रिकॉर्ड पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश को सूचीबद्ध करता है, जो आईआईडब्ल्यूबीआर की सिंचित दो-क़तार माल्ट क़िस्मों के लिए उत्तर-पश्चिम मैदानी क्षेत्र की अनुशंसा से मेल खाता है।

डीडब्ल्यूआरबी 182 का सटीक जारी-वर्ष क्या है?

पुष्टि नहीं — इस चरण में फ़ेच किए गए किसी स्रोत ने सटीक अधिसूचना-वर्ष नहीं बताया; कहीं और बताया गया कोई भी वर्ष तब तक सावधानी से लें जब तक इसकी पुष्टि किसी आधिकारिक आईसीएआर/आईआईडब्ल्यूबीआर अधिसूचना से न हो जाए।

क्या डीडब्ल्यूआरबी 182 में कोई रोग-प्रतिरोध है?

इस रिकॉर्ड का अपना फ़ील्ड पीले रतुआ के प्रति प्रतिरोध बताता है; इस चरण में फ़ेच किए गए किसी स्रोत ने इस विशेष दावे की स्वतंत्र रूप से न तो पुष्टि की, न ही खंडन किया।

स्रोत: ICAR-IIWBR Karnal — Barley Improvement (Barley Network), The Tribune — Malt barley variety for beer, energy drinks developed (DWRB 160), The Tribune — Karnal scientists behind barley variant (DWRB 219). संपादकीय नीति.