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जौरबीखुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

DWRB 223

भारत की पहली जारी छिलका-रहित (हलरहित) जौ क़िस्म — दाना गहाई के दौरान भूसी से अलग हो जाता है। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नरबी
पकने की अवधि115–120 दिन
अपेक्षित उपज40–43 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
जौ
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
115–120 दिन
अपेक्षित उपज
40–43 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर, करनाल द्वारा 10 अप्रैल 2025 को भारत की पहली जारी छिलका-रहित जौ क़िस्म के रूप में घोषित

इस किस्म के बारे में

डीडब्ल्यूआरबी 223 आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर (करनाल) की छिलका-रहित ("नंगी") जौ क़िस्म है — भारत की पहली जारी छिलका-रहित जौ क़िस्म, जिसका भूसा गहाई के दौरान दाने से अलग हो जाता है, इसलिए खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल से पहले अलग से छिलका उतारने की ज़रूरत नहीं पड़ती। 10 अप्रैल 2025 को घोषित इस जारी होने की सीधे फ़ेच की गई ट्रिब्यून कवरेज लगभग 42.9–43 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज व 11.7% दाना प्रोटीन बताती है। वेबसर्च से मिले पर इस चरण में स्वतंत्र रूप से फ़ेच व पढ़े न गए स्रोत इसके अलावा लगभग 6.0% बीटा-ग्लूकन सामग्री व स्ट्राइप रतुआ के प्रति प्रतिरोध बताते हैं; स्ट्राइप रतुआ व पीला रतुआ एक ही रोग (पुक्सीनिया स्ट्राइफ़ॉर्मिस) हैं, इसलिए यह विवरण इस रिकॉर्ड के अपने "पीले रतुआ के प्रति अच्छी सहनशीलता" फ़ील्ड से मेल खाता है, टकराता नहीं।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि115–120 दिन
    उपज क्षमता40–43 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधपीले रतुआ के प्रति अच्छी सहनशीलता
    मिट्टीदोमट
    सीज़नरबी

उपज व अवधि

पकने की अवधि

115–120 दिन

अपेक्षित उपज

40–43 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • भारत की पहली जारी छिलका-रहित (नंगी) जौ क़िस्म — भूसा गहाई के दौरान दाने से अलग हो जाता है, इसलिए मल्टीग्रेन व हेल्थ-फ़ूड उत्पादों में इस्तेमाल से पहले अलग से छिलका उतारने की ज़रूरत नहीं
  • सीधे फ़ेच की गई ट्रिब्यून कवरेज 11.7% दाना प्रोटीन व लगभग 42.9–43 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज बताती है, दोनों इस रिकॉर्ड के अपने 40–43 क्विंटल/हेक्टेयर yieldPotential बैंड से मेल खाते हैं

ध्यान रखने योग्य बातें

  • लगभग 6.0% बीटा-ग्लूकन सामग्री — जो रक्त-शर्करा व कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन से जुड़ा यौगिक है — कई वेबसर्च परिणामों में दोहराई गई है, पर इस चरण में स्वतंत्र रूप से फ़ेच व पढ़े गए किसी पेज पर पुष्ट नहीं हुई, इसलिए इसे यहाँ वेबसर्च-सारांशित माना गया है, सीधे सत्यापित नहीं
  • सटीक वंशावली इस चरण में फ़ेच किए गए किसी भी स्रोत में नहीं मिली

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • पंजाब
  • हरियाणा
  • उत्तर प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डीडब्ल्यूआरबी 223 को अन्य जौ क़िस्मों से क्या अलग बनाता है?

यह भारत की पहली जारी छिलका-रहित (नंगी) जौ क़िस्म है — भूसा गहाई के दौरान दाने से अलग हो जाता है, इसलिए साधारण "छिलकेदार" जौ क़िस्मों के विपरीत, खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल से पहले अलग से छिलका उतारने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

डीडब्ल्यूआरबी 223 कब जारी हुई?

आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर, करनाल ने 10 अप्रैल 2025 को इसके जारी होने की घोषणा की, सीधे फ़ेच की गई ट्रिब्यून कवरेज के अनुसार।

डीडब्ल्यूआरबी 223 दाने में प्रोटीन सामग्री कितनी है?

लगभग 11.7%, जारी होने की ट्रिब्यून कवरेज के अनुसार — सीधे फ़ेच की गई, और इस रिकॉर्ड की अपनी गुणवत्ता प्रोफ़ाइल से मेल खाती है।

क्या डीडब्ल्यूआरबी 223 पीले रतुआ के प्रति प्रतिरोधी है?

इस रिकॉर्ड का अपना फ़ील्ड "पीले रतुआ के प्रति अच्छी सहनशीलता" बताता है। द्वितीयक स्रोत (इस चरण में स्वतंत्र रूप से फ़ेच नहीं किए गए) इसे स्ट्राइप रतुआ के प्रति प्रतिरोधी बताते हैं, जो पीले रतुआ जैसा ही रोग है — इसलिए दोनों विवरण मेल खाते हैं, टकराते नहीं।

क्या डीडब्ल्यूआरबी 223 एक माल्ट जौ क़िस्म है?

नहीं — इस चरण में जाँचे गए स्रोत इसे खाद्य/हेल्थ-फ़ूड छिलका-रहित जौ के रूप में रखते हैं, जो आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर की डीडब्ल्यूआरबी 182 जैसी दो-क़तार माल्ट जौ क़िस्मों से अलग है।

स्रोत: The Tribune — 12 new high-yielding varieties of wheat and barley released (DWRB 223). संपादकीय नीति.