Pusa Naveen
IARI की पुरानी खुले परागण की लौकी। फल सीधे, बेलनाकार, लगभग 550 ग्राम के हैं और गर्दन मुड़ी नहीं होती। बसंत-गर्मी और बरसात दोनों में फलती है, और राष्ट्रीय सूची में उपज 35–40 टन/हेक्टेयर दी है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- लौकी
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- ज़ायद / गर्मी
- पकने की अवधि
- पहली तुड़ाई लगभग 60–65 दिन में
- बीज दर
- 3–5 किग्रा/हेक्टेयर (लगभग 1.2–2 किग्रा/एकड़); बोने से पहले बीज को 24 घंटे भिगो दें
- अपेक्षित उपज
- 35–40 टन/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- रोग-प्रतिरोध
- खास रोग-प्रतिरोध नहीं; फल मक्खी और मिल्ड्यू पर आम तौर पर नज़र रखें
- जारी
- ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने जारी की
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
पूसा नवीन नई दिल्ली के ICAR-IARI की खुले परागण की लौकी है। फल सीधा और बेलनाकार है, वज़न लगभग 550 ग्राम और गर्दन मुड़ी नहीं होती। ऐसा आकार पैक करने और बेचने में आसान रहता है। राष्ट्रीय सूची के अनुसार यह बसंत-गर्मी और बरसात दोनों के लिए ठीक है, औसत उपज 35–40 टन/हेक्टेयर है, और इसे महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के लिए सुझाया गया है। खुले परागण की होने से किसान अपना बीज खुद रख सकते हैं।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
आजमाई हुई खुले परागण की लौकी चाहिए, जिसका फल सीधा, लगभग 550 ग्राम का और बिना मुड़ी गर्दन का हो, तो पूसा नवीन चुनिए। इसे बसंत-गर्मी या बरसात में बो सकते हैं और इसका बीज रख सकते हैं। सूची में 35–40 टन/हेक्टेयर है। पूसा नवीन से सूची में बढ़त वाली लंबी लौकी चाहिए तो पूसा समृद्धि लीजिए। फूल के सिरे की सड़न सहने वाली चाहिए तो अर्का बहार लीजिए। ज़्यादा उपज के लिए हाइब्रिड बीज ख़रीदना मंज़ूर है तो काशी बहार या पूसा हाइब्रिड-3 लीजिए।
बुवाई और खेती
- बीज दर3–5 किग्रा/हेक्टेयर (लगभग 1.2–2 किग्रा/एकड़); बोने से पहले बीज को 24 घंटे भिगो दें
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- सीधे, एक-से लंबे फल, जिनकी गर्दन मुड़ी नहीं होती, इसलिए पैक करना और बेचना आसान।
- जल्दी फलती है; गर्मी और बरसात, दोनों मौसम में उपज देती है।
- खुले परागण की है, इसलिए बीज खुद रखा जा सकता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- खास रोग-प्रतिरोध नहीं है। खरबूजे की फल मक्खी और मिल्ड्यू की देखभाल करनी होगी।
- मादा फूल और जल्दी की उपज आगे लाने के लिए पौध पर एथ्रेल का छिड़काव करें।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- पंजाब
- हरियाणा
- दिल्ली
- बिहार
- मध्य प्रदेश
- महाराष्ट्र
क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?
यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।
दूसरी किस्मों से तुलना
लौकी की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | पकने की अवधि | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Arka Bahar | खुले परागण की लौकी: सीधा, 1 किग्रा का हल्का हरा फल, फूल के सिरे की सड़न सहने वाली | पहली तुड़ाई लगभग 60–65 दिन में | 40–45 टन/हेक्टेयर | कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश |
| Kashi Bahar | पूर्वी मैदानों के लिए ज़्यादा उपज वाली F1 लौकी, लंबे, सीधे, 780–850 ग्राम के फल के साथ | पहली तुड़ाई लगभग 55–60 दिन में | 50–55 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, झारखंड |
| Punjab Komal | PAU की जल्दी वाली, CMV सहने वाली लौकी, गोल-लंबे हल्के हरे फल, लगभग 200 क्विंटल/एकड़ | बुवाई के लगभग 70 दिन बाद पहला फल | लगभग 200 क्विंटल/एकड़ (लगभग 49 टन/हेक्टेयर) | पंजाब |
| Pusa Hybrid-3 | आसान पैकिंग और लंबी दूरी के लिए बनी F1 लौकी, पूरे भारत के लिए सुझाई गई | पहली तुड़ाई लगभग 50–55 दिन में | गर्मी में 42.5 टन/हेक्टेयर, बरसात में 47 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र |
| Pusa Naveenयही पेज | खुले परागण की लौकी: सीधा, 550 ग्राम का फल, गर्दन मुड़ी नहीं, दोनों मौसम के लिए | पहली तुड़ाई लगभग 60–65 दिन में | 35–40 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र |
| Pusa Samridhi | खुले परागण की लौकी: लंबा, बिना गर्दन का फल, सूची में पूसा नवीन से 14–19% आगे | पहली तुड़ाई लगभग 50–55 दिन में | 27–31 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा |
| Pusa Sandesh | खुले परागण की गोल लौकी, लगभग 600 ग्राम की, उन रसोइयों और बाज़ारों के लिए जो गोल प्रकार ख़रीदते हैं | पहली तुड़ाई बरसात में लगभग 55–60 दिन, गर्मी में 60–65 दिन में | लगभग 32 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और लौकी का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके लौकी के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर लौकी किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरलौकी की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में लौकी की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में लौकी का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
लौकी के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पूसा नवीन कितनी उपज देती है?
राष्ट्रीय सूची में फल लगभग 550 ग्राम और उपज 35–40 टन/हेक्टेयर दी है। यह हाइब्रिड और पूसा समृद्धि की बसंत-गर्मी वाली उपज से कम है, पर हाइब्रिड बीज का ख़र्च बच जाता है।
पूसा नवीन किन मौसमों में उगा सकते हैं?
सूची के अनुसार यह बसंत-गर्मी और बरसात दोनों के लिए ठीक है। बरसात की फसल में फल मक्खी और मिल्ड्यू के लिए ज़्यादा देखभाल और अच्छी नाली चाहिए।
बिना मुड़ी गर्दन का क्या मतलब है, और यह क्यों मायने रखता है?
कुछ लौकी के फल डंठल के पास से मुड़ जाते हैं। पूसा नवीन का फल सीधा है, यानी कम बर्बादी, क्रेट में ठीक से पैकिंग और आकार देखकर ख़रीदने वालों से बेहतर भाव।
पूसा नवीन की पौध पर एथ्रेल का छिड़काव क्यों करें?
यह सलाह मादा फूल और जल्दी की उपज आगे लाने के लिए दी गई है। मात्रा और समय अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालय की सिफ़ारिश के अनुसार रखिए, और सलाह से ज़्यादा कभी मत छिड़किए।
क्या पूसा नवीन का बीज खुद रखा जा सकता है?
हाँ, यह खुले परागण की है। सबसे अच्छे, सबसे सीधे कुछ फलों को बेल पर पूरा पकने दीजिए और उन्हें दूसरे लौकी के खेतों से दूर रखिए। बीज 3–5 किग्रा/हेक्टेयर लगता है, और बोने से पहले 24 घंटे भिगोने से बीज अच्छा उगता है।
स्रोत: Checklist of Commercial Varieties of Vegetables (capsicum, carrot, cucumber, bottle gourd, bitter gourd) — TNAU Agritech national bulletin. संपादकीय नीति.
