Punjab Komal
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (लुधियाना) की लौकी, जो 1988 में जारी हुई। यह जल्दी की किस्म है, पहला फल बुवाई के लगभग 70 दिन बाद तैयार। फल गोल-लंबा (अंडाकार), मध्यम आकार का, हल्का हरा और रोएँदार है, एक बेल पर 10–12, और किस्म खीरा मोज़ेक विषाणु को सह लेती है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- लौकी
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- ज़ायद / गर्मी
- पकने की अवधि
- बुवाई के लगभग 70 दिन बाद पहला फल
- बीज दर
- 2.0 किग्रा बीज प्रति एकड़
- अपेक्षित उपज
- लगभग 200 क्विंटल/एकड़ (लगभग 49 टन/हेक्टेयर)
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- रोग-प्रतिरोध
- खीरा मोज़ेक विषाणु (CMV) को सह लेती है
- जारी
- पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना ने जारी की
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
पंजाब कोमल पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना की लौकी है, जो 1988 में जारी हुई। सब्ज़ियों की PAU की खेती-पुस्तिका इसे जल्दी पकने वाली बताती है, पहला फल बुवाई के लगभग 70 दिन बाद बेचने लायक। फल गोल-लंबा (अंडाकार), मध्यम आकार का, हल्का हरा और रोएँदार है, एक बेल पर 10–12 फल। फल कोमल होते हैं और 4 या 5 गाँठ के बाद से मध्यम लंबी, पतली डंडी पर लगते हैं। यह खीरा मोज़ेक विषाणु (CMV) को सह लेती है, और PAU औसत उपज लगभग 200 क्विंटल/एकड़ बताता है, यानी लगभग 49 टन/हेक्टेयर। PAU इसे सुधरी किस्म बताता है, हाइब्रिड नहीं।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
आप पंजाब में खेती करते हैं और खीरा मोज़ेक विषाणु को सहने वाली जल्दी की लौकी चाहिए तो पंजाब कोमल चुनिए। इसका पहला फल लगभग 70 दिन में आता है, फल गोल-लंबा और हल्का हरा होता है, और PAU के अनुसार उपज लगभग 200 क्विंटल/एकड़ (लगभग 49 टन/हेक्टेयर) है। आपका बाज़ार लंबा बेलनाकार फल माँगता है तो पंजाब बरकत (226 क्विंटल/एकड़) या पंजाब लॉन्ग लीजिए। बाज़ार लगभग गोल फल माँगता है तो पंजाब बहार (222 क्विंटल/एकड़) लीजिए। दिल्ली के पास हैं और लगभग 550 ग्राम की IARI किस्म चाहिए तो पूसा नवीन लीजिए।
बुवाई और खेती
- बुवाई का समयफ़रवरी–मार्च और जून–जुलाई; नवंबर–दिसंबर में ढककर
- बीज दर2.0 किग्रा बीज प्रति एकड़
- दूरी2.0 से 2.5 मी चौड़ी क्यारियाँ, क्यारी की दोनों तरफ़ 45–60 सेमी की दूरी पर बीज
- सिंचाईगर्मी में हर 6–7 दिन पर, बरसात में कम-कम, कुल 8–9 सिंचाई
- उर्वरकप्रति एकड़ 20–25 टन गोबर की खाद, और बुवाई पर 14 किलो N (30 किलो यूरिया) और पहली तुड़ाई पर 14 किलो N
- कटाईकिस्म और मौसम के हिसाब से बुवाई के लगभग 60–70 दिन में तैयार; कोमल, मध्यम आकार के फल हर 3 या 4 दिन पर तोड़िए
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- जल्दी की किस्म, पहला बिकने लायक फल लगभग 70 दिन में।
- खीरा मोज़ेक विषाणु को सह लेती है।
- कोमल, गोल-लंबे, हल्के हरे फल, एक बेल पर 10–12।
ध्यान रखने योग्य बातें
- यह 1988 की किस्म है। PAU की नई पंजाब बरकत (2014) की सूची में 226 क्विंटल/एकड़ और पंजाब बहार (2017) की 222 क्विंटल/एकड़ है, दोनों इसकी 200 क्विंटल/एकड़ से ऊपर।
- सहने का मतलब पूरी तरह बची रहना नहीं है, इसलिए विषाणु ले जाने वाले माहू पर नियंत्रण रखिए।
- गोल-लंबा, मध्यम आकार का फल वह लंबा बेलनाकार प्रकार नहीं है जो कुछ बाज़ार माँगते हैं, यानी पंजाब लॉन्ग या पंजाब बरकत।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- पंजाब
PAU की खाद और तुड़ाई की योजना पर चलिए
PAU लौकी के लिए सीधी योजना देता है। क्यारियाँ बनाने से पहले प्रति एकड़ 20–25 टन गोबर की खाद डालिए। बुवाई पर 14 किलो नाइट्रोजन दीजिए, यानी 30 किलो यूरिया, और पहली तुड़ाई के समय 14 किलो नाइट्रोजन और।
फसल को बार-बार सिंचाई चाहिए: गर्मी में हर 6–7 दिन पर और बरसात में कम-कम, कुल 8–9 सिंचाई। कोमल, मध्यम आकार का, चमकदार फल तोड़िए, भरपूर मौसम में हर 3 या 4 दिन पर।
पहला फल बुवाई के लगभग 70 दिन बाद आने से 15 फ़रवरी को बोई फसल लगभग 26 अप्रैल को और 15 जून को बोई लगभग 24 अगस्त को तैयार होती है। इन तारीख़ों से मज़दूर और क्रेट पहले से तय कर लीजिए।
क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?
यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।
दूसरी किस्मों से तुलना
लौकी की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | पकने की अवधि | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Arka Bahar | खुले परागण की लौकी: सीधा, 1 किग्रा का हल्का हरा फल, फूल के सिरे की सड़न सहने वाली | पहली तुड़ाई लगभग 60–65 दिन में | 40–45 टन/हेक्टेयर | कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश |
| Kashi Bahar | पूर्वी मैदानों के लिए ज़्यादा उपज वाली F1 लौकी, लंबे, सीधे, 780–850 ग्राम के फल के साथ | पहली तुड़ाई लगभग 55–60 दिन में | 50–55 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, झारखंड |
| Punjab Komalयही पेज | PAU की जल्दी वाली, CMV सहने वाली लौकी, गोल-लंबे हल्के हरे फल, लगभग 200 क्विंटल/एकड़ | बुवाई के लगभग 70 दिन बाद पहला फल | लगभग 200 क्विंटल/एकड़ (लगभग 49 टन/हेक्टेयर) | पंजाब |
| Pusa Hybrid-3 | आसान पैकिंग और लंबी दूरी के लिए बनी F1 लौकी, पूरे भारत के लिए सुझाई गई | पहली तुड़ाई लगभग 50–55 दिन में | गर्मी में 42.5 टन/हेक्टेयर, बरसात में 47 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र |
| Pusa Naveen | खुले परागण की लौकी: सीधा, 550 ग्राम का फल, गर्दन मुड़ी नहीं, दोनों मौसम के लिए | पहली तुड़ाई लगभग 60–65 दिन में | 35–40 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र |
| Pusa Samridhi | खुले परागण की लौकी: लंबा, बिना गर्दन का फल, सूची में पूसा नवीन से 14–19% आगे | पहली तुड़ाई लगभग 50–55 दिन में | 27–31 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा |
| Pusa Sandesh | खुले परागण की गोल लौकी, लगभग 600 ग्राम की, उन रसोइयों और बाज़ारों के लिए जो गोल प्रकार ख़रीदते हैं | पहली तुड़ाई बरसात में लगभग 55–60 दिन, गर्मी में 60–65 दिन में | लगभग 32 टन/हेक्टेयर | उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और लौकी का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके लौकी के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- अंकुरण कैलकुलेटरबुवाई से पहले बोरे के 100 बीज जाँचिए और देखिए कि बीज बोने लायक है या नहीं।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर लौकी किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरलौकी की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में लौकी की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में लौकी का आज का रेट देखिए।
सब्सिडी और सरकारी मदद
लौकी के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पंजाब कोमल हाइब्रिड है?
नहीं। PAU इसे 1988 में जारी सुधरी किस्म बताता है, हाइब्रिड नहीं। इसलिए स्वस्थ फसल से बीज रखा जा सकता है। बीज की फसल के लिए PAU दूसरी लौकी के खेतों से कम से कम 800 मीटर की दूरी माँगता है।
क्या पंजाब कोमल लंबी है या गोल?
PAU गोल-लंबे (अंडाकार), मध्यम आकार के फल बताता है। यह न लंबा बेलनाकार प्रकार है (पंजाब लॉन्ग, पंजाब बरकत) और न लगभग गोल प्रकार (पंजाब बहार)। कुछ वेबसाइटें इसे गोल कहती हैं, पर PAU का वर्णन गोल-लंबा है।
पंजाब कोमल कितनी उपज देती है?
PAU औसत लगभग 200 क्विंटल/एकड़ बताता है, यानी लगभग 49 टन/हेक्टेयर। PAU की नई किस्में थोड़ी ज़्यादा देती हैं: पंजाब बरकत (2014) 226 क्विंटल/एकड़ और पंजाब बहार (2017) 222 क्विंटल/एकड़।
क्या पंजाब कोमल खीरा मोज़ेक विषाणु से बची रहती है?
PAU इसे खीरा मोज़ेक विषाणु (CMV) को सहने वाली बताता है। सहने का मतलब है कि यह ज़्यादातर किस्मों से बेहतर टिकती है, पूरी तरह बची नहीं रहती। विषाणु फैलाने वाले माहू पर जल्दी नियंत्रण कीजिए, और सिकुड़ी, चित्तीदार पत्तियों वाले पौधे हटा दीजिए।
क्या पंजाब कोमल पूसा नवीन से बेहतर है?
दोनों अलग संस्थानों और अलग परीक्षणों की हैं। PAU पंजाब कोमल के लिए लगभग 200 क्विंटल/एकड़ (लगभग 49 टन/हेक्टेयर) बताता है। IARI की सूची में पूसा नवीन के लिए 35–40 टन/हेक्टेयर है, 550 ग्राम के फल के साथ। एक मौसम दोनों की एक-एक पट्टी साथ-साथ बोइए और दोनों को तौलिए।
स्रोत: Heterosis and combining ability for yield and quality traits in bottle gourd — PAU Ludhiana thesis (Krishikosh), Package of Practices for Cultivation of Vegetables 2021 — Punjab Agricultural University, Ludhiana (bottle gourd: Punjab Komal 1988). संपादकीय नीति.
