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लौकीज़ायद / गर्मीहाइब्रिडअंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Kashi Bahar

वाराणसी के ICAR-IIVR की F1 हाइब्रिड। बेल हरी और ताक़तवर है, फल लंबे, सीधे, हल्के हरे, 30–32 सेमी लंबे और 780–850 ग्राम के हैं। राष्ट्रीय सूची में 50–55 टन/हेक्टेयर दी है, जो यहाँ की लौकी किस्मों में सबसे ऊँची सूची वाली उपज है।

सीज़नज़ायद / गर्मी
पकने की अवधिपहली तुड़ाई लगभग 55–60 दिन में
अपेक्षित उपज50–55 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
लौकी
प्रकार
हाइब्रिड
सीज़न
ज़ायद / गर्मी
पकने की अवधि
पहली तुड़ाई लगभग 55–60 दिन में
अपेक्षित उपज
50–55 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
रोग-प्रतिरोध
किसी खास रोग-प्रतिरोध का दावा नहीं
जारी
ICAR-भारतीय सब्ज़ी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी ने जारी की

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

काशी बहार वाराणसी के ICAR-IIVR की हाइब्रिड लौकी है। राष्ट्रीय सूची में इसे लंबे फल वाली हाइब्रिड बताया है, जिसकी बेल हरी और ताक़तवर है और फल सीधे, हल्के हरे, 30–32 सेमी लंबे और औसतन 780–850 ग्राम के होते हैं। औसत उपज 50–55 टन/हेक्टेयर है और इसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार और झारखंड के लिए सुझाया गया है। सभी हाइब्रिड की तरह हर मौसम नया बीज ख़रीदना पड़ता है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार या झारखंड में खेती करते हैं और लंबे, सीधे, 780–850 ग्राम के फल के साथ सूची की सबसे ऊँची लौकी उपज (50–55 टन/हेक्टेयर) चाहिए तो काशी बहार चुनिए। शर्त यह है कि आप हर मौसम हाइब्रिड बीज ख़रीदने को तैयार हों। पूरे भारत के लिए सुझाई गई, पैकिंग और लंबी दूरी के लिए बनी हाइब्रिड चाहिए तो पूसा हाइब्रिड-3 लीजिए। अपना बीज खुद रखना है तो अर्का बहार या पूसा नवीन लीजिए।

बुवाई और खेती

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • यहाँ तुलना की गई लौकी किस्मों में सबसे ऊँची सूची वाली उपज, 50–55 टन/हेक्टेयर।
  • 30–32 सेमी लंबे, 780–850 ग्राम के सीधे, हल्के हरे फल।
  • ताक़तवर हरी बेल।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • हाइब्रिड बीज हर मौसम में नया ख़रीदना पड़ता है।
  • खास रोग-प्रतिरोध का दावा नहीं है, इसलिए माहू (एफिड) पर नियंत्रण और मचान फिर भी ज़रूरी हैं।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • पंजाब
  • बिहार
  • झारखंड

पहली तुड़ाई से पहले क्रेट का हिसाब लगाइए

780–850 ग्राम के फल के हिसाब से 20 किलो के क्रेट में लगभग 23 से 26 फल आते हैं। 50–55 टन/हेक्टेयर वाली सूची की फसल में पूरे मौसम में लगभग 59,000 से 70,500 फल निकलते हैं।

इतने फल समय पर तोड़ना बड़ा काम है। बेल पर ज़्यादा दिन रहने से लौकी सख़्त हो जाती है और उसका भाव गिर जाता है। तुड़ाई के पूरे दौर के लिए मज़दूर और क्रेट पहले से तय रखिए, सिर्फ़ पहले हफ़्ते के लिए नहीं।

ख़रीदार से पक्का कर लीजिए कि वह वज़न से पैसा देगा या नग से। नग से देता है तो 780–850 ग्राम का आकार आपका मुख्य बिक्री बिंदु है।

रोपाई सामग्री कहाँ से आती है

यह हाइब्रिड है, इसलिए अपनी फ़सल से रखा बीज अगली बार वैसा नहीं उगता। पौधों की ऊँचाई, पकने का समय और उपज — सब ऊपर-नीचे हो जाती है। हर सीज़न नया प्रमाणित बीज ख़रीदिए और बोरे का टैग कटाई तक सँभालकर रखिए।

दूसरी किस्मों से तुलना

लौकी की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकपकने की अवधिउपजराज्य
Arka Baharखुले परागण की लौकी: सीधा, 1 किग्रा का हल्का हरा फल, फूल के सिरे की सड़न सहने वालीपहली तुड़ाई लगभग 60–65 दिन में40–45 टन/हेक्टेयरकर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश
Kashi Baharयही पेजपूर्वी मैदानों के लिए ज़्यादा उपज वाली F1 लौकी, लंबे, सीधे, 780–850 ग्राम के फल के साथपहली तुड़ाई लगभग 55–60 दिन में50–55 टन/हेक्टेयरउत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, झारखंड
Punjab KomalPAU की जल्दी वाली, CMV सहने वाली लौकी, गोल-लंबे हल्के हरे फल, लगभग 200 क्विंटल/एकड़बुवाई के लगभग 70 दिन बाद पहला फललगभग 200 क्विंटल/एकड़ (लगभग 49 टन/हेक्टेयर)पंजाब
Pusa Hybrid-3आसान पैकिंग और लंबी दूरी के लिए बनी F1 लौकी, पूरे भारत के लिए सुझाई गईपहली तुड़ाई लगभग 50–55 दिन मेंगर्मी में 42.5 टन/हेक्टेयर, बरसात में 47 टन/हेक्टेयरउत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र
Pusa Naveenखुले परागण की लौकी: सीधा, 550 ग्राम का फल, गर्दन मुड़ी नहीं, दोनों मौसम के लिएपहली तुड़ाई लगभग 60–65 दिन में35–40 टन/हेक्टेयरउत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र
Pusa Samridhiखुले परागण की लौकी: लंबा, बिना गर्दन का फल, सूची में पूसा नवीन से 14–19% आगेपहली तुड़ाई लगभग 50–55 दिन में27–31 टन/हेक्टेयरउत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा
Pusa Sandeshखुले परागण की गोल लौकी, लगभग 600 ग्राम की, उन रसोइयों और बाज़ारों के लिए जो गोल प्रकार ख़रीदते हैंपहली तुड़ाई बरसात में लगभग 55–60 दिन, गर्मी में 60–65 दिन मेंलगभग 32 टन/हेक्टेयरउत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और लौकी का भाव क्या चल रहा है।

सब्सिडी और सरकारी मदद

लौकी के बीज या रोपण सामग्री की लागत में मदद करने वाली योजनाएँ। नियम और आवेदन का तरीक़ा हर योजना के पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

काशी बहार की उपज कितनी है?

राष्ट्रीय सूची में औसत 50–55 टन/हेक्टेयर दिया है। इसे मचान पर, अच्छे पानी और फल मक्खी की रोकथाम के साथ अच्छी तरह चलाई गई फसल का आँकड़ा मानिए, हर खेत के लिए पक्का आँकड़ा नहीं।

काशी बहार का फल कितना बड़ा होता है?

सूची में सीधे, हल्के हरे फल 30–32 सेमी लंबे और औसतन 780–850 ग्राम के बताए हैं। बड़ा खेत लगाने से पहले देख लीजिए कि आपका बाज़ार इस आकार की लौकी लेता है।

क्या काशी बहार का बीज खुद रखा जा सकता है?

नहीं। यह हाइब्रिड है, इसलिए आपकी फसल का बीज वैसे पौधे नहीं देगा और उपज गिर जाएगी। हर मौसम नया बीज ख़रीदिए।

क्या काशी बहार खीरा मोज़ेक विषाणु से बची रहती है?

राष्ट्रीय सूची में इसके लिए प्रतिरोध का दावा नहीं है, इसलिए इस पर भरोसा मत कीजिए। विषाणु फैलाने वाले माहू पर जल्दी नियंत्रण कीजिए, और सिकुड़ी, चित्तीदार पत्तियों वाले पौधे हटा दीजिए।

काशी बहार या पूसा हाइब्रिड-3: कौन-सी बेहतर है?

उपज में काशी बहार सूची में ऊपर है (50–55 टन/हेक्टेयर बनाम लगभग 42–47 टन/हेक्टेयर) और पूर्वी मैदानों के लिए सुझाई गई है। पूसा हाइब्रिड-3 पूरे भारत के लिए सुझाई गई है, इसका फल थोड़ा गदा जैसा है और आसान पैकिंग और लंबे सफ़र के लिए बना है।

स्रोत: Checklist of Commercial Varieties of Vegetables (capsicum, carrot, cucumber, bottle gourd, bitter gourd) — TNAU Agritech national bulletin. संपादकीय नीति.