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खीराखरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

Pusa Barkha

नम मानसून में अच्छा बँधने-देने को बनी बरसाती किस्म। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि45–50 दिन
अपेक्षित उपजमध्यम–उच्च
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
खीरा
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
45–50 दिन
अपेक्षित उपज
मध्यम–उच्च
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
2013 में राज्य किस्म विमोचन समिति (SVRC), दिल्ली द्वारा दिल्ली व एनसीआर के लिए जारी — एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण पेज से पुष्ट

इस किस्म के बारे में

पूसा बरखा आईएआरआई, नई दिल्ली की एक खीरा किस्म है, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण पेज से पुष्ट कि यह 2013 में राज्य किस्म विमोचन समिति (SVRC), दिल्ली द्वारा दिल्ली व एनसीआर में खेती के लिए जारी हुई। इसे उत्तर भारतीय मैदानों में ख़रीफ़-सीज़न खेती के लिए पहली अत्यंत-अगेती खीरा किस्म बताया गया है, पहली तुड़ाई के लिए 40-45 दिन में तैयार। यह उच्च नमी व ऊँचे तापमान के प्रति खेत-सहनशील तथा डाउनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोधी है, ख़रीफ़ के दौरान औसत उपज 18.8 टन/हेक्टेयर — यही विशेष कारण है कि इसे नम मानसून में प्रदर्शन के लिए विकसित किया गया, जो इस रिकॉर्ड के अपने note फ़ील्ड से मेल खाता है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि45–50 दिन
    उपज क्षमतामध्यम–उच्च
    रोग-प्रतिरोधनम-मौसम रोग सहनशील
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • कटाईपहली तुड़ाई के लिए 40-45 दिन में तैयार, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पेज के अनुसार

उपज व अवधि

पकने की अवधि

45–50 दिन

अपेक्षित उपज

मध्यम–उच्च

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • उत्तर भारतीय मैदानों के लिए पहली अत्यंत-अगेती ख़रीफ़ खीरा किस्म, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पेज के अनुसार — मानसून-सीज़न बाज़ार में शुरुआती बढ़त
  • डाउनी मिल्ड्यू प्रतिरोध को नमी/गर्मी सहनशीलता के साथ जोड़ा गया, विशेष रूप से मानसून परिस्थितियों के लिए बनाई गई

ध्यान रखने योग्य बातें

  • इस रिकॉर्ड का अपना duration फ़ील्ड 45-50 दिन कहता है, आईएआरआई पेज के 40-45 दिन के पहली-तुड़ाई आँकड़े के क़रीब पर बिल्कुल समान नहीं — एक मामूली अंतर, कठोर टकराव नहीं माना गया
  • इस रिकॉर्ड का अपना yieldPotential फ़ील्ड "मध्यम–उच्च" कहता है; आईएआरआई पेज ख़रीफ़ के लिए विशिष्ट 18.8 टन/हेक्टेयर आँकड़ा देता है — मोटे तौर पर सुसंगत, एक अधिक सटीक आँकड़े के रूप में प्रस्तुत

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पूसा बरखा कब जारी हुई?

2013, राज्य किस्म विमोचन समिति (SVRC), दिल्ली द्वारा, दिल्ली व एनसीआर में खेती के लिए, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण पेज के अनुसार।

क्या पूसा बरखा डाउनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोधी है?

हाँ, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पेज के अनुसार, उच्च नमी व ऊँचे तापमान के प्रति खेत-सहनशीलता के साथ।

पूसा बरखा की पहली तुड़ाई कितनी जल्दी होती है?

बुवाई के 40-45 दिन बाद, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पेज के अनुसार — उत्तर भारतीय मैदानों के लिए पहली अत्यंत-अगेती ख़रीफ़ खीरा किस्म बताई गई।

पूसा बरखा कितनी उपज देती है?

ख़रीफ़ सीज़न के दौरान औसत 18.8 टन/हेक्टेयर, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पेज के अनुसार।

पूसा बरखा मानसून के लिए क्यों उपयुक्त है?

यह उच्च नमी व ऊँचे तापमान के प्रति खेत-सहनशील है तथा डाउनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोधी है — बरसात के मौसम में खीरे पर सबसे संभावित रोग-दबाव।

स्रोत: Cucumber - Pusa Barkha — ICAR-IARI technology-transfer page. संपादकीय नीति.