Pusa Barkha
नम मानसून में अच्छा बँधने-देने को बनी बरसाती किस्म। अभी इसके लिए अलग से शोध कर विस्तृत पेज नहीं बनाया गया है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- खीरा
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 45–50 दिन
- अपेक्षित उपज
- मध्यम–उच्च
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 2013 में राज्य किस्म विमोचन समिति (SVRC), दिल्ली द्वारा दिल्ली व एनसीआर के लिए जारी — एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण पेज से पुष्ट
इस किस्म के बारे में
पूसा बरखा आईएआरआई, नई दिल्ली की एक खीरा किस्म है, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण पेज से पुष्ट कि यह 2013 में राज्य किस्म विमोचन समिति (SVRC), दिल्ली द्वारा दिल्ली व एनसीआर में खेती के लिए जारी हुई। इसे उत्तर भारतीय मैदानों में ख़रीफ़-सीज़न खेती के लिए पहली अत्यंत-अगेती खीरा किस्म बताया गया है, पहली तुड़ाई के लिए 40-45 दिन में तैयार। यह उच्च नमी व ऊँचे तापमान के प्रति खेत-सहनशील तथा डाउनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोधी है, ख़रीफ़ के दौरान औसत उपज 18.8 टन/हेक्टेयर — यही विशेष कारण है कि इसे नम मानसून में प्रदर्शन के लिए विकसित किया गया, जो इस रिकॉर्ड के अपने note फ़ील्ड से मेल खाता है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- कटाईपहली तुड़ाई के लिए 40-45 दिन में तैयार, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पेज के अनुसार
उपज व अवधि
पकने की अवधि
45–50 दिन
अपेक्षित उपज
मध्यम–उच्च
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- उत्तर भारतीय मैदानों के लिए पहली अत्यंत-अगेती ख़रीफ़ खीरा किस्म, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पेज के अनुसार — मानसून-सीज़न बाज़ार में शुरुआती बढ़त
- डाउनी मिल्ड्यू प्रतिरोध को नमी/गर्मी सहनशीलता के साथ जोड़ा गया, विशेष रूप से मानसून परिस्थितियों के लिए बनाई गई
ध्यान रखने योग्य बातें
- इस रिकॉर्ड का अपना duration फ़ील्ड 45-50 दिन कहता है, आईएआरआई पेज के 40-45 दिन के पहली-तुड़ाई आँकड़े के क़रीब पर बिल्कुल समान नहीं — एक मामूली अंतर, कठोर टकराव नहीं माना गया
- इस रिकॉर्ड का अपना yieldPotential फ़ील्ड "मध्यम–उच्च" कहता है; आईएआरआई पेज ख़रीफ़ के लिए विशिष्ट 18.8 टन/हेक्टेयर आँकड़ा देता है — मोटे तौर पर सुसंगत, एक अधिक सटीक आँकड़े के रूप में प्रस्तुत
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पूसा बरखा कब जारी हुई?
2013, राज्य किस्म विमोचन समिति (SVRC), दिल्ली द्वारा, दिल्ली व एनसीआर में खेती के लिए, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण पेज के अनुसार।
क्या पूसा बरखा डाउनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोधी है?
हाँ, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पेज के अनुसार, उच्च नमी व ऊँचे तापमान के प्रति खेत-सहनशीलता के साथ।
पूसा बरखा की पहली तुड़ाई कितनी जल्दी होती है?
बुवाई के 40-45 दिन बाद, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पेज के अनुसार — उत्तर भारतीय मैदानों के लिए पहली अत्यंत-अगेती ख़रीफ़ खीरा किस्म बताई गई।
पूसा बरखा कितनी उपज देती है?
ख़रीफ़ सीज़न के दौरान औसत 18.8 टन/हेक्टेयर, एक सीधे फ़ेच किए गए आईएआरआई पेज के अनुसार।
पूसा बरखा मानसून के लिए क्यों उपयुक्त है?
यह उच्च नमी व ऊँचे तापमान के प्रति खेत-सहनशील है तथा डाउनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोधी है — बरसात के मौसम में खीरे पर सबसे संभावित रोग-दबाव।
स्रोत: Cucumber - Pusa Barkha — ICAR-IARI technology-transfer page. संपादकीय नीति.
